अयोध्या में सीताराम विवाहोत्सव की धूम, रामनगरी के मंदिरों से कल निकलेगी बारात

राम विवाहोत्सव के लिए रामनगरी सज्जित हो उठी है। दर्जनों मंदिरों में गत सप्ताह शुरुआत से ही विवाहोत्सव की रसधार प्रवाहित हो रही है। विवाहोत्सव की पूर्व बेला के साथ जहां मंदिरों की उत्सवधर्मिता चरम पर है। रामायण मेला जैसे आयोजन से विवाहोत्सव का सांस्कृतिक आयाम परिभाषित हो रहा है।

Vikas MishraTue, 07 Dec 2021 10:22 PM (IST)
सीताराम विवाहोत्सव को लेकर अयोध्या में खूब धूम मची है

अयोध्या, संवाद सूत्र। राम विवाहोत्सव के लिए रामनगरी पूरी तरह सज्जित हो उठी है। नगरी के दर्जनों मंदिरों में गत सप्ताह शुरुआत से ही विवाहोत्सव की रसधार प्रवाहित हो रही है। विवाहोत्सव की पूर्व बेला के साथ जहां मंदिरों की उत्सवधर्मिता चरम पर है, वहीं रामायण मेला जैसे आयोजन से विवाहोत्सव का सांस्कृतिक आयाम परिभाषित हो रहा है। बुधवार को दर्जनों मंदिरों से बरात निकलेगी। ...तो मंगलवार को शताधिक मंदिरों में पाणिग्रहण के पूर्व की रस्म संपादित होती रही। जानकीमहल में हल्दी, तिलक, मेंहदी की रस्म संयोजित हुई।

दशरथमहल बड़ास्थान, रामवल्लभाकुंज, रंगमहल, हनुमानबाग, रामहर्षणकुंज, गोकुलभवन, विअहुतिभवन,रसमोदकुंज आदि भी इन रस्मों के साथ आस्था और आकर्षण के केंद्र बने रहे। आचार्य पीठ दशरथमहल में कलेवा के दो दिन पूर्व से ही जेवनार गायन के साथ श्रीराम के विग्रह के सम्मुख राजभोग प्रस्तुत किया गया। दशरथमहल पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य याद दिलाते हैं, यहां श्रीराम पिता महाराज दशरथ के महल में विराजमान हैं और उन्हें प्राय: राजभोग प्रस्तुत करने की परंपरा है। बिंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र रामभूषणदास कृपालु कहते हैं, उत्सवधर्मिता दशरथमहल के मूल में है और यही बिंदु परंपरा की आध्यात्मिक विरासत का सूत्र है। रसिकोपासना की शीर्ष पीठ लक्ष्मणकिला में किलाधीश महंत मैथिलीरमणशरण ने मुख्य सहयोगी आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण और अन्य श्रद्धालुओं के साथ मटकौर की रस्म संपादित करायी।

रामलला के दर्शन मार्ग पर स्थित अमावा राम मंदिर में रामविवाहोत्सव के साथ रामलला के दर्शनार्थियों के लिए मुफ्त राम रसोई में विशेष पकवान परोसे जाने की तैयारी हो रही होती है। जानकीमहल में विवाह से पूर्व हल्दी की रस्म संपादित हुई। भक्ति से अभिभूत आगे बढ़ती नर्तकों की मंडली तिलक के थार और अन्य भेंट के साथ त्रेतायुगीन जनकपुर का स्मरण कराती है। ...तो कनकभवन एवं रामवल्लभाकुंज जैसे मंदिरों में सज्जित विवाह मंडप के साथ राम विवाह पर केंद्रित गीतों की प्रस्तुति का प्रवाह आध्यात्मिक वैभव परिभाषित करता है। रंगमहल में रामविवाह पर केंद्रित लीला की प्रस्तुति के क्रम में मंगलवार को धनुर्भंग की लीला का मंचन किया गया। महंत रामशरणदास ने श्रीराम एवं सीता के स्वरूप का पूजन कर लीला की शुरुआत कराई।

संतों ने किया महंत शत्रुघ्नशरण एवं सियाछबीलीशरण को नमनः रामनगरी में सरयू तट स्थित रसमोदकुंज में राम विवाहोत्सव की रौनक के साथ आचार्य स्मृति पर्व का उल्लास भी समाहित हुआ। इस मौके पर मंदिर के संस्थापक शत्रुघ्नशरण एवं दूसरे आचार्य सियाछबीलीशरण की स्मृति फलक पर थी। शत्रुघ्नशरण उन कोठा वाले सरकार के शिष्य थे, जिन्हें पिछले सदी के चुनिंदा सिद्ध संतों में गिना जाता है। गुरु से मिले साधना के अपूर्व संस्कार के साथ शत्रुघ्नशरण ने साहित्य सृजन के माध्यम से रहस्योपासना की परंपरा को निखार दिया।

...तो रसमोदकुंज जैसे उपासना के भव्य केंद्र की स्थापना के साथ वे निर्माणकर्ता और कालजयी संस्था के प्रणेता के रूप में यादगार हैं। सियाछबीलीशरण ने गुरु की विरासत को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ाई। मंदिर के वर्तमान महंत रामपिप्रियाशरण ने पूर्वाचार्यों को नमन करते हुए कहा, पूर्वाचार्यों का प्रताप अप्रतिम है और हम उन्हें याद कर स्वयं को गौरवांवित करते हैं। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में मणिरामदास जी की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास, लक्ष्मणकिलाधीश महंत मैथिलीरमणशरण, मानसभवन के महंत अर्जुनदास, लालसाहब दरबार के महंत रामनरेशशरण, सद्गुरु कुटी के महंत अनिलशरण, कविराजदास आदि सहित सैकड़ों संत-महंत एवं श्रद्धालु रहे।

रामायण मेला से जीवंत हुई राम विवाह की स्मृतिः रामकथापार्क में चार दिवसीय रामायण मेला का उद्घाटन सायं मणिरामदास जी की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास एवं रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजयशरण ने संयुक्त रूप से किया। यद्यपि रामायण मेला की अनौपचारिक शुरुआत पूर्वाह्न रामलीला की प्रस्तुति और अपराह्न रामकथा की प्रस्तुति से हुई। कथा सत्र का संचालन अधिवक्ता कमलेश ङ्क्षसह ने किया। देर शाम राजीवरंजन पांउेय ने पखावज वादन, ओंकार शंखधर एवं वंदना मिश्रा ने भजन की प्रस्तुति से राम विवाह की स्मृति को जीवंत किया।

रामकथा की रसधार प्रवाहितः राम विवाहोत्सव की श्रृंखला में रामकथा की रसध्धार भी प्रवाहित हुई। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य ने दशरथमहल में साप्ताहिक प्रवचन माला का क्रम आगे बढ़ाते हुए विवाहोत्सव का तात्विक निर्वचन किया। उन्होंने कहा, धनुर्भंग वस्तुत: अहंकाार का मर्दन है और श्रीराम को अहंकार स्वीकार नहीं है। अहंकार के अंत पर ही भक्ति स्वरूपा सीता का वरण संभव है। जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने सुग्रीव किला में रामकथा की तात्विकता का विवेचन किया।

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