Conversion Racket: अवैध मतांतरण में मौलाना कलीम सिद्दीकी को यूपी एटीएस ने किया गिरफ्तार, विदेश से फंडिंग के भी मिले साक्ष्य

Conversion Racket In UP उत्तर प्रदेश में अवैध मतांतरण मामले में एटीएस ने एक और आरोपित मेरठ के मौलाना कलीम सिद्दीकी को एटीएस ने गिरफ्तार किया है। वह जमीयत-ए-वलीउल्लाह का अध्यक्ष है। मतांतरण मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपित उमर गौतम के संपर्क में रहे कलीम की भी सक्रिय भूमिका है।

Umesh TiwariWed, 22 Sep 2021 12:41 PM (IST)
यूपी एटीएस ने अवैध धर्मांतरण केस में एक और आरोपी मौलाना कलीम सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है।

लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश में एक हजार से अधिक लोगों का अवैध ढंग से मतांतरण (धर्मांतरण) कराने के मामले में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की कार्रवाई जारी है। अवैध मतांतरण मामले में यूपी एटीएस ने एक और आरोपित मौलाना कलीम सिद्दीकी को मेरठ से गिरफ्तार किया है। वह जामिया इमाम वलीउल्ला ट्रस्ट का अध्यक्ष है। मतांतरण मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपित उमर गौतम के संपर्क में रहे कलीम की भी सक्रिय भूमिका सामने आई है। कलीम के खिलाफ विदेश से तीन करोड़ रुपये की फंडिंग के साक्ष्य मिले हैं। उमर गौतम व अन्य आरोपितों के साथ उसके रिश्तों की छानबीन चल रही है।

उत्तर प्रदेश में गहरी साजिश के तहत मतांतरण के खेल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े मौलाना कलीम सिद्दीकी (64) की भी सक्रिय भूमिका थी। आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने मेरठ से मंगलवार रात मौलाना कलीम को गिरफ्तार कर लिया। वह मतांतरण मामले के मुुख्य आरोपी उमर गौतम का बेहद करीबी है और उसके तार अवैध मतांतरण के लिए विदेश से फंडिंग से भी जुड़े हैं।

एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि मौलाना कलीम सिद्दीकी जामिया इमाम वलीउल्ला ट्रस्ट का संचालन करता है, जिसके खाते में अब तक करीब तीन करोड़ रुपये की फंडिंग के साक्ष्य मिले हैं। इनमें डेढ़ करोड़ रुपये एकमुश्त बहरीन से भेजे गए थे। जिन संगठनों ने उमर गौतम की संस्था अल-हसन एजुकेशन एंड वेलफेयर फाउंडेशन को फंडिंग की थी, उन्हीं स्रोतों से मौलाना कलीम के ट्रस्ट को भी फंडिंग की गई है। कलीम के अन्य सहयोगियों की छानबीन के लिए एटीएस की छह टीमें सक्रिय की गई हैं।

मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र के फूलत निवासी मौलाना कलीम सिद्दीकी और कई अन्य लोगों को मंगलवार रात यूपी एटीएस ने हिरासत में ले लिया था। रात भर इनसे पूछताछ की गई। इसके बाद बुधवार को इस मामले में जांच एजेंसी ने बड़ा राजफाश किया। मौलाना कलीम अधिकतर दिल्ली में रहकर अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा था। आइजी एटीएस जीके गोस्वामी के अनुसार मौलाना कलीम कई सामाजिक, धार्मिक व शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़ा था और करीब 15 वर्षों से लोगों का अवैध ढंग से मतांतरण कराने में सक्रिय था। जांच में सामने आया है कि इस खेल में कई नामी लोग व संस्थाएं भी शामिल हैं।

