निरीक्षक और उपनिरीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही का आदेश, कलमबंद बयान के बाद भी घटाई दंडनीय धारा

गैंगरेप का कलमबंद बयान दर्ज कराने के बाद भी सिर्फ एक अभियुक्त के खिलाफ पॉक्सो की कम दंडनीय धाराओं में आरोप पत्र दाखिल करने पर विशेष अदालत ने सख्त रुख अख्तियार किया है। विशेष जज महेश चन्द्र वर्मा ने इस संदर्भ में पुलिस महानिदेशक को पत्र जारी किया है।

Vikas MishraFri, 24 Sep 2021 01:48 PM (IST)
विशेष लोक अभियोजक अशोक श्रीवास्तव ने जमानत अर्जी का जोरदार विरोध किया।

लखनऊ, विधि संवादददाता। गैंगरेप का कलमबंद बयान दर्ज कराने के बाद भी सिर्फ एक अभियुक्त के खिलाफ पॉक्सो की कम दंडनीय धाराओं में आरोप पत्र दाखिल करने पर विशेष अदालत ने सख्त रुख अख्तियार किया है। पॉक्सो की विशेष अदालत ने इस मामले के विवेचक व थाना चिनहट के तत्कालीन निरीक्षक मनोज कुमार सिंह व उपनिरीक्षक प्रेम प्रकाश के खिलाफ विभागीय कार्यवाही का आदेश दिया है। विशेष जज महेश चन्द्र वर्मा ने इस संदर्भ में पुलिस महानिदेशक को पत्र जारी किया है। कहा है कि इन विवेचकों के अवैधानिक कृत्यों के लिए कार्यवाही कर उसकी रिपोर्ट एक माह में प्रस्तुत की जाए। उन्होंने इसके साथ ही अभियुक्त वाल्टर की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी है।

विशेष लोक अभियोजक अशोक श्रीवास्तव ने जमानत अर्जी का जोरदार विरोध किया। उन्होंने अदालत को इस तथ्य से अवगत कराया कि इस मामले में पीड़िता ने अभियुक्त व उसके दोस्तों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 161 व 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराया था। लेकिन, अभियुक्तों को बचाने की मंशा से जानबूझकर उसका फिर से मजीद बयान दर्ज कराया गया। फिर इसी आधार पर पॉक्सो की कम दंडनीय धाराओं में सिर्फ एक अभियुक्त वाल्टर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। वर्ष 2019 में इस मामले की एफआईआर नाबालिग पीड़िता के पिता ने दर्ज कराई थी।

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