Sugarcane Development Department: उत्तम गन्ना कृषक की उपाधि से सम्मानित होंगे यूपी के किसान, आदर्श माडल खेती के लिए 1555 का होगा चयन

गन्ने की खेती में आधुनिक पद्धतियों को अपनाने पर विशेष जोर है ताकि गन्ने की उत्पादन लागत में कमी आए और उपज बढ़े। गन्ना विकास विभाग ने नवीन तकनीक को पंचामृत नाम दिया है। जिन प्लाटों पर खेती होगी उन्हें आदर्श माडल के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।

Vikas MishraWed, 28 Jul 2021 02:32 PM (IST)
प्रदेश में कुल 1555 कृषकों का चयनकर गन्ना खेती के आदर्श माडल प्लाट बनाये जाने का लक्ष्य तय हुआ है।

लखनऊ, जागरण संवाददाता। गन्ने की खेती में आधुनिक पद्धतियों को अपनाने पर विशेष जोर है, ताकि गन्ने की उत्पादन लागत में कमी आए और उपज बढ़े। गन्ना विकास विभाग ने नवीन तकनीक को पंचामृत नाम दिया है। जिन प्लाटों पर खेती होगी, उन्हें आदर्श माडल के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही ऐसा करने वाले किसान उत्तम गन्ना कृषक की उपाधि से सम्मानित भी होंगे। गन्ना व चीनी आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने बताया कि प्रदेश में गन्ना उत्पादन व चीनी परता में वृद्धि, उत्पादन लागत में कमी व किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभाग लगातार कार्य कर रहा है। गन्ने की खेती के लिए ट्रैंच प्लाटिंग, सहफसली, रैटून मैनेजमेंट, ट्रैश मल्विंग व ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीक किसानों को अपनाने की जरूरत है।

इस पंचामृत से जिन खेतों पर प्लाटिंग की जाएगी, वे आदर्श माडल होंगे। किसानों के आधुनिक तकनीक अपनाने से पानी की बचत, भूमि की उर्वरता शक्ति में बढ़ोतरी, घरेलू व बाजार की मांग के अनुसार खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, शाक-भाजी आदि फसलों का उत्पादन जैसे अनेक लाभ होंगे। उन्होंने बताया कि ट्रेंच विधि से बुवाई, सहफसली खेती व ड्रिप का प्रयोग एक ही खेत पर शुरू करने वाले सफल किसानों को विभागीय योजनाओं व कार्यक्रमों के तहत उपज बढ़ोतरी में प्राथमिकता व उत्तम गन्ना कृषक का प्रमाण पत्र भी मिलेगा। आयुक्त ने बताया कि इसकी शुरुआत के लिए शरदकालीन बोआई महत्वपूर्ण होगी। प्रारंभिक तौर पर प्रदेश में कुल 1555 कृषकों का चयनकर गन्ना खेती के आदर्श माडल प्लाट बनाये जाने का लक्ष्य तय किया जा रहा है। आदर्श माडल प्लाट का न्यूनतम क्षेत्रफल आधा हेक्टेयर होगा। मध्य व पश्चिमी यूपी की हर गन्ना विकास परिषद में न्यूनतम 10 व पूर्वी यूपी की गन्ना विकास परिषद में न्यूनतम पांच आदर्श माडल का चयन करना अनिवार्य होगा। तकनीकी पद्धति अपनाकर खेती करने से होने वाले लाभ के विषय में प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि गन्ना किसान समन्वित तकनीकों को अपनाये जाने के प्रति आकर्षित होंगे।

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