लखनऊ के यहियागंज गुरुद्वारे में मनाया जा रहा गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस, फूलों से सजा दीवान

लखनऊ के यहियागंज गुरुद्वारा में फूलों से सजा दरबार हाल नितनेम का पाठ करतीं संगतें और लंगर सेवा करते सेवादार। सिखों के नवें गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस पर श्रद्धा और समर्पण का ऐसा नजारा बुधवार को गुरुद्वारों में देखने को मिला।

Dharmendra MishraWed, 08 Dec 2021 02:20 PM (IST)
यहियागंज गुरुदारा में मनाया जा रहा गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस।

लखनऊ, जागरण संवाददाता।  लखनऊ के यहियागंज गुरुद्वारा में फूलों से सजा दरबार हाल, नितनेम का पाठ करतीं संगतें और लंगर सेवा करते सेवादार। सिखों के नवें गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस पर श्रद्धा और समर्पण का ऐसा नजारा बुधवार को गुरुद्वारों में देखने को मिला। नाका हिंडोला व गुरुद्वारा यहियागंज में विशेष प्रकाश हुआ तो सभी गुरुद्वारों में दीवान सजाया गया।

गुरुद्वारा यहियागंज के सजे दीवान हाल में फूलों की बारिश की गई और हेड ग्रंथी ने गुरु की जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला। गुरुद्वारा यहियागंज में गुरु तेग बहादुर जी महाराज 1670 में आए थे और तीन दिन तक रुके थे। गुरुद्वारा यहियागंज के सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि दो दिवसीय आयोजन का बुधवार को दोपहर बाद समापन हुआ। सजे दीवान हाल में लुधियाना से आए भाई दविंदर सिंह सोढ़ी व दिल्ली भाई रंजीत सिंह खालसा ने शबद सुनाकर संगतों को निकाल किया।

लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बग्गा ने बताया कि बुधवार को गुरुद्वारा नाका हिंडोला में दीवान सजाया गया। हेडग्रंथी सुखदेव ने गुरु की जीवनी पर प्रकाश डाला। प्रवक्ता सतपाल सिंह मीत ने बताया कि शहीदी दिवस महिला संगत ने सत्संग किया। गुरुद्वारा आशियाना के चेयरमैन जेएस चड्ढ़ा ने बताया कि सजे दीवान में हेड ग्रंथी ने प्रकाश किया। गुरुद्वारा मानसरोवर कानपुर रोड के अध्यक्ष संपूर्ण सिंह बग्गा ने बताया कि लंगर के साथ दीवान सजाया गया। गुरुद्वारा सदर में सुबह विशेष प्रकाश के साथ ही दोपहर बाद लंगर लगाया गया। महासचिव हरपाल सिंह जग्गी ने बताया कि सभी गुरुओं के शहीदी दिवस पर गरीबों को लंगर दिया जाता है।

त्यागमल से गुरु तेगबहादुर बने गएः लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बग्गा ने बताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के बचपन का नाम त्यागमल था, पर जब गुरु जी 14 साल की आयु में त्यागमल ने करतारपुर की जंग में अद्वितीय बहादुरी दिखाई तो उनकी यह बहादुरी देख पिता गुरु हरगोविंद साहिब जी ने त्यागमल से तेग बहादुर नाम रखा जो आगे चल कर नवें गुरु हुए। गुरु तेग बहादर ने तप, साधना, सिमरन पर ज्यादा ध्यान दिया। गुरुजी ने बाबा बकाला में भौरा (गुफा) साहिब में 20 साल आठ महीने 13 दिन तक घोर तप किया।

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