लखनऊ: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि में अब नई शिक्षा नीति के तहत सभी पाठ्यक्रम, नहीं कर पाएंगे नौकरी संग PhD

लखनऊ : ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में वित्त समिति और विद्या परिषद की बैठक।

लखनऊ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में वित्त समिति और विद्या परिषद की बैठक। कई प्रस्तावों पर लिए गए फैसले विदेशी भाषाओं की भी पढ़ाई शुरू कराने का निर्णय। वहीं इंटर डिसीप्लीनरी लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए ब्रिज कोर्स भी तैयार किया जाएगा।

Publish Date:Thu, 28 Jan 2021 07:30 AM (IST) Author: Divyansh Rastogi

लखनऊ, जेएनएन। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में चल रहे सभी पाठ्यक्रम नई शिक्षा नीति के अनुसार बदले जाएंगे। सभी संकाय इस पर जल्द ही काम शुरू करेंगे। इसके अलावा यहां विदेशी भाषाओं की भी पढ़ाई शुरू होगी। बुधवार को हुई वित्त समिति एवं विद्या परिषद की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए।

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में हुई विद्या परिषद की बैठक में कुल 40 बिंदुओं पर विचार विमर्श किया गया। अंग्रेजी विभाग की ओर से फ्रेंच, जर्मन, कोरियन व जैपनीज भाषा के पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके साथ ही एमएड व अर्थशास्त्र में परास्नातक पाठ्यक्रम भी संचालित होंगे। विदेशी भाषाओं की ओर विद्यार्थियों का रुझान बढ़ाने के लिए कुलपति ने विश्वविद्यालय में फॉरेन फिल्म फेस्टिवल के आयोजन का सुझाव दिया है। बैठक में सभी संकायाध्यक्षों के अलावा लविवि के प्रो. सोमेश शुक्ला भी उपस्थित रहे। अलीगढ़ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रो. मोहम्मद सगीर बेग अफराहिम और कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रो. मोहम्मद शफी अहमद ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया।

अब नौकरी के साथ नहीं कर पाएंगे पीएचडी: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय से अब नौकरी के साथ-साथ पीएचडी नहीं कर सकेंगे। शोधार्धियों को पूर्णकालिक रूप में ही पीएचडी करने की अनिवार्यता होगी। बैठक में इस प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी गई। छात्रहित में शोध के लिए गिरी संस्थान के साथ हुए समझौते को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। वहीं, इंटर डिसीप्लीनरी लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए ब्रिज कोर्स भी तैयार किया जाएगा। विश्वविद्यालय सभी स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों के लिए एक समिति बनाएगा, जो इन कार्यक्रमों का संयोजन करेगी।

पुअर ब्वाय फंड से होगी निर्धन छात्रों की मदद: वित्त समिति की बैठक में शिक्षक कल्याण कोष के गठन का निर्णय लिया गया। इसका प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. सैयद हैदर अली को दी गई। इसके साथ ही पुअर ब्वाय फंड को भी क्रियांवित करने का फैसला लिया गया, जिससे गरीब परिवेश से आ रहे विद्याॢथयों की सहायता की जा सके। विश्वविद्यालय में सेवा प्रदाता के माध्यम से कार्य कर रहे कार्मिकों के वेतन में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है।

 

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