यूपी जेलों से फिर पैरोल और अंतरिम जमानत पर छूटेंगे बंदी, कारागार मुख्यालय तैयार कर रहा लिस्ट

कोरोना संक्रमण के कारण जेलों से बंदियों को पैरोल व अंतरिम जमानत पर छोड़ने का निर्णय किया गया है।

कोरोना का प्रकोप यूपी की जेलों पर भी पड़ रहा है। सूबे की जेलों में क्षमता से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए एक बार फिर जेलों से बंदियों को पैरोल व अंतरिम जमानत पर तय अवधि के लिए छोड़ने का निर्णय किया गया है।

Umesh TiwariThu, 06 May 2021 09:55 AM (IST)

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। कोरोना के बढ़ते संक्रमण का प्रकोप उत्तर प्रदेश की जेलों पर भी पड़ रहा है। सूबे की जेलों में क्षमता से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए एक बार फिर जेलों से बंदियों को पैरोल व अंतरिम जमानत पर तय अवधि के लिए छोड़ने का निर्णय किया गया है। हाई कोर्ट के निर्देश पर कारागार मुख्यालय सभी जेलों में पैरोल व अंतरिम जमानत पर छोड़े जाने के पात्र बंदियों की सूची तैयार कर रहा है। जल्द इस सूची को परीक्षण के बाद हाई पावर कमेटी के समक्ष रखे जाने की तैयारी है।

जेल अधिकारियों के अनुसार सात साल तक की सजा काट रहे अथवा जुर्माना न भर पाने के चलते अतिरिक्त सजा काट रहे सजायाफ्ता बंदियों को पैरोल पर छोड़ने के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है। इसी तरह सात साल तक की सजा काट रहे विचाराधीन बंदियों को भी अंतरिम जमानत पर छोड़ने के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है। सभी जेलों में पात्र बंदियों की सूची बनाने के बाद उसे हाई पावर कमेटी के समक्ष रखा जाएगा और कमेटी के आदेशों के अनुरूप बंदियों की तय अवधि के लिए रिहाई होगी।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में जेलों में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए हाई कोर्ट ने सजायाफ्ता बंदियों को आठ-आठ सप्ताह की पैरोल पर छोड़ने का आदेश दिया था। इसी कड़ी में उच्चाधिकार प्राप्त समिति की संस्तुतियों पर 2256 सजायाफ्ता बंदियों को आठ-आठ सप्ताह की पैरोल पर छोड़ा गया था, जबकि बड़ी संख्या में विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था।

बता दें कि उत्तर प्रदेश की जेलों में कोरोना संक्रमण फैलने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव की अध्यक्षता में गठित हाई पावर कमेटी ने व्यापक पैमाने पर सजायाफ्ता व विचाराधीन कैदियों की रिहाई की योजना घोषित की है। न्यायिक अधिकारियों को जेलों में जाकर योजना के तहत कैदियों को 60 दिन की पैरोल अथवा अंतरिम जमानत पर रिहा करने की कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। महानिदेशक कारागार से उन कैदियों का विवरण मांगा गया है जो सजा पूरी करने के बाद अर्थदंड जमा न करने के कारण जेल में हैं। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिये जुर्माने का भुगतान कर उन्हें रिहा किया जा सकेगा।

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