आयुष्मान कार्ड बनवाएं, मुफ्त इलाज की सुविधा का लाभ पाएं

आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी व जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. आइए अंसारी ने दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक ब्लाक के तीन-तीन गांवों में सेवा दिवस आयोजित कराकर आयुष्मान कार्ड बनवाए जा रहे है। जिनके पास प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का मूल पत्र प्राप्त हो गया हो वह अपना कार्ड बनवा लें।

JagranMon, 02 Aug 2021 01:38 AM (IST)
आयुष्मान कार्ड बनवाएं, मुफ्त इलाज की सुविधा का लाभ पाएं

महराजगंज: आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड (गोल्डेन कार्ड) मुहैया कराने के लिए निश्शुल्क आयुष्मान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। यह आगामी नौ अगस्त तक चलेगा। इसके तहत प्रतिदिन सभी बारह ब्लाकों के 36 गांवों में कैंप लगाकर कार्ड बनाया जा रहा है। पात्र व्यक्ति शिविर में जाकर अपना आयुष्मान कार्ड बनवाएं और सरकार की पांच लाख तक की मुफ्त इलाज की सुविधा का लाभ पाएं।

यह जानकारी आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी व जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. आइए अंसारी ने दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक ब्लाक के तीन-तीन गांवों में सेवा दिवस आयोजित कराकर आयुष्मान कार्ड बनवाए जा रहे है। जिनके पास प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का मूल पत्र प्राप्त हो गया हो, वह अपना कार्ड बनवा लें। किसी भी लाभार्थी को आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा भेजे गए पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी साथ लाना होगा। इस कार्य में आशा, आरोग्य मित्र के अलावा पंचायत प्रतिनिधियों से भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में आयुष्मान भारत योजना के कुल एक लाख 48 हजार 450 लाभार्थी परिवार है, जिसमें कुल लाभार्थियों की संख्या करीब सात लाख 42 हजार 250 है। इनमें से 29 जुलाई तक एक लाख 63 हजार 491 लोगों का आयुष्मान कार्ड बना दिया गया है।

लाभार्थियों को नहीं मिल रहा प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना का लाभ

महराजगंज: फरेंदा विकास खंड के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं व प्रसूताओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना का लाभ सुचारु रूप से नहीं मिल पा रहा है। इस योजना के अंतर्गत गर्भावस्था से लेकर प्रसव होने तक प्रसूताओं को पौष्टिक आहार व अन्य जरूरतों को पूरा करने तथा मातृ व शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से तीन किस्तों में प्रसूताओं को छह हजार रुपये भुगतान किए जाने का प्रावधान है।

बावजूद इसके अधिकतर नए लाभार्थियों को इस योजना का लाभ अब तक नहीं मिल सका है।

स्वास्थ्य विभाग की माने तो भारत की हर तीसरी महिला अल्पपोषण व हर दूसरी महिला एनीमिया की शिकार है। जिससे प्रसव के दौरान प्रसूता मौत के गाल में चली जाती है। इसकी रोकथाम के मद्देनजर सरकार द्वारा यह योजना वर्ष 2013 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत चलाया जाता है, जो जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत 2017 से लागू की गई है। इस योजना के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिला व माताओं को ?6000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता राशि तीन किस्तों में प्रथम बार गर्भधारण के पंजीकरण कराने, दूसरी किस्त प्रसव के बाद स्तनपान कराने जबकि तीसरी किस्त निर्धारित टीकाकरण बच्चे व उसकी मां के कराने पर सीधे उनके खाते में जाती है।

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