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यूजीसी के सुझाव के बाद यूपी में सितंबर में विश्वविद्यालय और कॉलेजों की परीक्षाओं की तैयारी शुरू

लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ रहे स्नातक व परास्नातक अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षाएं सितंबर में आयोजित की जाएंगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों को सुझाव दिया है कि वे अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षाएं करवाएं। फिलहाल यूपी का उच्च शिक्षा विभाग परीक्षाएं आयोजित करने की तैयारी में जुट गया है। परीक्षा की अवधि को घटाया जाएगा और शारीरिक दूरी के मानकों का पालन कर इम्तिहान करवाया जाएगा। फिलहाल जल्द ही इसे लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइड लाइन का अध्ययन किया जा रहा है और कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। उधर स्नातक व परास्नातक के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षाएं आयोजित करने के लिए परीक्षा केंद्रों को बढ़ाने और कोरोना प्रोटोकाल का सख्ती से पालन करवाने के लिए योजना तैयार की जा रही है।

बता दें कि गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद यूजीसी ने सोमवार देर रात विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की परीक्षाओं को लेकर संशोधित गाइड लाइन जारी की है, जिसमें जुलाई में परीक्षाओं को कराने जैसी अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। साथ ही अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को अनिवार्य बताते हुए इन्हें सितंबर के अंत तक कराने की अनुमति दी है। जो आनलाइन और आफलाइन किसी भी माध्यम से कराई जा सकेंगी। यूजीसी ने इसके साथ ही विश्वविद्यालयों और कालेजों को यह भी छूट दे दी है, वह इन परीक्षाओं की स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए 30 सितंबर तक कभी भी करा सकते हैं। हालांकि यूजीसी को इसकी जानकारी देनी होगी।

यूजीसी ने इससे पहले 29 अप्रैल को जारी गाइडलाइन में सभी विश्वविद्यालय और कॉलेज को एक से पंद्रह जुलाई के बीच अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने को कहा था, जबकि पहले और दूसरे वर्ष की परीक्षाएं कराने के लिए 15 से 30 जुलाई तक का समय तय किया था। इस बीच कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कई राज्यों और विश्वविद्यालयों ने मौजूदा परिस्थितियों में परीक्षाएं कराने से हाथ खड़े कर दिए थे, जिसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यूजीसी से परीक्षाओं को लेकर जारी गाइडलाइन की नए सिरे से समीक्षा करने के निर्देश दिए थे। यूजीसी ने इसके बाद हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट के बाद यूजीसी बोर्ड ने यह फैसला लिया है।

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