एसजीपीजीआइ निदेशक बोले, ओमिक्रोन वैरिएंट से बचने के लिए पहले जैसी शारीरिक दूरी और मास्क जरूरी

कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या भले ही इकाई में रह गई हो मगर नया वैरिएंट ओमिक्रोन तमाम देशों में अपना डर कायम कर रहा है। एसजीपीजीआइ निदेशक डा. आरके धीमन कहते हैं कि ओमिक्रोन से बचने के लिए पहले की जैसी शारीरिक दूरी मास्क और हाईजीन जरूरी है।

Dharmendra MishraPublish:Wed, 01 Dec 2021 02:18 PM (IST) Updated:Thu, 02 Dec 2021 08:19 AM (IST)
एसजीपीजीआइ निदेशक बोले, ओमिक्रोन वैरिएंट से बचने के लिए पहले जैसी शारीरिक दूरी और मास्क जरूरी
एसजीपीजीआइ निदेशक बोले, ओमिक्रोन वैरिएंट से बचने के लिए पहले जैसी शारीरिक दूरी और मास्क जरूरी

पुलक त्रिपाठी, लखनऊ।  कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या भले ही इकाई में रह गई हो, मगर नया वैरिएंट ओमिक्रोन दुनिया के तमाम देशों में अपना डर कायम कर रहा है। डाक्टर इसे कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से ज्यादा खतरनाक बता रहे हैं। एसजीपीजीआइ निदेशक डा. आरके धीमन का कहना है कि ओमिक्रोन से बचने के लिए भी पहले की जैसी शारीरिक दूरी, मास्क  और हाईजीन का ध्यान रखना जरूरी है।

ओमिक्रोन को लेकर सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों की अनदेखी करना हमारे लिए खतरा बन सकता है। इस वैरिएंट को देश में आने से रोकने के लिए सरकारी प्रयास तेज हो गए हैं, मगर इससे इतर लोगों को भी कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर (कैब) का गंभीरता से पालन करना होगा। यानी अनिवार्य रूप से मास्क पहनें, शारीरिक दूरी का ध्यान रखें और हर थोड़ी देर पर हाथ धुलते रहें या सैनिटाइज करते रहें।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ही वायरस के वैरिएंट में बदलाव होने की संभावना जाहिर करने वाले संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस (एसजीपीजीआइ) के निदेशक प्रो आर के धीमन बताते हैं कि ओमिक्रान (SARS-COV-2 Varient/B.1.1.529) डेल्टा वैरिएंट से अधिक संक्रमण क्षमता रखता है। ओमिक्रोन सबसे पहले साउथ अफ्रीका में पाए जाने की पुष्टि हुई थी।

इसके संक्रमण की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज 21 दिन में यह साउथ अफ्रीका से सभी प्रांतों में पांव पसार चुका है। इसके अलावा बेल्जियम, इजराइल, सिंगापुर, नीदरलैंड व जर्मनी समेत दुनिया के कई देशों में इसके पाए जाने की बात सामने आ रही है।वैक्सीन कितनी कारगरप्रो धीमन बताते हैं कि स्पाइक प्रोटीन हमारे शरीर में एंटीबाडी तैयार करता है। वायरस के म्युटेट होने के कारण पुरानी एंटीबाडी कम कारगर हो जाती है।

आशय यह है कि वाइल्ड टाइप वायरस पर वैक्सीन 80 प्रतिशत प्रभाव शाली थी। डेल्टा वैरिएंट आने के बाद वैक्सीन का प्रभाव 60 प्रतिशत हो गया। नए वैरिएंट ओमिक्रोन को लेकर यह संभावना भी जताई जा रही कि इसपर वैक्सीन का प्रभाव और कम हो। प्रो धीमन के मुताबिक प्रदेश में 14-15 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो जाना सुरक्षा के लिहाज से बड़ी उपलब्धि है। मगर इस बात को लेकर पहले भी संभावना जता दी गई थी वायरस के वैरिएंट में भी बदलाव हो सकता है।

अब ओमिक्रोन के रूप में नया वैरिएंट आ गया है। जो वैक्सीन के प्रभाव को कम सकता है। इतना ही नहीं जो पहले संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें भी दोबारा संक्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है।प्रो धीमन का कहना है कि ओमिक्रोन को देश में आने से रोकने के लिए सरकार कदम उठा रही है। मगर कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करना जरूरी है। इसके तहत मास्क, सैनिटाइजेशन और शारीरिक दूरी का पालन करना होगा। इसके साथ ही अधिक से अधिक लोगों को टीकाकरण होना बेहद जरूरी है।