तकनीक के उपयोग ने वज्रपात से मौतों पर कसी लगाम, यूपी में पिछले वर्ष की तुलना में 35 फीसद की कमी

उत्तर प्रदेश में वज्रपात से होने वाली मौतों की संख्या में कमी आई है। बिजली गिरने की पूर्व चेतावनियों को बिना समय गंवाए लोगों तक पहुंचाकर वर्ष 2019-20 की तुलना में 2020-21 में वज्रपात से होने वाली मौतों की संख्या में 35 फीसद कमी लाने में कामयाबी मिली है।

Umesh TiwariWed, 04 Aug 2021 01:09 PM (IST)
उत्तर प्रदेश में वज्रपात से होने वाली मौतों की संख्या में कमी आई है।

लखनऊ [राजीव दीक्षित]। तकनीक के इस्तेमाल ने उत्तर प्रदेश में वज्रपात से होने वाली मौतों की संख्या में कमी लाई है। बिजली गिरने की पूर्व चेतावनियों को बिना समय गंवाए लोगों तक पहुंचाकर वर्ष 2019-20 की तुलना में 2020-21 में प्रदेश में वज्रपात से होने वाली मौतों की संख्या में 35 फीसद कमी लाने में कामयाबी मिली है।

बिजली गिरने से बड़ी संख्या में मौतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल राहत आयुक्त कार्यालय को लोगों को इस दैवी आपदा की पूर्व सूचना देने का तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया था। उनके निर्देश पर राहत आयुक्त कार्यालय ने राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण से प्राप्त सुझावों के क्रम में नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर के सहयोग से इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किया है। किसी इलाके में खराब मौसम और बिजली गिरने की पूर्व चेतावनी देने के लिए राहत आयुक्त कार्यालय मौसम विभाग की 'नाओकास्ट' तकनीक का इस्तेमाल करता है जिसमें वज्रपात होने से एक से तीन घंटे पहले तक चेतावनी जारी की जाती है।

मौसम विभाग से कोडेड मैसेज के रूप में जारी अलर्ट को साफ्टवेयर के जरिये डीकोड करने के साथ हिंदी में एसएमएस और वायस मैसेज बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के रियल टाइम में लोगों को वज्रपात की पूर्व सूचना देते हैं। मौसम विभाग अभी यह अलर्ट जिला स्तर पर जारी करता है।

इन्हें भेजे जा रहे मैसेज : 54,000 ग्राम प्रधान, 24000 लेखपाल, 1,59,000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, 1,51,000 आशा कार्यकर्ता, 35000 पुलिसकर्मी और 1.05 करोड़ प्रगतिशील किसान। फील्ड में तैनात इन कार्मिकों और किसानों के माध्यम से वज्रपात की पूर्व चेतावनी आम जनमानस के बीच पहुंचायी जाती है।

कम हुई मौतों की संख्या : बिजली गिरने के कारण वर्ष 2019-20 में प्रदेश में 466 लोगों ने जान गंवायी थी। पिछले साल इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम के इस्तेमाल से 2020-21 में वज्रपात से होने वाली मौतों की संख्या घटकर 303 रह गई। 2021-22 में वज्रपात से प्रदेश में अब तक 181 मौतें हो चुकी हैं।

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