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Anamika Shukla Case : फर्जी डिग्री वाले शिक्षक भी पुलिस और शिक्षा विभाग के पकड़ में आने लगे

लखनऊ, जेएनएन। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षिकाओं की भर्ती के मामले तो सामने आ ही रहे हैं, फर्जी शिक्षक भी अब पकड़ में आने लगे हैं, जो वर्षों से सेवारत हैं। ऐसे फर्जी शिक्षक-शिक्षिकाओं की जांच और धरपकड़ में पुलिस और शिक्षा विभाग लगा हुआ है। 

प्रयागराज के सोरांव के गोहरी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी करने वाली सरिता यादव पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सकी है। उसकी तलाश करने का दावा करने वाली कर्नलगंज पुलिस अब शिकंजा कसने के लिए उसके खिलाफ वारंट बनवाने की तैयारी में है। इसके लिए चार दिन बाद जिला अदालत खुलने का इंतजार है। सरिता के साथ ही मुख्य आरोपित पुष्पेंद्र व बल्लू से पूछताछ के लिए पुलिस बी-वारंट बनवाएगी, ताकि मामले में सटीक विवेचना आगे बढ़ सके।

दूसरी ओर, बरेली में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अब दो और ऐसे फुल टाइम शिक्षकों के नाम सामने आए हैं, जो बारह साल से नौकरी तो कर रहे हैं मगर उनके पास नियुक्ति पत्र नहीं मिले। अनामिका शुक्ला प्रकरण सामने आने के बाद हुए सत्यापन में इसका पता चला। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दोनों शिक्षकों का वेतन रोकते हुए तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। बीते सप्ताह भी तीन शिक्षक ऐसे पाए गए थे, जो दस साल से नौकरी करते आ रहे है लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं हैं।

पता चला है कि दमखोदा ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय रिछा में तैनात शिक्षक जेबी जैदी और सुचिता परासरी वर्ष 2008 से नौकरी कर रहे हैं लेकिन उनके पास नियुक्ति पत्र नहीं है। शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय को बताया कि उस समय एक एनजीओ ने नियुक्ति की थी, इसलिए नियुक्ति पत्र नहीं दिया। वहीं, लापरवाही यह रही कि 12 साल में जिले में कई बीएसए आए, लेकिन किसी ने भी जांच न करके शिक्षकों का हर साल नवीनीकरण कर दिया। अब वर्तमान बीएसए विनय कुमार ने वेतन रोक कर जांच बैठाई है।

इसी तरह मीरजापुर में बीएड की फर्जी डिग्री के आधार पर कार्यरत सहायक अध्यापक के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। साथ ही अब तक ले चुके वेतन की रिकवरी आदेश के साथ सहायक अध्यापक के खिलाफ गुरुवार को बीईओ ने कछवां थाना में खैरा चौकी क्षेत्र के हासीपुर गांव निवासी उमेश चंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा कायम कराया है। वह केवटाबीर स्थित परिषदीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय (यूपीएस) में सहायक अध्यापक था।

खंड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार मिश्रा ने बताया कि सहायक अध्यापक की नियुक्ति वर्ष 2010 में हुई थी। नियुक्ति के दौरान सन 2004-05 में बीएड की फर्जी डिग्री लगाया था जो आगरा विश्वविद्यालय के नाम से बना है। सहायक शिक्षा निदेशक मंडल की जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। रिकवरी की धनराशि के लिए जिन जनपदों में पहले नौकरी किया है वहां से डाटा मंगाया गया है।

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