मैनपुरी में छात्रा कथित खुदकुशी केस : ADG कानपुर जोन भानु भाष्कर की अगुवाई में जांच करेगी SIT

मैनपुरी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय की छात्रा की कथित खुदकुशी के मामले में हाई कोर्ट की नाराजगी के बाद अब पूरे प्रकरण की जांच के लिए एडीजी कानपुर जोन भानु भाष्कर की अध्यक्षता में छह सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की गई है।

Umesh TiwariFri, 17 Sep 2021 01:50 AM (IST)
मैनपुरी में छात्रा खुदकुशी केस की जांच के लिए एसआइटी गठित।

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय की छात्रा की कथित खुदकुशी के मामले में हाई कोर्ट की नाराजगी के बाद अब पूरे प्रकरण की जांच के लिए एडीजी कानपुर जोन भानु भाष्कर की अध्यक्षता में छह सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआइटी) गठित की गई है। डीजीपी मुकुल गोयल का कहना है कि एसआइटी छात्रा की कथित खुदकुशी के पूरे मामले की जांच करेगी। एसआटी से एक माह में जांच रिपोर्ट तलब की गई है। एसआइटी में एक महिला पुलिस उपाधीक्षक भी शामिल हैं।

एसआइटी में एडीजी कानपुर जोन भानु भाष्कर के अलावा आइजी एटीएस जीके गोस्वामी, आइजी कानपुर रेंज मोहित अग्रवाल, एसपी मैनपुरी अशोक कुमार, एसटीएफ की आगरा यूनिट में तैनात एएसपी राकेश यादव व कानपुर देहात में तैनात पुलिस उपाधीक्षक तनु उपाध्याय शामिल हैं।

मैनपुरी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय की छात्रा की कथित खुदकुशी प्रकरण को लेकर पूर्व में गठित की गई एसआइटी में भी आइजी कानपुर रेंज मोहित अग्रवाल शामिल थे। छात्रा की कथित खुदकुशी मामले में पुलिस जांच और अब तक हुई कार्रवाई को लेकर हाई कोर्ट ने गहरा असंतोष जताया है। हाई कोर्ट की नाराजगी के बाद ही बुधवार को मैनपुरी के तत्कालीन एएसपी ओम प्रकाश सिंह, सीओ प्रयांक जैन व एक निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया था। ओम प्रकाश सिंह वर्तमान में एटा तथा प्रयांक जैन वर्तमान में भदोही में तैनात थे। पूरे मामले में कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के विरुद्ध भी कार्रवाई हो सकती है।

बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डीजीपी को दुष्कर्म मामलों की जांच दो महीने में पूरा करने के लिए सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ को डीजीपी मुकुल गोयल ने बताया कि मैनपुरी के तत्कालीन एसपी का सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान रोक दिया गया है। उन्हें केवल प्राविजनल पेंशन का भुगतान किया जा रहा है। एसआइटी की नई जांच टीम गठित की गई है। इसमें अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है। खंडपीठ ने छह सप्ताह में मामले में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।

यह है पूरा मामला : छात्रा 16 सितंबर 2019 को स्कूल में फंदे से लटकती मिली थी। पुलिस ने शुरू में आत्महत्या का मामला बताया। मां का कहना था कि पीटा गया और जब वह मर गई तो फंदे पर लटका दिया गया। पिता ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई तो एसआइटी ने जांच शुरू की। एसआइटी ने 24 अगस्त 2021 को केस डायरी हाई कोर्ट में पेश की थी।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां

पैसे से कुछ नहीं होता, स्वर्ग कहीं और नहीं है। सब यहीं है। अपने कर्मों का फल सभी को भोगना पड़ता है। सही विवेचना नहीं होने के कारण भारत में अपराध की सजा की दर मात्र 6.5 फीसद है, जबकि कई देशों में 85 फीसद केस में सजा मिलती है। पुलिस आरोपित से असलहे बरामद नहीं करती, प्लांट करती है और बैलेस्टिक जांच रिपोर्ट में असलहे से फायर के साक्ष्य नहीं मिलने से आरोपित बरी हो जाते हैं। विवेचना निष्पक्ष (फेयर) होनी चाहिए, खून की फोरेंसिक जांच में देरी होती है। वांछित परिणाम नहीं मिलते। इसीलिए अपराधियों में भय नहीं है। नामित आरोपियों को अभिरक्षा में नहीं लिया गया, जबकि कार्रवाई होनी चाहिए थी। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 में स्पष्ट है कि अपराध की विवेचना दो माह में पूरी कर ली जाए, किंतु इसका पालन नहीं किया जा रहा है।

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