यूपी में सरकारी संस्थान के सेल्फ फाइनेंस कोर्स होंगे प्राइवेट, तीसरी श्रेणी में म‍िलेगा शुल्‍क प्रत‍िपूर्त‍ि का लाभ

आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए इसके लिए समाज कल्याण विभाग स्नातक के साथ ही इंजीनियरि‍ंग व पीएचडी तक की फीस को शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में छात्रों को वापस करता है।

Anurag GuptaSat, 24 Jul 2021 11:07 PM (IST)
शुल्क प्रतिपूर्ति के बदले नियमों के तहत हुआ बदलाव। शुल्क प्रतिपूर्ति के लाभ के लिए तीसरे क्रम में होंगे विद्यार्थी।

लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। यदि आप सरकारी संस्थान में सेल्फ फाइनेंस कोर्स में प्रवेश लेते हैं तो समाज कल्याण विभाग की ओर से मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ प्राइवेट संस्थान की भांति मिलेगा। अभी तक उन्हें पहले श्रेणी में रखा जाता था। अब पहले सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों के विद्यार्थियों के बाद इनको लाभ मिलेगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को फायदा होगा। पहले सरकारी व सहायता प्राप्त के बाद ऐसे ही ऐसे विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान होगा।

आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए इसके लिए समाज कल्याण विभाग स्नातक के साथ ही इंजीनियरि‍ंग व पीएचडी तक की फीस को शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में छात्रों को वापस करता है। बदले नियमों के तहत सरकारी संस्थाओं में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को प्राइवेट की भांति तीसरे क्रम में रखा जाएगा। पहले सरकारी, इसके बाद अद्र्ध सरकारी और फिर प्राइवेट संस्थाओं के विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति दी जाती थी। ऐसे में अब आर्थिक रूप से सुदृढ़ विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिल सकेगी। मैनेजमेंट कोटे के तहत प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को भी फीस नहीं मिलेगी।

आनलाइन होंगे आवेदन : नए नियमों के तहत आवेदन की प्रक्रिया 20 जुलाई से शुरू हो गई है। इंटर तक के छात्र 31 अगस्त और मैनेजमेंट और इंजीनियरि‍ंग समेत उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थी 30 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विद्यार्थी डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.स्कॉलरशिप.यूपी.एनआइसी.इन पर सीधे आवेदन कर सकते हैं। 

'नई नियमावली में सरकारी संस्थान के सेल्फ फाइनेंस कोर्स को प्राइवेट श्रेणी में रखा गया है। ऐसे करने से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को अधिक लाभ मिलेगा। आर्थिक रूप से सुदृढ़ ही सेल्फ फाइनेंस में प्रवेश लेते हैं।     -डा.अमरनाथ यती, जिला समाज कल्याण अधिकारी

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