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सावन स्पेशल : इस सावन में चखें घर के बने पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद

लखनऊ, [कुसुम भारती]। सावन शब्द सुनते ही मन बच्चा हो जाता है और बच्चों की तरह ही कभी बारिश में भीगने तो कभी सावन में बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने को आतुर हो जाता है। अनरसा, घेवर, महुअर, घुइंया के पत्तों की पकौड़ी जैसे पकवान मुंह में पानी लाते हैं। हर साल की तरह इस बार भी सावन खुशियां और वही उमंग लेकर आया है। मगर कोरोना काल के चलते इन खुशियों को सेलीब्रेट करने का ढंग जरूर थोड़ा बदल गया है। दरअसल, कोरोना काल में सेहत और शारीरिक दूरी का खयाल रखते हुए ज्यादातर लोग बाहर की चीजों को खाने-पीने से परहेज कर रहे हैं। वहीं, सावन शुरू हो गया है। ऐसे में स्वाद के शौकीनों के लिए शहर की कुछ महिलाएं इस बार बता रहीं हैं सावन में बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों की घरेलू रेसिपी। 

सावन में लें महुअर का स्वाद : 

गृहिणी अनीता शर्मा कहती हैं, सखियों संग सावन के वह झूले, वह पकवान याद आ रहे हैं। पर कोरोना काल में ऐसा कुछ संभव नहीं हो पा रहा है। मगर घर पर व्यंजन बनाकर इस उत्सव को सेलीब्रेट कर रही हूं। हम घर में बहुत कुछ बनाकर खा सकते हैं। मैंने महुअर बनाया है जिससे शायद आज की पीढ़ी वाकिफ भी नहीं है। पर मैं हर साल सावन में बनाती हूं इसलिए मेरे बच्चों को पता है कि इसे 'महुअर' कहते हैं और यह महुआ से बनता है।

सेहत से भरा महुअर 

सामग्री : महुआ 250 ग्राम, गेहूं का आटा 350 ग्राम, दूध एक कप, तलने के लिए देशी घी या सरसों का तेल। (ऐच्छिक है जिसे जो पंसद हो)

विधि: महुआ को साफ करके आधा लीटर पानी डालकर एक पैन में धीमी आंच पर लगभग पंद्रह मिनट उबलने के बाद गैस बंद करें। ठंडा होने पर इसे सिलबट्टे पर महीन पीस लें। अब इसमें आटा मिलाकर अच्छी तरह   धीरे-धीरे दूध मिलाते हुए पुए की तरह घोल बना लें, गांठ न बनने दें। इसमें  प्राकृतिक मिठास होती है इसलिए इसमें चीनी या गुड़ डालने की जरूरत नहीं पड़ती। अब गैस पर कड़ाही में घी या तेल गर्म करके एक बड़ा चम्मच घोल डालें और पलट-पलटकर एक-एक करके सब पुए तल लें। इसे आप गर्म भी खा सकते हैं और बिना फ्रिज में रखे दो-चार दिन तक रखकर खा सकते हैं। 

- महुआ के ये हैं गुण : 

महुआ में आयरन की प्रचुरता होने से यह रक्तवर्धक होता है। इसके बीजों में कोलेस्ट्रॉल को कम करने गुण होते हैं और इसका सेवन मधुमेह में भी फायदेमंद होता है।

अनीता शर्मा

अनरसा बिना अधूरा सावन

गृहिणी कंचन रस्तोगी कहती हैं, सावन में अनरसा का स्वाद निराला होता है। सावन में हर साल चावल से बना अनरसा और अनरसा की गोली का स्वाद पूरा परिवार चखता है। हालांकि, मेरे बच्चों को बाजार से ज्यादा घर में बना अनरसा ही पसंद है। इस बार मैंने अनरसा की गोली बनाई हैं। 

अनरसे की गोली : 

सामग्री: चावल का आटा 250 ग्राम, पिसी शक्कर 100 ग्राम, सफेद तिल 50 ग्राम, देशी घी तलने के लिए थोड़ा सा दूध।

विधि : अनरसे की गोली के लिए मोटा चावल चाहिए। चावल को दो-तीन पानी से धोकर भिगो दें। (हालांकि दो दिन भीगने व सुबह-शाम उसका पानी बदलने से  ज्यादा अच्छा रिजल्ट आता है) बाद में चावल को छलनी में निकालकर उसका पानी निचोड़ लें फिर उसे मोटे कपड़े में पंखे के नीचे रख दें। दो-तीन घंटे सूखने के बाद मिक्सी में महीन पाउडर की तरह सूखा पीस लें। पाउडर में पिसी शक्कर मिलाकर थोड़ा-थोड़ा दूध डालकर गाढ़ा घोल तैयार करें एक साथ दूध को न डालें इसे रात भर ढककर रख दें। दूसरे दिन इसकी  छोटी-छोटी लोई बनाकर उसे तिल में लपेटकर, देसी घी में गुलाबी तलें। इसका पेस्ट बनाकर फ्रिज में रख कर दो दिन तक प्रयोग कर सकते हैं। सावन में अनरसे की गोली एक पारंपरिक मिठाई के रूप में खाई जाती है। इसमें खूब कैलोरी होती है।

