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घर में लॉक बच्चे बन रहे मोटापे का शिकार, कैसे करें देखभाल जानिए विशेषज्ञों की राय

लखनऊ, [कुसुम भारती]। महीनों से स्कूलों की बंदी बच्चों की सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं पिछड़ रही, उनके लिए शारीरिक रूप से भी नुकसानदायक साबित हो रही है। कोरोना के चलते पहले लॉकडाउन, फिर स्कूल बंदी, साथ ही घर से बाहर निकलने की पाबंदी इसकी वजह बना रही है। लगातार घर में रहने से उनका फिजिकल व मानसिक कामकाज ठप हो गया है। खाली रहने के दौरान बच्चे खानपान की चीजों की अधिक डिमांड घर में करने लगे हैं। छोटी मगर बेहद मोटी इस समस्या पर पैरेंट्स का भी ध्यान नहीं है। नतीजा, बच्चे निर्धारित मानक से ज्यादा मोटे हो रहे हैं और कई तरह के रोगों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में बच्चों में बढ़ते मोटापे को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। बाल रोग विशेषज्ञों की सलाह पर एक रिपोर्ट। 

वजन बढ़ने से बच्चों की सॉफ्ट हड्डियों में बढ़ रही डिफॉर्मिटी:

केजीएमयू में पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट में विभागाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह कहते हैं, आजकल बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है। वहीं, एक ही जगह घंटों बैठकर मोबाइल गेम व वीडियो गेम खेलना, टीवी देखना और साथ ही कुछ न कुछ खाते रहना ये भी बच्चों में मोटापा बढ़ने की बड़ी वजह हैं। इसके अलावा मोटापा बढ़ने से उनका वजन बढ़ता और वजन बढ़ने से वह कोई फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर पाते। जिससे बच्चों में कम उम्र में ही जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, कब्ज आदि की समस्याएं बढ़ रहीं हैं। वहीं, वजन बढ़ने से बच्चों की सॉफ्ट हड्डियों में आकार बदलना, टेढ़ापन जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि, तीन साल से दस साल तक के बच्चों में खतरे कम होते हैं क्योंकि यह उनके ग्रोथ का समय होता है। मगर दस साल के बाद यदि मोटापा बढ़ता है तो आगे चलकर बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। हॉस्पिटल में फिलहाल डिजिटल ओपीडी में हफ्ते में 10 से 15 कॉल आ रही हैं। 

बीएमआइ का रखें ध्यान :

हाइट से वजन का संबंध होता है। हॉस्पिटल में बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) चार्ट देखकर तय किया जाता है। बच्चों का बीएमआइ 25 से कम होना चाहिए। यदि 30 से ऊपर मोटापे की श्रेणी में आता है और यदि 25 से 30 के बीच में हो तो ओवरवेट कहलाता है। बीएमआइ मापने का पैमाना हाइट अपऑन वेट होता है।

मोटापे से बच्चे हो रहें गंभीर रोगों का शिकार :

लोहिया संस्थान में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके यादव कहते हैं, बच्चों में मोटापे के कारण बीपी, शुगर, सांस, अस्थमा, ह्रदय रोग जैसे गंभीर रोग बढ़ रहे हैं। वहीं, कोरोना काल में बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी भी कम हो गई है, जिसके चलते भी वे मोटापे का शिकार हो रहे हैं। मोटापे के कारण ही वे फिजिकल एक्टिविटी में रुचि नहीं लेते। जबकि माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों पर ध्यान दें और उनसे घर के छोटे-मोटे काम भी कराते रहें। घर में खेलकूद जैसी फिजिकल एक्टिविटी करें, नहीं तो, यदि बच्चों का मोटापा इसी तरह बना रहा तो भविष्य में वे गंभीर रोगों का शिकार भी हो सकते हैं। 60 साल में होने वाली हाई बीपी, शुगर, डायबिटीज जैसी बीमारियां 40 वर्ष में ही होने लगती हैं। हॉस्पिटल में आने वाला हर 20 मरीजों में से एक बच्चा मोटापे से ग्रसित होता है और विभिन्न रोगों का शिकार होता है।

फास्ट फूड पर लगाएं रोक : 

केजीएमयू में वरिष्ठ आहार एवं पोषण विशेषज्ञ डॉ. सुनीता सक्सेना कहती हैं, कोरोना काल में आजकल घर में रहने से बच्चों को बाहर का फास्ट फूड मिलना बंद हो गया है। ऐसे में, वे घर पर इसकी डिमांड करने लगे हैं। इसलिए भी बच्चों का वजन बढ़ रहा है। ऐसे में, माएं उन्के फास्ट फूड पर लगाम लगाएं क्योंकि इससे भी कब्ज बनता है। बहुत जिद करें तो उनको महीने में एकाध बार हेल्दी फास्ट फूड बनाकर खिलाएं। जैसे कि आटे का पिज्जा, ढेर सारी वेजिटेबल डालकर नूडल्स, पास्ता, मैक्रोनी या बर्गर दे सकती हैं, मगर संतुलित मात्रा में ही दें। नवजात बच्चों को छह माह के बाद पोषक व संतुलित आहार देने की सलाह दी जाती है। बच्चों को खिचड़ी, दलिया, वेजिटेबल देना शुरू करें। दूध के अलावा दूध से बनें खाद्य पदार्थ देना चाहिए।

घर पर भी सेहत भरा पोषण :

केजीएमयू में वरिष्ठ आहार एवं पोषण विशेषज्ञ डॉ. सुनीता सक्सेना कहती हैं, माताएं घर पर स्प्रॉउट चाट, उत्पम, सूजी व दही से बने अन्य डिश, होम मेड शेक, जूस, स्टीम्ड फूड आदि सेहत से भरे फूड खिला सकती हैं। चीज, बटर और तेल का इस्तेमाल कम करें। खाना नॉन स्टिक बर्तनों में बनाएं ताकि घी-तेल कम लगे।

