बाराबंकी में स्ट्राबेरी का पौधा तैयार करने लगे विष्णु, लागत कम करने के ल‍िए खोजा नया तरीका

हिमांचल प्रदेश और महाराष्ट्र से लाए पौधों से तैयार करते हैं नई नर्सरी।

रनर विधि से छोटी-छोटी डिब्बियों में जैविक खाद भरकर उसमें स्ट्राबेरी के पौधों की टहनियों को लगा देते हैं। पानी का प्रतिदिन ड्रीप के माध्यम से छिड़काव करते हैं और एक सप्ताह में पौधों के कलम में जड़े निकल आती हैं और नर्सरी तैयारी हो जाती है।

Publish Date:Sun, 17 Jan 2021 04:26 PM (IST) Author: Anurag Gupta

बाराबंकी, [दिलीप तिवारी]। विष्णु कुमार स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। स्ट्राबेरी का पौधा हिमाचल प्रदेश व महाराष्ट्र से लाते हैं। इसमें एक पौधा 40 से 45 रुपये का पड़ता है। ऐसे में लागत अधिक आने पर किसान खुद स्ट्राबेरी का पौधा बनाने लगा है। एक नर्सरी तैयार कर पौधों को रोपित कर दिया है, अब दूसरी नर्सरी तैयार करने के लिए स्ट्राबेरी के पौधों की टहनियों को जैविक खाद में दबाकर नया पौधा बनाने में लगा है। स्ट्राबेरी की खेती में एक बीघा में लगभग एक लाख बीस हजार की लागत आती है। सबसे अधिक लागत पौधों को खरीदने और लाने में लगती है।

लागत कम करने के लिए सुबेहा के ग्राम बिद्दी का पुरवा के किसान विष्णु शुक्ला नई तरकीब खोज निकाली है। रनर विधि से छोटी-छोटी डिब्बियों में जैविक खाद भरकर उसमें स्ट्राबेरी के पौधों की टहनियों को लगा देते हैं। पानी का प्रतिदिन ड्रीप के माध्यम से छिड़काव करते हैं और एक सप्ताह में पौधों के कलम में जड़े निकल आती हैं और नर्सरी तैयारी हो जाती है। इस बार सि‍तंंबर माह में हिमाचल प्रदेश से लगभग 14 हजार पौधे लाए थे, उसमें से लगभग 16 हजार पौधों नये पौधे बनाकर एक एकड़ में स्ट्राबेरी लगा दिया है। विष्णु ने बताया कि फिर से नर्सरी तैयार की जा रही है। इसी माह में पौधे रोपित कर दिए जाएंगे, तीन माह में फल देने लायक हो जाएंगे और तीन माह तक फल देते रहेंगे।

सात माह में साढ़े चार लाख का मुनाफा : स्ट्राबेरी की खेती में प्रति बीघा लगभग एक लाख 20 हजार की लागत आती है। लगभग सात सौ रुपये किलो बिकता है। डेढ़ लाख का शुद्ध मुनाफा होता है। उनके अनुसार एक एकड़ में साढ़े चार लाख का मुनाफा होता है। ङ्क्षसतबर माह में स्ट्राबेरी की रोपाई की थी, जनवरी के अंत तक फल आ जाएंगे और यह फल मई माह तक आते रहेंगे।

इंटर पास ने तलाशी थी नौकरी

बिद्दीपुरवा के विष्णु शुक्ला बताते हैं कि वह इंटर तक पढ़ाई की है। नौकरी की तलाश में हरियाणा गए थे, जहां पर स्ट्रॉबेरी की खेती देखी। एक बीघा से अब एक एकड़ में खेती करने लगे हैं। चार वर्षों से स्ट्राबेरी लगा रहे हैं।

 

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