महोबा कांड : अपनों को बचाने के लिए कहानी तो नहीं रच रही पुलिस, हत्या व आत्महत्या के बीच लटकी Theory

महोबा में कबरई के व्यापारी इंद्रकांत को आठ सितंबर को गोली लगी थी और 13 को उनकी मृत्यु।
Publish Date:Sun, 27 Sep 2020 12:02 AM (IST) Author: Divyansh Rastogi

लखनऊ, जेएनएन। महोबा में क्रशर व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी की गोली लगने से हुई मौत के मामले में निलंबित आइपीएस अधिकारी मणिलाल पाटिल समेत अन्य पुलिसकर्मी हत्या के आरोपित हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का महोबा कांड को लेकर रुख कड़ा है और वह कड़ी कार्रवाई के संकेत पहले ही दे चुके हैं। विपक्ष भी इस घटना को कानून-व्यवस्था के मुद्दे को तीर की तरह इस्तेमाल करने का मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहता। 

अब इन हालात में पुलिस ने जिस तरह शुक्रवार रात प्रेसवार्ता की और अपनी थ्योरी से यह इशारा करने का प्रयास किया कि चंद्रकांत ने आत्महत्या की थी, उससे कई सवाल उठ रहे हैं। आत्महत्या और हत्या के बीच अटकी उलझी हुई कहानी में कई छेद भी हैं। अधिकारी भले ही आगे विवेचना में और तथ्यों के स्पष्ट होने का हवाला दे रहे हैं, पर बड़ा सवाल यह भी है कि इस संगीन मामले में पुलिस को राजफाश की इतनी जल्दी किन कारणों से थी? चंद्रकांत के परिवारीजन के गले भी पुलिस की खुदकुशी की ओर इशारा करती थ्योरी उतर नहीं रही है। 

महोबा में कबरई के व्यापारी इंद्रकांत को आठ सितंबर को गोली लगी थी और 13 सितंबर को उनकी मृत्यु हो गई थी। चंद्रकांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पहले कहा गया था कि गोली पीछे से मारी गई। गोली पीठ में धंसकर गले के पास से निकल गई। फिर प्रेसवार्ता में एडीजी प्रेम प्रकाश ने बताया कि चंद्रकांत को गोली सामने से लगी थी और नजदीक से चली थी। फोरेंसिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए यह दावा किया गया है। 

बैलेस्टिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी बताया गया कि गोली चंद्रकांत के असलहे से चली थी, जो चंद्रकांत के पैरों के बीच में मिला था। दरअसल, पुलिस ने संदेह के दायरे में आए लोगों के कुल सात असलहों की बैलेस्टिक जांच कराई थी। पुलिस का कहना है कि खोखा चंद्रकांत की कार की पिछली सीट पर मिला था। बाद में उसका एक टुकड़ा पीछे सीट में धंसा पाया गया था। प्रकरण की जांच के लिए आइजी वाराणसी विजय सिंह मीणा की अध्यक्ष्ता में गठित तीन सदस्यीय एसअाइटी ने इन तथ्यों को खोजा है, लेकिन चंद्रकांत ने ही खुद को गोली मारी थी, अभी इसका कोई वैज्ञानिक साक्ष्य सामने नहीं आया है। पुलिस अधिकारी भी इसे लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। एक अधिकारी के अनुसार चंद्रकांत का हैंडवॉश (हाथ से बारूद का नमूना) का नमूना लिया गया था, जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। अब पुलिसिया थ्योरी भले ही कुछ इशारा करे, लेकिन अभी सीधे तौर पर यह कोई मानने को तैयार नहीं कि गोली खुद चंद्रकांत ने चलाई थी।

और भी हैं सवाल

सवाल यह भी है कि करीबी ने चंद्रकांत की कार से उनकी पिस्टल उठाकर उनके घर क्यों पहुंचाई थी। किन कारणों से ऐसा किया गया। एक सवाल यह भी है कि आखिर महोबा कांड की प्रेसवार्ता की चर्चा जब शुक्रवार दोपहर से थी, तो उसे किन कारणों से देर रात में किया गया। लंबी जांच के बाद पुलिस मीडिया के सामने तो आई लेकिन हत्या और खुदकुशी के बीच उलझी रही और सीधे ताैर पर कुछ नहीं कहा गया। जांंच से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि आगे की विवेचना माहोबा पुलिस करेगी, जिसमें सभी तथ्य पूरी तरह से स्पष्ट होंगे। फिलहाल यह स्पष्ट हो गया है कि गोली नजदीक से और सामने से चली थी। 

कारनामों से मंशा पर सवाल 

एसआइटी की जांच में महोबा पुलिस की कई ऐसी शिकायतें भी सामने आईं, जिनमें पीड़ितों को सिंडीकेट बनाकर फंसाने के तथ्य पाए गए। करीब 12 शिकायतों की जांच में गलत आरोपपत्र दाखिल किए जाने से लेकर गलत ढंग से अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने के तथ्य बेहद गंभीर हैं। महोबा पुलिस के कारनामों से उसकी गलत मंशा भी साफ जाहिर होती है।

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