Onion Price Hike: उफ! प्याज ने पहली तिमाही में कभी नहीं निकाले इतने आंसू, जानें 10 सालों का आवक और औसत भाव

Onion Price Hike:पिछले एक दशक में जनवरी, फरवरी, मार्च में कभी 25 रुपया प्रति किलो पार नहीं कर पाई प्याज।

Onion Price Hike पिछले एक दशक में जनवरी फरवरी मार्च माह में कभी 25 रुपया प्रति किलो पार नहीं कर पाई प्याज। साल 2018 और 2020 को छोड़ दिया जाए तो बीते दस साल में 10 से 15 रुपये के इर्द-गिर्द ही घूमा महंगाई का पहिया।

Divyansh RastogiMon, 01 Mar 2021 11:38 AM (IST)

लखनऊ [नीरज मिश्र]। आमतौर पर बरसात के महीनों से शुरू होकर सर्दी के शुरुआती सीजन तक प्याज की कीमतें आसमान छू रही होती हैं। लेकिन जनवरी, फरवरी और मार्च में प्याज हमेशा औने-पौने दाम में बिकता है या यूं कहें कि कौडिय़ों के दाम प्याज बिकता है तो गलत न होगा। बीते एक दशक में प्याज की कीमतों में इस कदर इजाफा कभी नहीं देखा गया। पर इस बार इन तीन माह में प्याज की कीमतों ने लोगों की आंखों में आंसू ला दिए हैं। थोक मंडी में इन दिनों प्याज 35 से 38 रुपये किलो बिक रही है। फुटकर में इस मसाला आइटम का भाव 55 से 60 के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

बीते दस वर्षों में थोक मंडी में प्याज की आवक और औसत भाव

माह का नाम-आवक(क्विंटल)-रेट(रुपये प्रति क्विंटल में)

वर्ष-2011

जनवरी-21,556-606

फरवरी-30,183-877

मार्च- 34,203-1,580

वर्ष-2012

जनवरी-28,117-592

फरवरी-31,203-757

मार्च-34,647-878

वर्ष-2013

जनवरी-28,912-1,012

फरवरी-32,676-912

मार्च-34,647-878

वर्ष- 2014

जनवरी-83,418-1,015

फरवरी-35,346-955

मार्च-48,527-880

वर्ष-2015

जनवरी-44,515-914

फरवरी-43,284-927

मार्च-46,530-884

वर्ष-2016

जनवरी-45,520-886

फरवरी-43,851-930

मार्च-47,520-746

वर्ष-2017

जनवरी-50,584-667

फरवरी-57,430-747

मार्च-60,410-586

वर्ष-2018

जनवरी-50,690-1,600

फरवरी-54,440-1,050

मार्च-74,864-791

वर्ष-2019

जनवरी-75,810-650

फरवरी-74,418-600

मार्च-81,139-590

वर्ष-2020

जनवरी-26,352-2,465

फरवरी-53,881-1,314

मार्च-63,125-1,493

वर्ष-2021

जनवरी-59,116-2,800

फरवरी-3,073-3,500

मार्च-------------

तीन महीनों में प्याज ने लाए आंखों में आंंसू: आढ़ती दुबग्गा थोक मंडी शहनवाज हुसैन ने बताया कि शुरुआती तीन महीनों में प्याज की कीमतें कभी इस कदर नहीं चढ़ती हैं। बीस रुपया किलो का आंकड़ा भी प्याज नहीं छू पाता है। लेकिन इस साल के तीन महीनों में प्याज ने हर व्यक्ति की आंखों में आंसू ला दिया है।  

जानबूझकर माल की आपूर्ति धीमी: मंडी सचिव संजय सिंह के मुताब‍िक, यह सही है। कुछेक साल को छोड़ दिया जाए तो बीते एक दशक के दौरान दस रुपये प्रति किलो के आसपास ही प्याज का भाव थोक मंडी में रहा है। आवक भरपूर रही है। लेकिन इधर प्याज का भाव बराबर रफ्तार भर रहा है। यह चौंकाने वाला है। बाहर से आने वाली प्याज इन महीनों में हमेशा भरी पड़ी रहती थी। लेकिन इधर नासिक  और अन्य स्थानों से आने वाले प्याज की आपूर्ति रुक-रुक कर आ रही है। फसल है तो ऐसा क्यों? नई फसल भी करीब है। ऐसे में रेट अकारण चढऩा संदेह पैदा करता है कि कहीं अन्य प्रांतों से जानबूझकर माल की आपूर्ति धीमी की जा रही है। मंडी खत्म होने के बाद अब टीम भंडारण पर सीधी कार्रवाई नहीं कर सकती है। कहीं यह कृत्रिम तेजी पैदा करने की कोशिश तो नहीं?  

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