World Child Labor day 2021: लखनऊ के 10 वार्ड बाल श्रम से मुक्त, 110 में 43 वार्डों में काम कर रहे बाल श्रमिक

World Child Labor day 2021 लखनऊ में 110 वार्ड में 43 हॉटस्पॉट वार्ड चिन्हित हैं जहां 25 से अधिक बाल श्रमिक काम करते हैं। श्रम विभाग द्वारा उनमें से 10 वार्ड को बाल श्रम से मुक्त कर दिया है।

Anurag GuptaSat, 12 Jun 2021 11:09 AM (IST)
लखनऊ में 110 वार्डों में 43 वार्डों को बाल श्रमिक बाहुल्य के रूप में चिन्हित किया गया है।

लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। पढ़ाई व खेलने की उम्र में काम करने वाले बाल श्रमिकों को समाज की मुख्य धारा में लाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने का प्रयास जारी है। लखनऊ में 110 वार्ड में 43 हॉटस्पॉट वार्ड चिन्हित हैं जहां 25 से अधिक बाल श्रमिक काम करते हैं। उनमे से 10 वार्ड को बाल श्रम से मुक्त कर दिया गया है। श्रम विभाग के इस प्रयास से मुक्त हुए बाल श्रमिकों को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। हॉट स्पॉट से 2416 बाल श्रमिकों में 1759 को प्राथमिक विद्यालयों में नामांकित कराया गया। 507 बाल श्रमिकों के परिवार को निर्माण से जोड़कर बच्चों को कार्य से मुक्त किया गया। 12 जून को अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल श्रमिकों की योजनाओं और हकीकत की पड़ताल भी श्रम विभाग के माध्यम से की जाएगी।

बाल श्रम के हॉट स्पॉर्ट वार्ड : अंबेडकर नगर, इंदिरा प्रियदर्शिनी,मनकामेश्वर,राजा बिजली पासी द्वितीय, इब्राहिमपुर प्रथम, शारदानगर प्रथम व द्वितीय, शहीद भगत सिंह, सरोजनीनगर द्वितीय, मालवीयनगर, न्यू हैदरगंज तृतीय,बालागंज, जानकीपुरम प्रथम, हजरतगंज, केसरीखेड़ा, लालकुआं,कन्हइया माधोपुर द्वितीय, खरिका वार्ड, डालीगंज-निरालानगर, तिलकनगर-कुंडरी रकाबगंज,चिनहट प्रथम, रफी अहमद किदवई, चित्रगुप्तनगर, अयोध्यादास द्वितीय, इस्माइलगंज द्वतीय, लाला लाजपतराय, गोमतीनगर, महात्मा गांधी, राजीव गांधी प्रथम, कुंवर ज्योति प्रसाद, लेबर कॉलोनी,गोलागंज, पीरजलील, शीतला देवी वार्ड,शंकरपुरवा प्रथम, इंदिरानगर, मल्लाही टोला द्वितीय, लालबहादुर शास्त्री द्वितीय, नजरबाग, अंबरगंज,मौलवीगंज, राजाबाजार, भवानीगंज व अलीगंज।

बाल श्रमिकों से मुक्त वार्ड : तत्कालीन उप श्रमायुक्त रवि श्रीवास्तव ने बताया कि शहर में उनकी पढ़ाई के लिए अलग से बाल श्रमिक विद्यालय खोलने का प्रस्ताव है। इसके अलावा बाल श्रमिक के रूप में चिन्हित बच्चों को विद्यार्जन के लिए एक हजार रुपये महीने का मानदेय भी दिया जाता है। लखनऊ में 110 वार्डों में 43 वार्डों को बाल श्रमिक बाहुल्य के रूप में चिन्हित किया गया है, इनमे से 10 वार्ड को बाल श्रम से मुक्त कर दिया गया। 183 बच्चों काे चिन्हित कर बालश्रम विद्या योजना का लाभ दिया जा रहाहै।

