बहराइच के सागरनाथ शिव मंदिर में 17 साल से हो रहा रामनाम का जाप, लोक कल्याण के लिए श्रद्धालु करते हैं अखंड कीर्तन

क्षेत्र के राजारेहुआ गांव स्थित ऐतिहासिक सागरनाथ शिवमंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र है। बुजुर्गों का कहना है कि यह मंदिर 500 वर्ष से अधिक पुराना है। अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आकर ठहरे थे और शिवलिंग की स्थापना की थी। सैकड़ों साल पहले तक यहां जंगल और झाड़ियां थीं।

Vikas MishraTue, 27 Jul 2021 08:49 PM (IST)
मंदिर में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं व ग्रामीणों को एकत्रित करके इस पर विचार विमर्श किया गया।

बहराइच, [रजनीश त्रिवेदी]। क्षेत्र के राजारेहुआ गांव स्थित ऐतिहासिक सागरनाथ शिवमंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र है। बुजुर्गों का कहना है कि यह मंदिर 500 वर्ष से अधिक पुराना है। अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आकर ठहरे थे और शिवलिंग की स्थापना की थी। सैकड़ों साल पहले तक यहां जंगल और झाड़ियां थीं।

मंदिर की विशेषता यह है कि बीते 17 साल से निरंतर श्रीराम नाम का जाप हो रहा है। व्यस्तता के इस दौर में भी लोगों का मंदिर के प्रति समर्पण का इससे ज्यादा अनूठा उदाहरण और कोई नहीं हो सकता। मंदिर के प्रबंधक शिवराम त्रिपाठी बताते हैं कि करीब 17 वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने लोक कल्याण व धर्म प्रचार की भावना से योजना बनाकर मंदिर में निरंतर राम नाम का जाप प्रारंभ करवाया था। 

मंदिर में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं व ग्रामीणों को एकत्रित करके इस पर विचार विमर्श किया गया। सभी ग्रामीणों ने अपनी सहमति दी। इसके बाद श्रीराम नाम का जाप शुरू हुआ। बीते 17 वर्ष से लगातार यह जाप जारी है। रामशंकर जायसवाल कहते हैं कि श्रद्धालु मंदिर आते हैं और भगवान श्रीराम का जाप करते हैं।

मंदिर प्रबंधक ने बताया कि शिवमंदिर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं तथा क्षेत्रीय ग्रामीणों के सहयोग से श्रीराम जानकी मंदिर व नरङ्क्षसह भगवान के मंदिर का निर्माण करवाया गया है। फाल्गुनी चतुर्दशी, कार्तिक पूर्णिमा, कजरी तीज, नागपंचमी, अमावस्या हो या फिर सावन का महीना। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर मंदिर परिसर में मेले जैसा महोत्सव रहता है। दूरदराज से भक्त आकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

पांडवों के पूजे गए शिवलिंग मिलेः एक बार रेहुआ स्टेट के राजा रुद्रप्रताप सिंह ने झाडिय़ों की साफ-सफाई शुरू कराई। जलाशय खोदाई के दौरान अचानक उसमें से जलधार निकल पड़ी। जंगल में ही पांडवों के पूजे गए शिवङ्क्षलग भी मिले थे। मुंडन संस्कार से लेकर अन्य मांगलिक कार्यक्रम भी यहां होते हैं। मंदिर के बगल में वर्गाकार करीब चार एकड़ क्षेत्र में फैला सरोवर आने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। वर्षों पुराने बरगद, पीपल के वृक्ष प्राकृतिक सुंदरता के उदाहरण हैं।

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