राजधानी में भी चढ़ा कुंभ का रंग, थीम पर दिखेगा पूरा शहर

लखनऊ, जेएनएन। हाथों में शंख लिए संत महात्माओं का हुजूम तो कहीं समुद्र मंथन से निकलता अमृत का प्याला...कहीं नृत्य, वादन और कव्वाली तो कहीं कुंभ को सुर देने की तैयारी.... कुंभ लगने में कुछ समय बाकी है, लेकिन शहर को इसका अहसास होने लगा है। शहर की कई दीवारें कुंभ की तस्वीरों से सज रही हैं तो आयोजन का हिस्सा बनने के लिए  कलाकार जबरदस्त तैयारी कर रहे हैं।

कुंभ की आकृतियों से सजा शहर

प्रयागराज से दो सौ किलोमीटर दूर शहर की सड़कों पर कुंभ दिखने लगा है। शहर में एयरपोर्ट से जोडऩे वाली सड़कों से लेकर मुख्य मार्गों पर महाकुंभ से जुड़ी कलाकृतियां दिख रही हैं। कुंभ की झलकियों से शहर को सजाने कलाकार बाहर से आए हैं। इसके साथ ही कुंभ की फोटो को बाकायदा पोस्टर पर थीम बनाकर फ्रेम किया जा रहा है। हजरतगंज को एयरपोर्ट से जोडऩे के लिए अर्जुनगंज वाया शहीद पथ चौराहा, अहिमामऊ चौराहा आदि जगहों पर कलाकार पिलर व दीवारों को कुंभ की आकृतियों से सजा रहे हैं वहीं गोमतीनगर स्थित विभूतिखंड चौराहे पर शहीद पथ के दोनों ओर कुंभ में होने वाले स्नान व ऋषियों की आकृतियों को मनमोहक तरीके से उकेरा जा रहा है।

कई प्रदेशों से आए कलाकार

कुंभ की आकृतियों को बनाने के लिए विशेष तौर से मुंबई से आर्ट कलाकार अखिलेश दीक्षित, जयपुर से रामरतन, असम से मुकेश तिवारी, बनारस से कमला सिंह व मुजफ्फरनगर से मनोज सिंह आएं हैं। आने वाले एक सप्ताह में अन्य प्रदेशों से सौ आर्टिस्ट की टीम लखनऊ आने की तैयारी में है। आकृतियां बना रहे कलाकार मनोज सिंह ने बताया कि नगर निगम की तरफ से पूरे शहर के मुख्य मार्गों को कुंभ की थीम पर सजाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए बाकायदा नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी स्वयं डिजाइन फाइनल कर रहे हैं।

कव्वाली के साथ सूफियाना होगी कुंभ की आखिरी सांस्कृतिक शाम

देश भर के सभी लोक नृत्य, गायन व वादन से कुंभ को भव्यता को चार-चांद लगाएंगे। अगले साल प्रयागराज में होने वाले पूर्ण कुंभ का आगाज शंखवादन के साथ होगा। जिसमें संस्कृति विभाग देश भर के लगभग साढ़े आठ हजार कलाकारों की प्रस्तुति कराएगा। दस जनवरी से शुरू हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चार मार्च तक चलेगा। कुंभ पांच मंचों व प्रयागराज में 25 विभिन्न स्थानों पर लोक कलाओं का समागम देखने को मिलेगा। वहीं कव्वाली के साथ सांस्कृतिक शाम का समापन किया जाएगा।

कुंभ में संस्कृति विभाग के अलावा, संस्कार भारती, भारत सरकार के जोनल केंद्र का भी मंच होगा। जिसमें अनूप जलोटा, मालिनी अवस्थी, बिरजू महाराज, राजन-साजन, अनुराधा पोडवाल, छन्नू लाल, अहमद हुसैन, मोहम्मद हुसैन, पद्मश्री गुलाबो जैसे बड़े नाम भी इस कुंभ में शामिल होकर कुंभ का आनंद लेंगे।

इन विधाओं की होगी प्रस्तुति

कुंभ में देश के सभी प्रदेश के लोक गायन, नृत्य, वादन के अलावा कठपुतली, जादूगर के कार्यक्रम होंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 27 प्रदेशों के कलाकार अपनी लोक विधाओं की प्रस्तुति देंगे। जिसके तहत कथक, लावणी, कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम, बीहू समेत कई लोकप्रिय नत्यों, शास्त्रीय संगीत, अवधी, भोजपुरी, बिरहा, गजल आदि गायन का संगम रहेगा। बांसुरी, सितार, तबला, सरोद, संतूर, गिटार आदि के साथ नाटक, नौटंकी, कव्वाली के कार्यक्रम होंगे। 

लखनऊ के लगभग एक हजार कलाकारों को मिलेगा मौका

संस्कृति विभाग की ओर तैयार की गई कलाकारों की सूची में राजधानी के लगभग एक हजार कलाकार कुंभ मेले में अपनी प्रस्तुति देंगे। वहीं पूरे प्रदेश से चार हजार कलाकार अपनी लोक कलाओं से रूबरू कराएंगे।

हम कोशिश कर रहे हैं कोई भी  कलाकार न छूटे

संस्कृति विभाग के निदेशक शिशिर ने बताया कि कुंभ में पूरे देश की कला-संस्कृति से लोग रूबरू होंगे। कुंभ में देश भर के कलाकार अपनी विधाओं के साथ कुंभ को भव्य बनाएंगे। वहीं प्रदेश से भी हजारों कलाकारों के लिए यह बहुत बड़ा मंच है। हम कोई भी स्तरीय कलाकार को छोडऩा नहीं चाहते हैं। हमारा उद्देश्य है कि हर कलाकार को प्रतिभा को दिखाने का मौका मिले। पूरा विभाग महीनों की मेहनत के बाद कलाकारों का चयन व कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है। हम उम्मीद करते हैं यह प्रदेश क्या देश का सबसे बड़ा आयोजन होगा।

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