बेरोजगारी के मुद्दे पर यूपी विधानसभा में बवाल, श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कर दी यह तीखी टिप्पणी...

बेरोजगारी पर यूपी विधानसभा में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की टिप्पणी से नाराज सपा और कांग्रेस ने वॉकआउट किया।

विधानसभा में माहौल उस समय तनातनी का हो गया जब नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने भाजपा के चुनावी वादे की याद दिलाते हुए युवाओं को रोजगार न मिलने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि प्रदेश में बेरोजगारी के ऐसे हालात कभी नहीं बने।

Umesh TiwariMon, 01 Mar 2021 10:53 PM (IST)

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश विधानमंडल बजट सत्र के सातवें दिन सोमवार को विधानसभा में उस वक्त हंगामा हो गया जब बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों के जवाब में श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने तीखी टिप्पणी कर दी। सरकार द्वारा उपलब्ध कराए रोजगार की जानकारी देते हुए उन्होंने आरोप लगाया, हम नौकरी देते है और आप लोगों ने नौकरियां बेचीं है। इस पर भड़के विपक्ष ने हंगामा किया। सपा के सदस्य नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। कांग्रेस व बसपा सदस्यों ने अपनी सीटों पर शोरशराबा शुरू दिया। इसके चलते कार्यवाही को आधा घंटा स्थगित करना पड़ा। बाद में सरकार के जवाब से असंतुष्ट सपा व कांग्रेस ने बहिर्गमन किया।

विधानसभा में माहौल उस समय तनातनी का हो गया जब नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने भाजपा के चुनावी वादे की याद दिलाते हुए युवाओं को रोजगार न मिलने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि प्रदेश में बेरोजगारी के ऐसे हालात कभी नहीं बने। मात्र नब्बे दिन में सभी रिक्त पदों को भरने का वादा किया परंतु लगभग पांच लाख पद रिक्त हैं। बेरोजगारी 16 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

कांग्रेस दलनेता आराधना मिश्रा मोना ने भी सरकार पर युवाओं से धोखा करने का आरोप लगाया। कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू ने अधीनस्थ सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि आयोग द्वारा निकाली गई 24 प्रकार की भर्तियों में से 22 भर्ती अटकी हैं। गत दो वर्ष में 12.5 लाख पंजीकृत बेरोजगार बढ़ गए हैं। बसपा के लालजी वर्मा ने नौकरी मांगने वाले युवाओं पर लाठियां बरसाने का मुद्दा उठाया।

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में सरकारी व निजी क्षेत्र में 32 लाख नौकरियां दिए जाने का दावा किया। उन्होंने आउट सोर्सिंग कंपनियों की मनमानी पर कड़ा अंकुश लगाने की जानकारी दी। भर्ती परीक्षाएं नियमित होने और समय से परिणम जारी करने का श्रेय योगी सरकार को दिया। बात उस समय बिगड़ी जब श्रम मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा नौकरियांं बेचे जाने की बात कही और आउटसोर्स कंपनियों के शोषण में भागीदार बताया।

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