Pitra Paksha 2021: पूर्णिमा श्राद्ध से शुरू हुआ पितृपक्ष, लखनऊ में गोमती के घाटों पर पितरों की तृप्ति को पिंडदान

अपनों को याद तर्पण करने पितृपक्ष की शुरुआत पूर्णिमा श्राद्ध के साथ ही सोमवार को हो गई। आदि गंगा गोमती के घाट पर तिलांजलि और पिंडदान के दौरान परिवारीजनों की आंखें नम हो गईं। परिवारीजनों ने उन्हें नम अंखों से याद किया तो गरीबों व आचार्यों को दान पुण्य किया।

Vikas MishraMon, 20 Sep 2021 11:39 AM (IST)
आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि भादों मास की पूर्णिमा तिथि के साथ ही श्राद्ध पक्ष की शुरुआत हो गई।

लखनऊ, जागरण संवाददाता। अपनों को याद तर्पण करने पितृपक्ष की शुरुआत पूर्णिमा श्राद्ध के साथ ही सोमवार को हो गई। आदि गंगा गोमती के घाट पर तिलांजलि और पिंडदान के दौरान परिवारीजनों की आंखें नम हो गईं। परिवारीजनोें ने उन्हें नम अंखों से उनके कार्यो का बखान किया तो गरीबों व आचार्यों को दान पुण्य किया। सुबह पिंडदान व तिलांजलि के बाद दोपहर में उनकी पसंद का भोजन बनाया। पहले पूर्वजों के नाम से निकाला और फिर कौआ, गाय व अन्य बेजुबानाें काे खिलाकर उनकी आत्मा काे तृप्त करने का विधान किया। कुड़िया घाट, लक्ष्मण मेला स्थल के साथ ही झूलेलाल घाट व लल्लू मल घाट पर शारीरिक दूरी के साथ लोगों ने श्राद्ध किया। 

आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि भादों मास की पूर्णिमा तिथि के साथ ही श्राद्ध पक्ष की शुरुआत हो गई। छह अक्टूबर तक हमारे पितृ धरती पर विराजमान होंगे। मान्यता है कि पूर्वज धरती पर विराजमान होकर सुख, शांति व समृद्धि प्रदान करते हैं। जिनकी कुंडली में पितृ दोष हो, उनको अवश्य तर्पण करना चाहिए। श्राद्ध करने से हमारे पितृ तृप्त होते हैं। जिन लोगों की मृत्यु पूर्णिमा को हुई है, वे पूर्णिमा को सुबह पिंडदान करके दोपहर में पूर्वजों की पसंद का भोजन खिलाते हैं। गायत्री परिवार के उमानंद शर्मा ने बताया कि इंंदिरानगर के गायत्री मंदिर में शारीरिक दूरी के साथ एक साथ 28 लोगों ने पिंडदान कर किया। शहीदों के नाम भी पिंडदान किया गया। हर दिन सुबह पांच बजे से सामूहिक पिंडदान होगा। 

कल से शुरू होगा तिथिवार तर्पण-श्राद्धः पितृ पक्ष की पूर्णिमा के श्राद्ध के बाद मंगलवार से तिथिवार श्राद्ध शुरू हो जाएगा। पूर्वजों की याद में गोमती के घाटों और घरों में लोगों ने पिंडदान कर दान पुण्य होगा। पूर्वजों को याद कर जहां उनकी पसंद के भोजन का सेवन कराया जाएगा। आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या को पितरों की शांति के लिए पिंड दान या श्राद्ध कर्म किया जा सकता है, लेकिन पितृ पक्ष में किस दिन पूर्वजों का श्राद्ध करें इसके लिए लिए तिथि का अधिक मान होता है। तिथिवार श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा तृप्त होती है। आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि पूर्वजों के दिवंगत होेने की तिथि पर श्राद्ध करना उचित होता है, लेकिन तिथि याद न हो तो अमावस्या को श्राद्ध किया जा सकता है, इसलिए इसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। आचार्य कृष्ण कुमार मिश्रा ने बताया कि समय से पहले यानि जिन पूर्वजों की किसी दुर्घटना से निधन हुआ हो या आत्महत्या की हो तो उनका श्राद्ध पितृ पक्ष के एक दिन पहले करना श्रेयस्कर होता है।

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