मौलाना कलीम ट्रस्ट के जरिये सामाजिक सौहार्द के कार्यक्रमों के बहाने हिंदू व अन्य धर्म के लोगों को अलग-अलग लालच देकर व डराकर उन्हें मतांतरण के जरिये इस्लाम धर्म में शामिल कराने का सिंडीकेट संचालित कर रहा था। वह अपने ट्रस्ट के संचालन के साथ कई मदरसों की फंडिंग भी कर रहा था। इसके लिए कलीम को विदेश से हवाला नेटवर्क व अन्य माध्यमों से बड़ी रकम भेजी जा रही थी। वह लोगों को इंसानियत का संदेश देने के बहाने जन्नत व जहन्नुम से जुड़ी बातें करके इस्लाम स्वीकार करने के लिए दबाव बनाता था। जो लोग मतांतरण कर लेते थे, उनके जरिये अन्य लोगों को मतांतरण के लिए प्रेरित कराया जाता था।

एटीएस के हाथ मौलाना कलीम सिद्दीकी के इंटरनेट मीडिया पर वायरल कई ऐसे वीडियो भी लगे हैं, जिनमें वह लोगों को मतांतरण के लिए कह रहा है। उसने मतांतरण के लिए अपना प्रिंट व आनलाइन साहित्य तैयार कर रखा था। वह लोगों के बीच तीन तलाक जैसे मुद्दों को शरीयत के जरिये ही हल किए जाने की बातों पर जोर देता था। उमर गौतम से उसके करीबी रिश्ते रहे हैं और उमर ने जिन लोगों का मतांतरण कराया था, उनसे भी कलीम का करीबी कनेक्शन रहा है।

मौलाना कलीम पांच अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में : मतांतरण मामले में गिरफ्तार अभियुक्त मौलाना कलीम सिद्दीकी को विशेष अदालत ने पांच अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। एनआइए/एटीएस के विशेष जज योगेंद्र राम गुप्ता ने पुलिस रिमांड की अर्जी पर सुनवाई की तारीख 23 सितंबर तय की है।

फेमा के तहत भी होगी कार्रवाई : मौलाना कलीम सिद्दीकी को ट्रस्ट के जिस खाते में विदेश से फंडिंग हो रही थी, वह खाता एफसीआरए (फारेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट) के तहत रजिस्टर्ड नहीं है। आइजी एटीएस के अनुसार इस दिशा में भी विवेचना की जा रही है। आरोपित कलीम के विरुद्ध फेमा (फारेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट) के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

गिरफ्तार हो चुके उमर गौतम और जहांगीर : बता दें कि एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने 20 जून को प्रेसवार्ता कर उत्तर प्रदेश से लेकर अन्य राज्यों तक फैले मतांतरण के रैकेट का राजफाश किया था। पुलिस ने दावा किया था कि आरोपितों को आइएसआइ से भी फंडिंग की जा रही थी। मूक-बधिक बच्चों से लेकर महिलाओं व कमजोर वर्ग के लोगों का साजिश के तहत बड़े पैमाने पर मतांतरण कराया जा रहा था। उस समय गिरफ्तार किए गए दिल्ली के जामियानगर के मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी ने विदेश से फंडिंग से जुड़े कई अहम राज उगले थे। कई खातों की जानकारी भी सामने आई थी। खासकर उमर गौतम के आइएसआइ कनेक्शन को लेकर भी कई तथ्य मिले थे। 

धन का लालच देकर लोगों का करवाया मतांतरण : गिरफ्तार किए गए उमर दौतम और जहांगीर ने पूछताछ में स्वीकार किया था कि उन लोगों ने धन का लालच देकर एक हजार से अधिक लोगों का मतांतरण करवाया। इस काम के लिए आइएसआइ से फंडिंग होती थी। ये लोग मूक और बधिर बच्चों और महिलाओं को टार्गेट करते थे। मतांतरण के बाद महिलाओं की शादी भी कराई गई। इस काम के लिए एक पूरा गिरोह सक्रिय है। यह रैकेट और भी कई राज्यों में सक्रिय होने की बात सामने आई थी। इन दोनों लोगों ने मथुरा और वाराणसी समेत प्रदेश के कई जिलों में अभियान चलाकर मतांतरण करवाया था।

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