जीका वायरस को लेकर यूपी के सभी जिलों में अलर्ट, मरीज मिलने पर तीन किलोमीटर क्षेत्र की होगी मैपिंग

जीका वायरस का मरीज कानपुर में पाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के सभी जिलों को अलर्ट जारी कर दिया गया है। जीका वायरस का रोगी मिलने पर मरीज के घर के इर्द-गिर्द तीन किलोमीटर के क्षेत्र की मैपिंग की जाएगी।

Umesh TiwariMon, 25 Oct 2021 11:10 PM (IST)
यूपी के सभी जिलों में जीका वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया गया।

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। जीका वायरस का मरीज कानपुर में पाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के सभी जिलों को अलर्ट जारी कर दिया गया है। जीका वायरस का रोगी मिलने पर मरीज के घर के इर्द-गिर्द तीन किलोमीटर के क्षेत्र की मैपिंग की जाएगी। यहां स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बुखार से पीड़ित लोगों को चिन्हित करेंगी। ऐसे लोग जिनमें जीका वायरस से संक्रमित होने के लक्षण मिलेंगे उनकी जांच कराई जाएगी। अस्पतालों में भी पर्याप्त इंतजाम किए जाएंगे।

स्वास्थ्य महानिदेशक डा. वेद ब्रत सिंह की ओर से सभी जिलों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वह रैपिड रिस्पांस टीम का गठन करें और मरीजों को चिन्हित करें। यह टीमें बुखार पीड़ित मरीजों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं और जीका वायरस प्रभावित राज्य केरल और राजस्थान से आने वाले लोगों को चिन्हित करेंगी। वहीं विदेश यात्रा खासकर अफ्रीकी देशों से आने वालों पर नजर रखी जाएगी। संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे।

निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी और निजी अस्पतालों में जहां बुखार से पीड़ित रोगी भर्ती हैं, वहां इसके लक्षण वाले मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे। अगर किसी मरीज में जीका वायरस की पुष्टि होती है तो उसे 14 दिनों तक अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। सभी जिलों की निगरानी के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। 

बता दें कि जीका वायरस संक्रमित एडीज प्रजाति के मच्छरों के काटने के कारण होता है। जीका वायरस से पीड़ित मरीज को तेज बुखार, शरीर पर लाल रंग के दाने, आंखों में जलन और मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द होता है। तीन से 14 दिनों के अंदर इसके लक्षण दिखने लगते हैं। फिलहाल मच्छरों से बचाव के पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं।

जीका वायरस के संक्रमण से सबसे बड़ा खतरा गर्भस्थ शिशुओं को होता है। अगर मां को संक्रमण हो गया तो यह वायरस शिशु के शरीर में पहुंच जाता है और उसके न्यूरो सिस्टम को प्रभावित कर देता है। बच्चे का सिर छोटा हो जाता है। कोशिकाएं नहीं बन पाती और उसके स्पाइनल कार्ड में सूजन आ जाती है, जिससे उसका मस्तिष्क प्रभावित होता है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
You have used all of your free pageviews.
Please subscribe to access more content.
Dismiss
Please register to access this content.
To continue viewing the content you love, please sign in or create a new account
Dismiss
You must subscribe to access this content.
To continue viewing the content you love, please choose one of our subscriptions today.