Lucknow Coronavirus News: इंसानियत को भूल, इलाज के नाम पर चौतरफा मरीजों से मची लूट

एंबुलेंस चालक भी यहां 500 रुपये प्रति किमी के हिसाब से वसूली कर रहे हैं।

सरकारी अस्पतालों में नहीं हो रही इलाज के लिए सुनवाई। निजी ने मचा रखी है लूट कहां जाएं कोविड-नॉन कोविड मरीज। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए डफरिन अस्पताल में मरीजों से मिलने का समय पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

Anurag GuptaThu, 06 May 2021 07:32 AM (IST)

लखनऊ, [सौरभ शुक्ला]। इलाज और मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए एंबुलेंस चालक मानवता के दुश्मन बन गए हैं। यह लोग आपदा में अवसर तलाश मानवीय संवेदनाओं का गला घोंटने पर तुले हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा तो निजी अस्पताल के संचालकों ने इलाज के नाम पर लाखों की लूट मचा रखी है। यही नहीं, एंबुलेंस चालक भी यहां 500 रुपये प्रति किमी के हिसाब से मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे तक ले जा रहे हैं। इसका खामियाजा आम जन ही नहीं सरकारी विभागों में तैनात अधिकारी भी भुगत रहे हैं।

सरकारी में सुनवाई नहीं, निजी अस्पतालों में मची है लूट

बीते दिनों घर मे मां सरस्वती भट्ट, पत्नी नीमा भट्ट, बेटी अदिति भट्ट, भाई चारुचंद्र भट्ट, नवीन उसकी पत्नी अंजू भट्ट सब पॉजिटिव हो गए। यह कहना है समाज कल्याण विभाग के सांख्यिकी अधिकारी संजय भट्ट का। संजय ङ्क्षरग रोड कल्याणपुर के हरने वाली हैं। उनकी पत्नी का ङ्क्षलब सेंटर कोविड अस्पताल में इलाज चल है। उन्होंने बताया कि मां को को मेदांता में 29 अप्रैल को देर रात भर्ती कराया था। यहां तीन दिन के इलाज में उनके करीब तीन लाख रुपये लग गए। वहीं, भाई चारुचंद्र को चंदन अस्पताल में भर्ती कराया था। उनके इलाज में 12 दिन में आठ लाख रुपये का खर्च आया, जबकि बेटी, भाई नवीन उनकी पत्नी का घर पर ही इलाज चल रहा था। वह वहीं ठीक हो गए। संजय ने बताया कि निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर लूट मची है। पता नहीं कौन सी दवा दे रहे हैं।

ट्रामा सेंटर में 10 घंटे तड़पती रहीं मां

संजय में बताया कि 29 अप्रैल को मां की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों से बात की तो बताया गया कि ले आओ भर्ती हो जाएगी। दोपहर दो बजे करीब उन्हें ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचे तो तीन से चार घंटे बीत गए, पर मां का इलाज शुरू नहीं हुआ। इसके बाद बड़ी मुश्किल से उन्हें होङ्क्षल्डग एरिया में रखा गया। आक्सीजन लेवल भी मां का कम होने लगा। आक्सीजन की व्यवस्था की कुछ देर चली फिर आक्सीजन बी खत्म होने लगी। इलाज न मिलने के कारण मां की हालत बिगड़ रही थी। गुहार करता रहा किसी ने सुनवाई नहीं की। 10 घन्टे बीत गए इसके बाद उन्हें किसी तरह से मेदांता लेकर भागा।

500 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से वसूले एम्बुलेंस चालक ने

संजय ने बताया कि रात करीब एक बजे वह केजीएमयू ट्रामा से मां को मेदांता ले जाने की तैयारी कर रहे थें। उन्होंने एम्बुलेंस सेवा 108 को फोन किया पर कोई नहीं आया। इसके बाद आक्सीजन स्पोर्ट वाली प्राइवेट एम्बुलेंस तय की। एम्बुलेंस चालक ने 500 रुपये प्रति किमी के हिसाब से किराया लिया। मेदांता की दूरी करीब 20 किमी है केजीएमयू से इस हिसाब से 10 हजार रुपये एम्बुलेंस चालक ने वसूले।

डीएम और सीएमओ को फोन करने के बाद भी नहीं मिला इलाज, रात भर तड़पते रहे पिता : बलरामपुर अस्पताल के बाहर खड़े मडिय़ांव अजीज नगर निवासी सुमित अपने मिलने वालों से सोर्स लगवाकर कोविड वार्ड में भर्ती पिता रामस्वरूप के इलाज के लिए गुहार कर रहे थें। उनका कहना था कि पिता का ठीक से इलाज डॉक्टर नहीं कर रहे हैं। यहाँ सिर्फ ऊंची पहुंच वालों को इलाज ठीक से मिल रहा है। आम आदमी को नहीं। सुमित ने बताया कि पिता मंगलवार को शाम अस्पताल में भर्ती हुए थे। उन्हें यहां वार्ड नम्बर 20 के बीएड नम्बर 24 पर रख गया गया है। उनका आक्सीजन लेवल कम था। रात करीब 11 बजे पिता के सीने में दिक्कत हुई एकाएक। वह ठीक से सांस नहीं ले पा रहे थें। सीने में दर्द भी था और तेज बुखार। पिता की कोविड की जांच हुई थी पर रिपोर्ट नहीं आयी थी।

डाक्टर और मेडिकल स्टाफ अपने कमरों को बंद करके सो रहा था। कई बार उनके दरवाजे के बाहर खटखटाया पर किसी ने दरवाजा नहीं खोला। फिर एक मित्र से नम्बर पता करके जिलाधिकारी के यहां फोन किया। उनके स्टाफ ने फोन रिसीव किया। उन्होंने कहा की सीएमओ से बात करें। सीएमओ का नम्बर दिया। सीएमओ को फोन किया तो उन्होंने डिटेल मांगी। उन्हें वाट््सएप पर मैसेज भेजकर पिता के भर्ती की डिटेल दी। उन्होंने 12:12 बजे रिप्लाई किया और कन्वेड लिखा। उनके बाद भी कोई डाक्टर और मेडिकल स्टाफ पिता को देखने नहीं आया। सभी सोते रहे पिता रात भर तड़पते रहें। सुबह डॉक्टरों ने पिता को राउंड के दौरान देखा।

अंदर सख्ती, बाहर बेफिक्री : कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए डफरिन अस्पताल में मरीजों से मिलने का समय पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। मरीज के साथ तीमारदार के रुकने के लिए पास की व्यवस्था की गई है।मरीज के साथ एक ही महिला तीमारदार रुक सकती है, जिसकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव हो।

हालांकि, अस्पताल के अंदर तो सख्ती है और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को प्रतिबंधित किया गया है, पर परिसर के बाहर कोरोना को लेकर बेफिक्री नजर आई।टिन शेड के नीचे खुले में बैठे तीमारदार मास्क भी नहीं लगाए थे।वहीं, मरीज से मिलने की मनाही होने के बाद भी तीमारदार बाहर शारीरिक दूरी का पालन करते नजर नहीं आए। 

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