Scholarship Scam of Lucknow: किसी को बार-बार तो किसी को अभी भी भुगतान का इंतजार

लखनऊ के जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में तैनात बाबुओं की भूमिका की जांच पूरी होने के साथ ही कार्रवाई की संस्तुति हो गई है। कई बाबू तो सेवानिवृत्त होने की कतार में हैं और मामले को दबाने में जुटे हैं।

Rafiya NazThu, 29 Apr 2021 03:17 PM (IST)
उत्तर प्रदेश समाज कल्याण विभाग के शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाले की जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले तथ्य।

लखनऊ [जितेंद्र उपाध्याय]। समाज कल्याण विभाग में 2010 से 2014 के बीच हुए शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाले की कलई खुलने लगी है। समाज कल्याण निदेशालय की जांच में एक ही विद्यार्थी को कई बार शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान किया गया। लखनऊ के जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में तैनात बाबुओं की भूमिका की जांच पूरी होने के साथ ही कार्रवाई की संस्तुति हो गई है। कई बाबू तो सेवानिवृत्त होने की कतार में हैं और मामले को दबाने में जुटे हैं। उप निदेशक समाज कल्याण श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि जांच में कई छात्रों को कई बार शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान किया गया है जिसकी वसूली की कार्रवाई संस्थान और बाबुओं से की जाएगी।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक दशमोत्तर शुल्क प्रतिपूर्ति 2010-11,2011-12 और 2012-13 में विशेष संपरीक्षा आख्या में 2011-12 में बी फार्मा प्रथम वर्ष के रंजीत गौतम को 73,200 रुपये दो बार दिए गए। इसी साल बीटेक के कृष्कांत जोशी, यशपाल राय, पवन भारती, मुकेश कुमार, नीरज कुमार, शशांक समेत कई विद्यार्थियों को उस समय लखनऊ में तैनात वरिष्ठ व कनिष्ठ सहायक की मिलीभगत से भुगतान किया गया। तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इससे इतर सरोजनीनगर के जीएसएसआरएम के बीएलएड की पढ़ाई कर रहे अक्षय प्रताप सिंह को शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में 2340 या फिर 25000 भुगतान को लेकर आरोप लगाया गया है। उन्होंने मामले की पड़ताल की सही भुगतान करने की मांग की है। जिला समाज कल्याण अधिकारी डा.अमरनाथ यती का कहना कि घोटाले की जांच उच्च अधिकारी कर रहे हैं। मेरे स्तर से जो  भी गड़बड़ी है उसे दुरुस्त कर दिया जाएगा। विद्यार्थी के शिकायत की जांच की जाएगी।

अल्प संख्यकों को भी नहीं मिल रही शुल्क प्रतिपूर्ति: समाज कल्याण ही नहीं अल्प संख्यक कल्याण विभाग की ओर से भी शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिल रही है। इनट्रीगल विवि के बीसीए कर रहे बासित मुजतबा ने आवेदन तो कर कर दिया, लेकिन शुल्क प्रतिपूर्ति का इंतजार है। अकेले बासित ही नहीं रुखसाना बेगम व शबाना समेत कइ्र विद्यार्थियों को आवेदन के बाद शुल्क प्रतिपूर्ति का इंतजार है। जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी बालेंदु द्विवेदी का कहना है कि शुल्क प्रतिपूर्ति बजट पर आधारित होता है। मेरिट के आधार पर भुगतान होता है,शेष विद्यार्थियों को बजट आने पर दिया जाता है। सबकुछ ठीक है तो बजट आते ही भुगतान कर दिया जाएगा।

 

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