COVID-19 Second Phase: इस बार कोरोना कर रहा सीधे वार, युवाओं तक को पड़ रही आक्सीजन की जरूरत

कोविड में पहले संक्रमण के पांचवें दिन तक फेफड़े में पहुंचता था, अब पहले।

इस बार कोरोना वायरस की संक्रामक क्षमता इतनी ज्यादा है कि पहले ही दिन वह सीधे फेफड़ों पर वार कर रहा है। इससे मरीजों की मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। 25 से 30 वर्ष तक के युवाओं को भी आक्सीजन सपोर्ट व वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है।

Rafiya NazSat, 17 Apr 2021 06:00 AM (IST)

लखनऊ [धर्मेन्द्र मिश्रा]। इस बार कोरोना वायरस की संक्रामक क्षमता इतनी ज्यादा है कि पहले ही दिन वह सीधे फेफड़ों पर वार कर रहा है। इससे मरीजों की गंभीरता दर व मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि 25 से 30 वर्ष तक के युवाओं को भी आक्सीजन सपोर्ट व वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है। यह निष्कर्ष किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय(केजीएमयू) व अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डाक्टरों ने मरीजों पर की गई केस स्टडी के आधार पर निकाला है। बहुत से मरीज तो ऐसे हैं जिनके फेफड़ों में कोरोना का गंभीर संक्रमण होने के बावजूद उनकी रिपोर्ट आरटीपीसीआर जांच में निगेटिव आ रही है। जबकि कोरोना पॉजिटिव व निगेटिव मरीजों मरीजों का सीटी स्कैन थोरैक्स देखने पर दोनों में एक जैसे लक्षण पाए जा रहे हैं। इसलिए सभी को अधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

पहले ही दिन फेफड़ों में संक्रमण: केजीएमयू में रेस्पिरेट्री मेडिसिन के विभागाध्यक्ष व आइएमए-एएमएस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. सूर्यकांत त्रिपाठी कहते हैं कि वर्ष 2020 और 21 में फर्क यह है कि पहले कोरोना वायरस का संक्रमण होने पर वह दो दिनों तक नाक में रहता था। फिर वहां से गले में उतरकर दो दिन रुकता था। इसके बाद पांचवें दिन फेफड़ों तक पहुंचता था। वह भी एक फेफड़े के किसी हिस्से को डैमेज करता था। मगर अब पहले दिन ही वह सीधे फेफड़ों में पहुंच रहा है। जोकि दोनों फेफड़ों के कई हिस्से को क्षतिग्रस्त कर कोविड निमोनिया पैदा कर रहा है। यही वजह है कि मरीजों के गंभीर होने की संख्या व मौतों में बढ़ोतरी हो रही है। हमारे यहां रेस्पिरेट्री आइसीयू में यूपी के विभिन्न जिलों से सांस की समस्या को लेकर कई मरीज ऐसे आए, जिनका आरटीपीसीआर निगेटिव था। मगर सीटी स्कैन में सीटी स्कोर 15 से भी ऊपर था। बिल्कुल जैसे कोरोना मरीजों में होता है। आक्सीजन स्तर ऐसे मरीजों का 70 व उससे भी कम हो गया था। कोविड उपचार करने पर वह ठीक हुए।

पहले हफ्ते से सांसों पर शामत: एम्स, नई दिल्ली में पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन के एसि. प्रोफेसर डा. सौरभ मित्तल ने बताया कि इस बार का स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक है। पहले संक्रमित होने के दूसरे हफ्ते यानि की सातवें-दसवें दिन से सांस की दिक्कत होती थी। मगर अब पहले हफ्ते में ही मरीजों का आक्सीजन स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच रहा है। 25 से 30 वर्ष के युवाओं को भी आक्सीजन व वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ रहा है। पहले ज्यादातर बुजुर्गों को ही आक्सीजन व वेंटीलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ रही थी। अब परिवार में कोई एक व्यक्ति पॉजिटिव हो रहा है तो सभी को संक्रमण हो रहा है। ज्यादातर मामलों में परिवार के सभी सदस्यों को भर्ती करना पड़ रहा है। यह बरतें सावधानी: दिन में तीन चार बार भाप लें, गॉर्गल करें। बाहर से घर आने पर गुनगुने पानी से नहाएं। मास्क व शारीरिक दूरी का हर हाल में पालन करें।

 

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