कंचन रस्तोगी

लखनऊ में लें राजस्थानी घेवर का मजा

यूट्यूबर प्रोफेशनल शेफ दीप्ति जेटली कहती हैं, घेवर राजस्थान की प्रसिद्ध मिठाई है। सावन के महीने में जब रक्षाबंधन का त्यौहार आता है तो बहमें इसे लेकर भाई के घर जाती हैं। माना जाता है कि भाई-बहन का यह त्यौहार घेवर के बिना पूरा नहीं माना जाता है। पारंपरिक तौर पर घेवर मैदे और अरारोट के घोल को सांचे में डालकर बनाया जाता है।

सावन में घर पर बनाएं स्पेशल घेवर

सामग्री : 2 कप मैदा, 1 कप देसी घी, 1 कप दूध, 1 कप चीनी, केसर के थोड़े से धागे, 1 गिलास 

ठंडा पानी, थोड़े से बादाम, थोड़े काजू महीन कटे।

- घेवर के लिए रबड़ी : रबड़ी बनाने के लिए एक बर्तन में आधा गिलास दूध डालें। अब उसमें थोड़ा सा गेहूं का आटा डालकर चलाते रहें।फिर चीनी, बादाम, काजू डाल दें। रबड़ी तैयार है।

- घेवर बनाने की विधि :

सबसे पहले मिक्सर में घी और ठंडा पानी डालें फिर थोड़ा सा चलाएं। इसी तरह दो-तीन बार थोड़ा-थोड़ा पानी डालें और फिर चलाएं। फिर दूध डालें और चलाते रहें।फिर थोड़ा-थोड़ा मैदा डालकर चलाते हुए एक पतला सा पेस्ट बनाएं।

एक कढ़ाई में घी या रिफांइड गरम करके उसमें इस पेस्ट को डालकर एक चाकू की सहायता से किनारे को करते जाएं। यह क्रम तीन से चार बार दोहराएं।

घेवर अच्छे से सिक जाने के बाद निकालकर किसी छलनी में  रखें ताकि उसका एक्सट्रा घी अच्छे से निकाल जाए। अब एक बर्तन में चीनी और पानी डालकर गैस पर चढ़ाएं।  इसमें केसर के धागे डाल दें। थोड़ी सी गाढ़ी चाशनी बनाएं। अब चाशनी को घेवर पर डाल दें। इसके बाद जो अलग से रबड़ी बनाई है उसे भी घेवर पर डाल दें। ठंडा करके घर में स्वादिष्ट घेवर का मजा परिवार के साथ उठाएं।

दीप्ति जेटली

व्रत में खुश कर देगा फलाहारी गुलाब अनरसा :

आभा श्रीवास्तव कहती हैं, सावन में ज्यादातर लोगों को अनरसा पसंद होता है। सावन के पकवान सिर्फ इन्हीं खास दिनों में खाए जाते हैं इसलिए मैं भी अपने परिवार को पूरे सावन भर मिठाई के तौर पर खिलाती रहती हूं। हालांकि, इस बार मैंने सावन में व्रत के लिए खासतौर से फलाहारी गुलाब अनरसा बनाया है।

फलाहारी गुलाब अनरसा

सामग्री : सावा चावल एक कटोरी, चीनी 3/4 कटोरी, गुलाब की कुछ पंखुड़ियां, सफेद तिल  1/4 कटोरी, घी तलने के लिए।

विधि : सावा चावल को धोकर पानी में दो दिनों के लिए भिगो दें। पानी बदलते रहें। सावा चावल को छानकर कपड़े या अखबार पर फैलाकर सुखा लें। अब चावलों को पीस लें। चीनी और गुलाब को भी पीस लें। अब थोड़ा सा पानी मिलाकर आटे की तरह गूंथ लें। अब छोटी-छोटी गोलियां बनाकर तिल में लपेटकर घी में बिना हिलाएं तल लें। (अगर चावलों को दो-दिन भिगोने का समय नहीं है तो दो-तीन घंटे भी भिगो सकती हैं। सुखाकर पीसने के बाद उसमें थोड़ा खाने वाला सोडा मिला दें)।

आभा श्रीवास्तव

 

सावन में फलहारी व्यंजन का अलग स्वाद : 

शेफ राखी लखन कहती हैं, सावन का महीना शिवभक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है क्योंकि यह महीना भोलेनाथ को बहुत प्रिय है। शिव उपासना करने के लिए ही सावन भर सात्विक भोजन करते हैं। लहसुन, प्याज तामसिक प्रवृति का खाद्य पदार्थ है इसलिए इनका सेवन सावन भर वर्जित माना जाता है। मैं भी सावन भर  सात्विक भोजन ही बनाती हूं। सावन में फलाहारी व्यंजन खाने का अलग ही आनंद है।

फलाहारी लौकी की बर्फी :

लौकी एक किलो,

चीनी 200 ग्राम, दूध एक लीटर, खोया 200 ग्राम, मिक्स ड्राई फ्रूट 100 ग्राम  बारीक कटे हुए,

केवड़ा जल 1/2 टीस्पून,

खाने वाला ग्रीन कलर  एक टीस्पून, घी 100 ग्राम।

विधि : लौकी को कद्दूकस कर लें। एक बड़ी  कढ़ाई में घी डालकर लौकी को भूनें। अब उबला हुआ दूध डालकर तब तक पकायें जब तक दूध सूख न जाए। अब इसमें चीनी, खोया डालकर पकाएं। फिर केवड़ा जल, ड्राई फ़्रूट्स मिला लें। खाने वाला कलर डालकर अच्छी तरह मिला दें। अब किसी थाली में घी लगाकर उसमें इस मिश्रण को डालकर ठंडा होने पर बर्फी के आकार में काट लें। चांदी का वर्क से सजाकर परोसें।

 

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