केजीएमयू में सुलतानपुर से आए बंदी को खुला छोड़ रक्षक बनवा रहे थे पर्चा, मौका मिलते हुआ फरार

सुलतानपुर के अमहट जेल से शनिवार को इलाज के लिए केजीएमयू भेजा गया बंदी अंसार अहमद बंदी रक्षकों की घोर लापरवाही से फरार हो गया। अंसार को केजीएमयू लेकर पहुंचे दो बंदी रक्षक उसे बरामदे में छोड़कर पर्चा बनवाने चले गए। इस बीच मौका पाते ही बंदी फरार हो गया।

Dharmendra MishraSat, 04 Dec 2021 11:38 PM (IST)
केजीएमयू में इलाज कराने आया कैदी पुलिस अभिरक्षा से फरार। दो रक्षक निलंबित।

लखनऊ/सुलतानपुर, जागरण संवाददाता।  सुलतानपुर के अमहट जेल से शनिवार को इलाज के लिए केजीएमयू भेजा गया बंदी अंसार अहमद, बंदी रक्षकों की घोर लापरवाही से फरार हो गया। अंसार को केजीएमयू लेकर पहुंचे दो बंदी रक्षक उसे बरामदे में छोड़कर पर्चा बनवाने चले गए। इस बीच मौका पाते ही बंदी अंसार फरार हो गया। वह एनडीपीएस के मामले में बंद था।

जेल अधीक्षक उमेश प्रताप सिंह ने उच्चाधिकारियों को दोनों रक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा, जिसके बाद दोनों रक्षकों को निलंबित कर दिया। इस मामले में बंदी और बंदी रक्षकों के खिलाफ चौक कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

कुड़वार के दुल्लापुर गांव निवासी अंसार अहमद 10 अगस्त 2021 से मादक पदार्थ की तस्करी के आरोप में जिला जेल में बंद था। कुछ दिन से उसकी तबीयत खराब थी। उसे इलाज के लिए शुक्रवार को चिकित्सकों ने लखनऊ भेजा। यहां केजीएमयू में भर्ती कराया गया। पुलिस विभाग के आरक्षी नहीं मिलने पर जेल के सिपाही रामबली निषाद व अभिषेक कुमार अपनी अभिरक्षा में लेकर आए थे।

शनिवार सुबह बंदी रक्षक रामबली निषाद और अभिषेक कुमार, बंदी अंसार की जांच कराने के लिए सुबह करीब 10:30 बजे पर्चा बनवा रहे थे। इस बीच बंदी अंसार को वहीं बरामदे में बैठा दिया। मौका पाते ही बंदी अंसार फरार हो गया। करीब दो बजे कोतवाली में बंदी रक्षकों ने इसकी सूचना दी।

काफी देर परिसर में घूमता रहा बंदीः इंस्पेक्टर चौक कुलदीप दुबे ने बताया कि बंदी रक्षकों की घोर लारवाही सामने आयी है। केजीएमयू के सीसी फुटेज में बंदी अकेला बैठा दिखा है। इसके बाद वह काफी देर परिसर में घूमता रहा। फिर वह भाग निकला। घटना के करीब तीन घंटे बाद बंदी रक्षकों ने थाने में सूचना दी थी।

पांच दिन चला था जिला अस्पताल में इलाजः बंदी अंसार अहमद पिछले करीब चार महीने से जेल में निरुद्ध है, उसे बीमारी के कारण से मेडिकल बैरक में रखा गया था। 29 नवंबर को बंदी रक्षकों की देखरेख में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पांच दिनों तक हालात में सुधार नहीं हुआ तो उसे केजीएमयू लखनऊ रेफर किया गया था।

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