बेरोजगारों से छह करोड़ से अध‍िक की ठगी में सरगना समेत चार ग‍िरफ्तार, एसटीएफ ने लखनऊ से दबोचा

गिरोह का सरगना अरुण दुबे गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कालेज से बीटेक पास है। उसने कई मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी भी की है। वह इंदिरानगर का रहने वाला है। कंपनी से निकाले जाने के बाद उसने ठगी का गिरोह बना लिया।

Anurag GuptaThu, 21 Oct 2021 10:14 PM (IST)
मल्टीनेशनल कंपनी से निकाले जाने के बाद सरगना चलाने लगे ठगी का गिरोह।

लखनऊ, जागरण संवाददाता। सैकड़ों बेरोजगारों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर छह करोड़ से अधिक की ठगी करने वाले गिरोह के सरगना समेत चार जालसाजों को एसटीएफ की टीम ने गुरुवार को विभूतिखंड इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह का सरगना अरुण कुमार दुबे बीटेक पास है। उसने कई मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी भी की है। कंपनी से निकाले जाने के बाद उसने ठगी का गिरोह बना लिया। एडीजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि गिरोह के लोगों ने 500 से अधिक बेरोजगारों से ठगी की। जालसाजों ने कृषि कुंभ प्राइवेट लिमिटेड, मदर हुड केयर कंपनी के नाम से वेबसाइट बना रखी और एनजीओ भी खोल रखा था।

गिरोह का सरगना अरुण दुबे गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कालेज से बीटेक पास है। उसने कई मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी भी की है। वह इंदिरानगर का रहने वाला है। गिरफ्तार अन्य आरोपितों में दारुलशफा विधायक निवास में रहने अनिरुद्ध पांडेय, अलीगंज सेक्टर डी का खालिद मुनव्वर वेग और गोमतीनगर विनयखंड का अनुराग मिश्रा है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। इनके पास से विधानसभा सचिवालय का पास, 22 फाइलें, कई विभागों को मोहर, मोबाइल फोन, नौ एटीएम और अन्य दस्तावेज मिले हैं। अनिरुद्ध पांडेय जालसाज कंपनी में फाइनेंस का काम देखता था।

वेबसाइट पर विज्ञापन देकर निकालते थे नौकरी, कराते थे बड़े-बड़े सेमिनार : एसएसपी एसटीएफ हेमराज सिंह मीणा ने बताया कि चूंकि गिरोह के सरगना ने बीटेक कर रखा था। इसके अलावा वह कई कंंपनियों में नौकरी भी की थी। वह अपनी कंपनी के नाम से बनी वेबसाइट पर विभिन्न विभागों में नौकरी का विज्ञापन देता था। आवेदन आने पर लोगों को फोन कर बुलाता था। सरकारी नौकरी के नाम पर प्रति व्यक्ति चार से पांच लाख रुपये अधिकतम लेता था। फिर फर्जी नियुक्तिपत्र देकर उन्हें ज्वाइन करने के लिए भेजता था। उसके खिलाफ इंदिरानगर, विभूतिखंड के अलावा कई अन्य जनपदों में भी मुकदमे दर्ज हैं। जालसाज लोगों को विश्वास में लेने के लिए सेमिनार भी कराते थे। सेमिनार के दौरान लोग चकाचौंध देखकर इनपर विश्वास कर लेते थे। गिरोह के फरार सदस्यों में पंकज, देवेश मिश्र, विनय शर्मा, देव यादव, शशांक गिरी समेत अन्य की तलाश की जा रही है।यह लोग लोगों बेरोजगारों की खोजबीन करके लाते थे। लोगों को जुटाते थे।

लैपटाप और बैटरी चोरी के मामले में निकाला गया था सरगना : एसएसपी एसटीएफ ने बताया कि अरुण दुबे ने वर्ष 2005 में बीटेक किया था। इसके बाद उसने 2015 में रिलायंस, टाटा व जीटीएल समेत कई कंपनियों में नौकरी की। वह मैनेजर के पद पर था। इस दौरान एक कंंपनी से 10 लैपटाप और बैटरी चोरी की थी। कंपनी की जांच में जब यह राजफाश हुआ तो कंपनी के मुकदमा दर्ज करा दिया। वर्ष 2016 में अरुण जेल गया था। 2017 में छूटा तो अपनी कंपनी बनाकर जालसाजी करने लगा।

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