यूपी विधानसभा उपाध्यक्ष पद के चुनाव में सियासत गर्म, सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिया विपक्ष को करारा जवाब

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा संसदीय परंपरा का पूरी तरह पालन करती है। विधानसभा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष के सबसे बड़े दल का होता है। विपक्ष इस पद के लिए अपना कोई प्रत्याशी नहीं दे पाया। इसलिए सबसे बड़े विपक्षी दल के प्रत्याशी का नामांकन कराने आए।

Umesh TiwariSun, 17 Oct 2021 10:27 PM (IST)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा के आरोप को नकारा।

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की ओर से हरदोई सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक नितिन अग्रवाल का समर्थन करने पर सियासत गर्म हो गई है। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने इसे संसदीय परंपरा का अपमान बताया है और विभिन्न दलों के विधानसभा सदस्यों से अपील की है कि वे अंतरात्मा की आवाज पर वोट दें। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि उपाध्यक्ष पद के लिए मुख्य विपक्षी दल के विधायक का समर्थन कर उसने संसदीय परंपरा का निर्वहन किया है।

रविवार को विधान भवन के राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन सभागार में नितिन अग्रवाल की ओर से अपना नामांकन पत्र प्रमुख सचिव विधानसभा को प्रस्तुत करने के बाद उनके साथ आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा के आरोप को नकारते हुए कहा कि भाजपा संसदीय परंपरा का पूरी तरह पालन करती है। विधानसभा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष के सबसे बड़े दल का होता है। विपक्ष इस पद के लिए अपना कोई प्रत्याशी नहीं दे पाया। इसलिए हम लोग सबसे बड़े विपक्षी दल के प्रत्याशी नितिन अग्रवाल का नामांकन कराने आए हैं।

नामांकन के बाद नितिन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री नेता सदन होते हैं। हमारा नामांकन उन्होंने कराया है। प्रत्याशी उतार कर संसदीय परंपरा का अपमान तो सपा कर रही है। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी सपा पर परंपरा तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नितिन को सपा ने हरदोई सीट से टिकट दिया था। वह विधानसभा चुनाव जीते और आज भी सदन में सपा के सदस्य हैं। मतदान के बारे में पूछने पर खन्ना ने कहा कि हम चुनाव के लिए हमेशा तैयार रखते हैं।

उधर सपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह वर्मा के नामांकन के बाद विधानसभा में नेता विरोधी दल राम गोविंद चौधरी ने कहा कि भाजपा को संविधान, लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं में विश्वास नहीं है। उसकी नजर सिर्फ वोट पर है। सत्रहवीं विधानसभा की लगभग साढ़े चार वर्ष की अवधि बीतने के बाद अब उपाध्यक्ष के चुनाव का कोई औचित्य नहीं है, लेकिन सत्ताधारी दल व सरकार ने चोरी-छिपे विधानसभा सत्र बुलाया है। उन्होंने कहा कि उपाध्यक्ष का पद मुख्य विपक्षी दल का होता है। हमने परंपरा निभाने के लिए प्रत्याशी उतारा है। नितिन सपा के प्रत्याशी नहीं हैं क्योंकि उन्हें सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने नहीं, भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है।

चौधरी ने कहा कि जीत-हार तो सोमवार को सदन में मतदान के बाद तय होगी। उन्होंने सभी दलों से अपील की है कि वे अंतरात्मा की आवाज पर वोट दें।नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद नरेंद्र वर्मा ने कहा कि संसदीय परंपराओं के अनुरूप विधानसभा उपाध्यक्ष का पद सदन में सबसे बड़े विपक्षी दल का होता है। नितिन अग्रवाल मेरे छोटे भाई हैं, लेकिन वह भाजपा में हैं। सत्ता पक्ष रोज नई नजीर पेश कर रहा है, संवैधानिक परंपराओं और मर्यादाओं को तोड़-मरोड़ रहा है। मुझे भरोसा है कि यदि निर्वाचन की नौबत आती है तो विधानसभा के सदस्य अंतरात्मा की आवाज पर मुझे वोट देंगे।

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