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यूपी सरकार ने शमन योजना 2020 को दी मंजूरी, शहरों कम दरों पर ज्यादा अवैध निर्माण करा सकेंगे वैध

लखनऊ, जेएनएन। शहरों में अवैध निर्माण को विनियमित करने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने शमन योजना 2020 को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी है। यह योजना छह महीने के लिए लागू की गई है। योजना लागू होने की तारीख से छह महीने के अंदर इसका लाभ पाने के लिए आवेदन किया जा सकता है। शहरी क्षेत्र के अवैध निर्माणों को नियमित करने के लिए यूं तो शमन उपविधि 2010 भी लागू है लेकिन यह प्रभावकारी साबित नहीं हो पाई। वजह यह है कि इसके तहत न सिर्फ कम क्षेत्रफल शमनीय है, बल्कि शमन की दरें भी ज्यादा है। पूरे प्रदेश में 3.42 लाख अवैध निर्माण चिह्नित  किए गए हैं। इनमें से महज 45 प्रतिशत ही विनियमित हो पाए हैं। इसलिए शासन को नई शमन योजना लानी पड़ी। नई योजना में भू उपयोग बदलकर किए गए निर्माण शमनीय नहीं है।

प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार ने बताया कि नई योजना में आवासीय भवनों जैसे कि ग्रुप हाउसिंग और बहुमंजिला इमारतों में सेटबैक के नियमों का उल्लंघन करने पर शमन शुल्क की दर भूमि मूल्य का 50 प्रतिशत रखी गई है जबकि पुरानी उपविधि में यह 50 से 100 प्रतिशत थी। व्यावसायिक भवनों में सेटबैक के नियमों का उल्लंघन करने पर नई योजना के तहत शमन शुल्क भूमि मूल्य का 100 प्रतिशत निर्धारित किया गया है जबकि पिछली योजना में यह 100 से 200 प्रतिशत था।

कार्यालय उपयोग वाले बहुमंजिला भवनों में सेटबैक के नियमों का उल्लंघन करने पर पहले भूमि मूल्य का 75 से 150 प्रतिशत शमन शुल्क तय किया गया था जबकि नई योजना में यह 75 प्रतिशत है। सामुदायिक सुविधाओं में भूखंड विकास के तहत सेटबैक के नियमों के उल्लंघन पर पहले भूमि मूल्य का 25 से 50 प्रतिशत तक शमन शुल्क देय था जबकि नई योजना में यह 25 प्रतिशत है।

नई योजना में आवासीय निर्माणों में 200 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) शमनीय होगा जबकि पिछली योजना में या 200 रुपए प्रति वर्ग मीटर तथा अतिरिक्त तल क्षेत्र के लिए वांछित भूमि मूल्य का 50 प्रतिशत था। व्यावसायिक निर्माण में 400 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से एफएआर शमनीय है जबकि पिछली योजना में 400 रुपए प्रति वर्ग मीटर तथा अतिरिक्त तल क्षेत्र के लिए भूमि मूल्य का 100 प्रतिशत था।

पुरानी योजना में बेसमेंट का अनुमन्य सीमा से 20 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण शमनीय था जबकि नई योजना में निजी स्वामित्व की भूमि पर निर्मित पूरा बेसमेंट शमनीय होगा। पुरानी योजना में पार्किंग के स्वीकृत क्षेत्र के अंतर्गत किया गया निर्माण शमनीय नहीं था। नई योजना में पार्किंग क्षेत्र को पुनर्स्थापित करने या उसी भूखंड पर वैकल्पिक पार्किंग व्यवस्था करने पर ऐसा निर्माण शमनीय माना गया है।

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