कागजों में संचालित हो रहे सामुदायिक शौचालय, हकीकत में लटक रहे ताले

स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले वित्तीय वर्ष में लाखों रुपये की लागत से ग्राम पंचायतों में ग्राम निधि के खाते से सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए धन मुक्त किया गया था। जिले में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 882 गांवों के सापेक्ष 740 गांवों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण हुआ है शेष 104 गांवों में यह अभी भी निर्माणाधीन हैं।

JagranWed, 28 Jul 2021 01:50 AM (IST)
कागजों में संचालित हो रहे सामुदायिक शौचालय, हकीकत में लटक रहे ताले

महराजगंज: पर्यावरण को स्वच्छ रखने व गांव के लोगों को खुले में शौच से मुक्ति के लिए बने सामुदायिक शौचालय कागजों पर ही संचालित हो रहे हैं। रखरखाव व देखरेख के लिए छह महीने का भुगतान 54 हजार रुपये की रकम स्वयं सहायता समूह के खातों में भेजी गई हैं। जबकि हकीकत तो यह है कि बनने के बाद शौचालयों में ताले लटक रहे हैं। इसकी वजह से लोगों को अब भी खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले वित्तीय वर्ष में लाखों रुपये की लागत से ग्राम पंचायतों में ग्राम निधि के खाते से सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए धन मुक्त किया गया था। जिले में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 882 गांवों के सापेक्ष 740 गांवों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण हुआ है, शेष 104 गांवों में यह अभी भी निर्माणाधीन हैं। 38 ग्राम पंचायतों में भूमि न मिलने से यहां पर इसकी शुरुआत नहीं हो सकी। पिछले दिनों विभाग द्वारा 740 बनकर तैयार हुए सामुदायिक शौचालयों को न सिर्फ 616 स्वयं सहायता समूहों को संचालन के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई , बल्कि उसके सापेक्ष 492 स्वयं सहायता समूहों को 2.65 करोड़ रुपये भी 54 हजार की दर से जारी कर दिए गए। लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी गांवों की सूरत नहीं बदली। लोग आज भी सामुदायिक शौचालय खुला न होने के कारण खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। गांवों के लोगों का कहना है। निर्माण के बाद अब तक ताला नहीं खुला है। जिसकी वजह से अभी भी गांव के लोगों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।

निचलौल संवाददाता के अनुसार मिठौरा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम सभा पतरेंगवा में बना सामुदायिक शौचालस औचित्यविहीन साबित हो रहा है। शौचालय भवन बनकर तैयार है, इतना ही नहीं इसको स्वयं सहायता समूह को संचालन की जिम्मेदारी भी दे दी गई है। लेकिन इसके बावजूद अभी तक इसका ताला नहीं खुल सका। फरेंदा संवाददाता के अनुसार धानी ब्लाक के कानापार स्थित सामुदायिक शौचालय भी बनने के बाद आजतक शुरू नहीं हो सका।

सीडीओ गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालयों के संचालन के लिए स्वयं सहायता समूहों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जहां पर स्वयं सहायता समूह नहीं हैं वहां ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी तय की गई है। जिले के जिन ग्राम पंचायतों में लापरवाही बरती जा रही है, वहां पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

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