भूमाफियाओं ने यूपी सैनिक स्कूल की बाउंड्री का काम रोका; प्रिंसिपल ने मंडलायुक्त को लिखा पत्र

जिस सैनिक स्कूल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेटियों के एडमिशन की पहल कर इतिहास रचा। उस सैनिक स्कूल की बालिकाओं के नए छात्रावास की चहारदीवारी को बनाने में भूमाफियाओं ने अड़ंगा डाल दिया है। इन भूमाफियाओं ने स्कूल की जमीन पर रास्ता बनाने के लिए काम रूकवा दिया है।

Vikas MishraSat, 25 Sep 2021 01:34 PM (IST)
यूपी सैनिक स्कूल में बालिकाओं को पहली बार वर्ष 2018 में इस स्कूल में प्रवेश दिया गया था।

लखनऊ, जागरण संवाददाता। जिस सैनिक स्कूल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेटियों के एडमिशन की पहल कर इतिहास रचा। उस सैनिक स्कूल की बालिकाओं के नए छात्रावास की चहारदीवारी को बनाने में भूमाफियाओं ने अड़ंगा डाल दिया है। इन भूमाफियाओं ने सैनिक स्कूल की जमीन पर अपने लिए रास्ता बनाने के लिए काम रूकवा दिया है। स्कूल के प्रिंसिपल ने इसकी शिकायत मंडलायुक्त से की है। बीती 27 अगस्त को ही राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कैप्टन मनोज पांडेय यूपी सैनिक स्कूल के लिए नए बालिका छात्रावास और उसकी चहारदीवारी से उनके लिए खेलकूद मैदान बनाने की योजना का शिलान्यास किया था।

बालिकाओं को पहली बार वर्ष 2018 में इस स्कूल में प्रवेश दिया गया था। इस स्कूल की बालिका छात्रावास की जमीन पर भूमाफिया कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। स्कूल के प्रधानाचार्य कर्नल राजेश राघव ने अपने पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री की घोषणा पर चहारदीवारी बनाने का काम शुरू किया गया था। स्कूल की जमीन से ही भूमाफिया अपने बेचे गए अवैध प्लाटों के लिए रास्ता मांग रहे हैं। यह भूमाफिया स्कूल की चहारदीवारी बनाने वाली एजेंसी के श्रमिकाें को धमकी देकर काम रूकवा रहे हैं। प्रिंसिपल ने मंडलायुक्त से भूमि को चिन्हित करने के लिए चिन्हांकन कराने की मांग की है। वहीं भूमाफियाओं की ओर से स्कूल की जमीन पर रास्ता होने की शिकायत की गई। जिसकी जांच के बाद लेखपाल ने एक सितंबर को अपनी जांच आख्या भी दे दी है। जिसमें कहा गया है कि जो एक रास्ता सैनिक स्कूल सोसाइटी की ओर जा रहा है। वह सैनिक स्कूल की जमीन पर ही बना हुआ है। ऐसे में स्कूल कोई अवैध निर्माण नहीं कर रहा है। 

यूपी सैनिक स्कूल का इतिहासः गरीबों, मजदूरों व किसानों के बच्चों को सेना में अफसर बनाने के लिए देश का पहला सैनिक स्कूल 1960 में डॉ. संपूर्णानंद ने स्थापित किया था। इसके बाद ही देश में अन्य सैनिक स्कूल स्थापित हुए। अब तक सेना को एक हजार से अधिक अफसर इस स्कूल ने दिए हैं। पिछले दिनों ही स्कूल की स्थापना का हीरक जयंती वर्ष मनाया गया।

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