क्या कहती है रिसर्च : एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में करीब 15 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे से ग्रसित हैं। अगले दस साल में यह संख्या 25 करोड़ पहुंच जाएगी। संगठन की चाइल्डहुड ओबिसिटी रिपोर्ट के मुताबिक, पांच से 19 साल के आयुवर्ग में चीन के 6.19 करोड़ और भारत के 2.75 करोड़ बच्चे इसकी जद में हैं।

ये हैं प्रमुख कारण :

शारीरिक सक्रियता में कमी फास्टफूड की बढ़ती खपत  घर में रहने के दौरान अत्याधिक खानपान मोबाइल-टीवी को ज्यादा वक्त देना मोटापा बढ़ा रहा बच्चों में ये रोग : हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, अस्थमा, श्वास की समस्या हड्डियों और जोड़ों में परेशानी का खतरा बचपन में ही मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर का जोखिम मोटापे के बाद बच्चों में सर्जरी कराने का खतरा

मम्मियां खिला रहीं बच्चों को हेल्दी फास्ट फूड : 

कोरोना काल में मम्मियों ने भले ही बच्चों के बाजार में बिकने वाले फास्ट फूड पर लगाम लगा दी है। मगर अब उनकी कसरत और भी बढ़ गई है। हर रोज उन्हें अपने बच्चों की पसंद के फास्ट फूड और बेकरी आइटम बनाकर देने की मशक्कत करनी पड़ रही है। ऐसे में, कुछ मम्मियां फास्ट फूड को हेल्दी फूड बनाकर बच्चों को परोस रही हैं।

हरी सब्जियों वाला ब्रेड पिज्जा : 

रितु गुप्ता कहती हैं, मेरी बेटी को मिठाई पसंद नहींं है। उसे फास्ट फूड में मैगी पिज्जा, मोमोज जैसी स्पाइसी चीजें पसंद हैं। मगर मां होने के नाते मुझे पता है कि ये चीजें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसलिए जब भी वह मुझसे कुछ डिमांड करती है तो मैं उसे ब्रेड पिज्जा बनाकर देती हूं। इसे बनाते वक्त मैं ताजी हरी सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करती हूं जिसे वह चीज़ और बटर के कॉम्बीनेशन के साथ बहुत ही चाव से खाती है और यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद होता है।

 

बेटी को खिलाती हूं वेज रोटी नूडल्स : कामाक्षी शुक्ला कहती हैं, मेरी पांच वर्ष की बेटी वनिशा भी फास्ट फूड की मांग करती है। लेकिन लॉकडाउन में मैंने उसको हेल्दी फूड खिलाने की आदत डाल दी है। मैं उसे वेज रोटी नूडल्स बनाकर खिलाती हूं। इसके लिए रोटी के पतले-पतले टुकड़ों को नूडल्स की तरह काटकर उसमें बारीक कटे हुए शिमला मिर्च, गाजर, बीन्स, मटर, टमाटर, अदरक, लहसुन, प्याज और कुटी हरी मिर्च और इसमें दो बड़े चम्मच टोमेटो सॉस डालकर दो चम्मच तेल या रिफाइंड में तैयार कर देती हूं जिसे वह बड़े चाव से खाती है।

 

होम मेड वेज पिज्जा संग संडे स्पेशल फूड की डिमांड: कीर्ति श्रीवास्तव कहती हैं, सात साल के अर्नव को पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन जैसे फास्ट फूड और बेकरी आइटम बहुत पसंद हैं और हर रोज कुछ न कुछ डिमांड रहती थी। मगर लॉकडाउन के बाद से उसको सिर्फ घर के बने फूड ही देती हूं। अब होम मेड वेज आटा पिज्जा देती हूं जो पसंद करने लगा है। हालांकि, हफ्ते में एक दिन संडे को उसकी पसंद का छोला-भटूरा, इडली, दोसा जैसे फास्ट फूड भी बनाए जाते हैं, मगर उसकी सेहत का भी भरपूर ध्यान रखती हूं।

 

ताजे फलों से बना होम मेड जैम-जेली खिलाती हूं : 

अनुपमा श्रीवास्तव कहती हैं, मैं एक शिक्षिका के साथ मां भी हूं। मेरी पांच वर्षीय बेटी भी फास्ट फूड की शौकीन है। कोरोना काल में बहुत सारी नई चीजें भी सीखने को मिलीं। पहले बाजार के डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करती थी। अब सबकुछ घर पर ही बनाने की कोशिश करती हूं। मेरी बेटी लॉकडाउन के दौरान कभी-कभी पिज्जा और मैक्रोनी वगैरह मांगती थी। लेकिन मैं उसको कभी मैंगो शेक तो कभी पराठे में आमलेट और पराठे या ब्रेड पर घर में फलों से तैयार जैम, जेली लगाकर उसको केक की तरह बना देती हूं जो उसे स्वादिष्ट लगता है। साथ ही ये हेल्दी फूड भी होते हैं। ताजे फलों के बने हुए जैम-जेली में पोषक तत्व और अंडे में प्रोटीन मिलता है जो सेहत के लिए फायदेमंद होता है। कोरोना काल में बच्चों को बहुत सी अच्छी आदतें भी सीखने को मिली हैं। ज्यादातर बच्चे अब हेल्दी फूड खाने लगे हैं। वहीं, घर में रहने के कारण नियमित रूप से व्यायाम और पढ़ाई पर भी ध्यान देने लगे हैं।

 

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