धोखाधड़ी कर लग्जरी कार बेचने वाला बाराबंकी में गिरफ्तार, क‍िराए का करार कर ऐसे करता था जालसाजी

11 जून को मिली सूचना पर बहराइच के हुजूरपुर बांसगांव महोली के रहने वाले रजीउल्ला खां 32 को रोडवेज बस स्टाफ से गिरफ्तार किया गया है। आरोपित की निशानदेही पर धोखाधड़ी कर बेची गयी 32 कार बरामद की गई हैं।

Anurag GuptaSat, 12 Jun 2021 05:13 PM (IST)
लखनऊ हजरतगंज में है कार बाजार व ट्रेवल्स का कार्यालय। बहराइच के मुख्यारोपित से बरामद हुई 32 लग्जारी कार।

बाराबंकी, जेएनएन। टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसी से किराए का करार करके लोगों की लग्जरी कार बेचने वाले शातिर जालसाज को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित की निशानदेही पर पुलिस ने 32 कार बरामद की हैं। जिनकी कीमत करीब 14 करोड़ बताई जा रही है। आरोपित मूल रूप से बहराइच का है जिसने लखनऊ हजरतगंज में ट्रेवेल्स का आफिस खोल रखा था, जहां से लखनऊ, गाेंडा, बाराबंकी आदि जिले के लोगों को अपना शिकार बनाया था।

एसपी जमुना प्रसाद ने बताया कि प्रकरण में एएसपी डा. अवधेश सिंह, सीओ सीमा यादव के पर्यवेक्षण में तीन टीम सर्विलांस, स्वाट व थाना कोतवाली नगर टीम का गठन कर लगाया गया था। 11 जून को मिली सूचना पर बहराइच के हुजूरपुर बांसगांव महोली के रहने वाले रजीउल्ला खां 32 को रोडवेज बस स्टाफ से गिरफ्तार किया गया है। आरोपित की निशानदेही पर धोखाधड़ी कर बेची गयी 32 कार बरामद की गई हैं। उसने आरआर कार बाजार टूर एण्ड ट्रेवेल्स के नाम से हजरतगंज‚ लखनऊ में ऑफिस खोल रखा है। ऑफिस के सहारे लोगों से प्रतिमाह अच्छा किराया देने का प्रलोभन देकर कार ले लेता था। बरामद कार में इनोवा, एक्सयूवी, डिजायर, वैगनआर, स्कार्पियो, सैंट्रो, ईआन, ब्रेजा, इको स्पोर्ट्स, फार्चुनर आदि शामिल हैं। एसपी ने बताया कि अब करीब सवा सौ कार इसी तरह बेच चुका है। गिरोह में अन्य सदस्यों का पता लगाया जा रहा है।

ऐसे प्रकाश में आया प्रकरण : एसपी ने बताया कि नौ जून को टिकैतनगर के हसौर गांव में रहने वाले पवन कुमार मौर्या उनके समक्ष पेश हुए थे। जिनकी शिकायत पर जब उसे कार दिलाने का प्रयास किया गया तो कई लोग ऐसे संपर्क में आए जिनके साथ रजी उल्ला खां ने उनकी कार इसी तरह किराए पर चलाने के नाम पर लेकर बेच दिया था। इसके बाद कोतवाली नगर में आरोपित पर जालसाजी, अमानत में खयानत व धमकी देने आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

दस से 50 हजार तक करार : वाहन मालिकों से रजी वाहन के हिसाब से किराए का करार करता था। फारचूनर और इनोवा आदि कार का 50 हजार रुपये जबकि छोटी कार के लिए 20 हजार रुपये तक देने का लिखित करार होता था। तीन चार माह तक किराया देने के बाद वह इस दौरान वाहन का ग्राहक तलाश कर बेच देता था। औने

पोने रेट पर बेचते समय वह 80 प्रतिशत भुगतान लेता था और 20 प्रतिशत ट्रांसफर के बाद कराने की बात करता था और फिर ट्रांसफर नहीं करा पाता था। 

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