वायरल फीवर को हल्के में न लें मरीज

विटामिन व प्रोटीन युक्त आहार ग्रहण करें। भोजन में लहसुन हल्दी अदरक काली मिर्च का प्रयोग करें। यथासंभव में खजूर व कीवी का सेवन करें। खाने के साथ सलाद अवश्य लें। दिन में आठ से दस गिलास गर्म पानी पीएं।

JagranThu, 24 Jun 2021 01:36 AM (IST)
वायरल फीवर को हल्के में न लें मरीज

महराजगंज: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनकटी के चिकित्सक डा. अनिरुद्ध पांडेय ने कहा कि कोरोना से डरकर नहीं लड़कर मुकाबला कर इस बीमारी को हराया जा सकता है। कोरोना मरीज घबराएं नहीं, सकारात्मक हो कर मुकाबला करें। जिससे इस बीमारी से जीता जा सकता है। इससे निपटने के लिए दिनचर्या में बदलाव करते हुए योग, मास्क सैनिटाइजर एवं मौसमी फलों के सेवन को शामिल करना होगा। साथ ही कहा कि बुखार को वायरल फीवर मानकर हल्के में मत लें। क्योंकि यह लापरवाही घातक हो सकती है। इसलिए बीमारी की चपेट में आने से पहले ही सतर्क हो जाएं और सेहत पर ध्यान दें। तैलीय खाद्य पदार्थो से परहेज करें।

विटामिन व प्रोटीन युक्त आहार ग्रहण करें। भोजन में लहसुन, हल्दी, अदरक, काली मिर्च का प्रयोग करें। यथासंभव में खजूर व कीवी का सेवन करें। खाने के साथ सलाद अवश्य लें। दिन में आठ से दस गिलास गर्म पानी पीएं। गले में संक्रमण से बचने के लिए गर्म पानी से एक बार गरारा करें। धूमपान से बचें। इन सबके बाद भी अगर कोई लक्षण मिलते हैं, तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क कर कोरोना की जांच कराएं और इलाज कराएं। रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है मार्जरी आसन

महराजगंज: मार्जरी आसन रीढ़ की हड्डी के लिए सबसे अच्छे योग में से एक है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। इसके अभ्यास से गर्दन के दर्द को भी कम किया जा सकता है। यह कहना है कि लोहिया नगर निवासी योग साधक विनोद कुमार का। उन्होंने बताया कि इस आसन को करने के लिए दोनों घुटनों को टिकाकर बैठ जाएं। दोनों हाथों को फर्श पर आगे की ओर रखें। दोनों हाथों पर थोड़ा भार डालते हुए कूल्हों को ऊपर उठाएं। जांघ को ऊपर की ओर सीधा करके पैर के घुटनों पर 90 डिग्री का कोण बनाएं। इस स्थिति में छाती फर्श के समानांतर होगी। इसके बाद एक लंबी सांस लें और सिर को पीछे की ओर करें। नाभि को नीचे से ऊपर की तरफ करें और रीढ़ की हड्डी का निचला भाग ऊपर उठाएं। सांस को बाहर छोड़ते हुए सिर को नीचे की ओर झुकाएं और मुंह की ठुड्डी को छाती से लगाने का प्रयास करें। इस स्थिति में घुटनों के बीच की दूरी को देंखे और ध्यान रखें की इस मुद्रा में आपके हाथ झुकने नहीं चाहिए। सांस को लंबी और गहरी रखें। अब फिर से सिर को पीछे की ओर करें और इस प्रक्रिया को दोहराएं। इस क्रिया को 10-20 बार दोहरा सकते हैं। उन्होंने बताया कि गर्दन में चोट या दर्द है, तो इस आसन को ना करें।

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