हॉटस्पॉट जिलों अवमुक्त बाल श्रमिकों से संवाद आज : सूबे के 20 सर्वाधिक बाल श्रम वाले जिलों में यूनिसेफ़ व श्रम विभाग द्वारा संचालित नया सवेरा योजना के शहरी एवं ग्रामीण हाॅटस्पॉटों के लाभार्थियों से सीधा संवाद होगा। श्रम विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर कार्यस्थलों से अवमुक्त कराकर व शिक्षा की मुख्यधारा में सम्मिलित कराए गए बाल श्रमिक व उनके परिवारों से सीधा संवाद वर्चुअल संवाद होगा। श्रम एवं सेयोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य,अपर मुख्य सचिव श्रम सुरेश चंद्रा व श्रमायुक्त मुहम्मद मुस्तफ़ा संवाद के बाद योजनाओं का लाभ देेंगे।

1986 से लागू है बाल श्रम निषेध अधिनियम : बाल श्रम को रोकने के लिए हर साल 12 जून को विश्व बालश्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 23, खतरनाक उद्योगों में बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाता है। भारत की केंद्र सरकार ने 1986 में बालश्रम निषेध और नियमन अधिनियम पारित कर दिया। इस अधिनियम के अनुसार बालश्रम तकनीकी सलाहकार समिति नियुक्त की गई। इस समिति की सिफारिश के अनुसार, खतरनाक उद्योगों में बच्चों की नियुक्ति निषिद्ध है।

अधिनियम से प्रभावित बच्चे : केस एक- कानपुर रोड के बाराबिरवा में 12 साल के शाजिद (बदला हुआ नाम) मोटर साइकिल के गैरेज पर काम करता है। पिता जी का निधन हो गया और दो बहनें घर में मां का काम में हाथ बंटाती हैं। 50 रुपये रोज पर वह काम करता रहा लेेकिन स्वयं सेवी संस्थान ने उसे बाल श्रमनिधेष कानून के तहत काम से अलग कर दिया। हालात यह है कि वह अब गांव में मां के साथ मजदूरी कर रहा है।

केस-दो फिनिक्स माॅल के पास गुब्बारा बेचकर परिवार का खर्च चलाने वाला राहुल (बदला हुआ नाम) भले ही 12 साल का है, लेकिन गलत संगत ने उसे नशेड़ी बना दिया। उसकी मां उसे हर रात पकड़ कर घर ले जाती है। मां का कहना है कि मेरे पति का निधन हो गया तो उसे घर के पास गैरेज में काम पर रखा था। पुलिस छापे में उसे बाल मजदूरी के नाम पर पकड़ा गया था, घर छोड़ दिया गया। फिर गुब्बारा बेचने लगा। ह्वाइटनर को दिनभर कपड़े में लेकर सूंघता रहता है।

इनका रखें ध्यान

14 साल से कम उम्र के बच्चों को काम पर नहीं रखा जा सकता है। घर में नौकर के रूप में नहीं रख सकते। ऐसा करने बाल श्रम निषेध कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है। 14 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को काम पर रखा जा सकता है, लेकिन कार्यस्थल की सूची में शामिल खतरनाक व्यवसाय नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो काई भी नजदीकी पुलिस या मिजस्ट्रेट से शिकायत कर सकते हैं। कोई भी व्यक्ति जो 14 साल से कम या 14 से 18 वर्ष के बच्चे को किसी खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया में काम देता है, उसे छह महीने से दो साल तक की सजा हो सकती है। 20 से 50 हजार तक का जुर्माना भी हो सकता है। फैक्ट्रीज अधिनियम, खान अधिनियम, शिपिंग अधिनियम ,मोटर परिवहन श्रमिक अधिनियम के तहत बच्चों को काम पर रखने के लिए सज़ा का प्रावधान है। इस क़ानून का उल्लंघन करने वाली परिस्थितियों से जिन बच्चों को बचाया जाता है। उन पर किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं सुरक्षा) अधिनियम 2015 लागू होता है। 

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