लखनऊ के कोनेश्वर घाट पर दशकों से है पुल का इंतजार, सर्वे कर भूल गई यूपी सरकार

बल्लियों पर टिके लकड़ी के पुल पर जान खतरे में डालकर मोटरसाइकिल निकालते लोग शेरपुर गांव के निवासी हैं। दशकों से इसी तरह आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के हजारों लोग स्थायी पुल नहीं होने से जान जोखिम में डालकर बेहता नाला पार करते हैं।

Vikas MishraWed, 24 Nov 2021 11:51 AM (IST)
लखनऊ के कोनेश्वर घाट पर पुल नहीं होने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

लखनऊ, [आशीष पांडेय]। बल्लियों पर टिके लकड़ी के पुल पर जान खतरे में डालकर मोटरसाइकिल निकालते लोग शेरपुर गांव के निवासी हैं। दशकों से इसी तरह आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के हजारों लोग स्थायी पुल नहीं होने से जान जोखिम में डालकर बेहता नाला पार करते हैं। नेताओं ने चुनावी मौसमों में वादे तो खूब किए लेकिन भूल गए। एक बार फिर चुनाव की आहट से गांव वालों को उम्म्मीद जगी है।

लजीज दशहरी के लिए दुनिया भर में मशहूर मैंगो बेल्ट मलिहाबाद कस्बे को शेरपुर भौसा, खेरवा, मोहम्मद टोला, शीतलन टोला सहित कई ग्राम पंचायतों तक पहुचने का यही एकमात्र सहारा है। बारिश के मौसम में जब नाला उफान पर होता है तो यहां से निकलना भी असंभव हो जाता है। ऐसे में लोगों को अपने गांव तक पहुंचने में दस से 12 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। दशकों से कोनेश्वर घाट पर पुल बनाने की मांग कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में बेहता नाले का पानी बस्ती तक पहुँच आता है।

पुल नहीं होने विकास तो ठप है ही लोगों को कई तरह की सामाजिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है लोग शादी ब्याह से कतराने लगे हैं। गांव तक रास्ता नहीं होने की वजह से शादी समारोहों में लोग पहुंचने से कतराते हैं। ग्रामीणों का तो यहां तक कहना है कि इन गांवों में लोग अपने रिश्ते करने से कतराते हैं। पुल नहीं बनने से लोग शादी ब्याह के लिए यहां के लड़कों और लड़कियों को प्राथमिकता नहीं देते हैं। लोगों को बाहर जाकर समारोह करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। 

ऐतिहासिक मंदिर तक पहुंचने में हो रही दिक्कतः करीब तीन सौ वर्ष पुराने कोनेश्वर महादेव के ऐतिहासिक मंदिर में दूर दराज गांवो से हजारों लोग सुप्रसिद्ध कार्तिक का मेला देखने के लिए आते है। पुल न होने से काफी दूरी तय करनी पड़ती है। बहुत से श्रद्धालु रास्ता नहीं होने से पहुंच ही नहीं पाते हैं। 

अंतिम संस्कार के लिए दस किमी का चक्करः मोहम्मडन टोला निवासी ग्रामीण दिनेश कुमार का कहना है कि कोनेश्वर घाट पर पुल नही होने से ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय कर दुलारमऊ गांव से घूम कर जाना पड़ता है। कुंडरा कला गांव निवासी मेवा लाल कहना है कि कोनेश्वर घाट पर बेहता नाले पर पुल की मांग दशकों से की जा रही है लेकिन अभी तक यह पुल नहीं बन सका है। वरिष्ठ भाजपा नेता सैयद खलील अहमद का कहना है करीब दो साल पहले सेतु निगम द्वारा पुल का सर्वे किया गया था लेकिन तब से मामला फाइलों में लटका है। शीतलन टोला निवासी रघुवीर कहना है कि नाला पार करने के लिए काम चलाऊ लकड़ी का पुल बना लेते हैं लेकिन बारिश में पानी बढ़ने पर वहां से भी आना जाना बंद हो जाता है। 

मंत्री बोले पता है, जल्दी ही शुरू होगा कामः मोहनलालगंज के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर का कहना है कि कोनेश्वर घाट पर पुल की लंबे समय से आवश्यकता है। मेरा प्रयास जारी है। सेतु निगम ने सर्वे कर लिया है। जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा।

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