अब रामजन्मभूमि की तर्ज पर हनुमत जन्मभूमि पर बनेगा भव्य मंदिर, 215 मीटर ऊंची स्‍थापित होगी प्रतिमा

अयोध्‍या में महा शिवरात्रि को कर्नाटक के किष्किंधा स्थित हनुमत जन्मभूमि से निकलेगी यात्रा।

अपनी योजना को मूर्त रूप देने से पूर्व वे बजरंगबली के आराध्य श्रीराम का आशीर्वाद लेने मंगलवार को रामनगरी में थे। उन्होंने रामलला के प्रमुख अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास से श्रीराम की पादुका के रूप में तीन खड़ाऊं का पूजन-अर्चन कराया।

Rafiya NazTue, 02 Mar 2021 05:27 PM (IST)

अयोध्या, जेएनएन। रामजन्मभूमि की तर्ज पर हनुमत जन्मभूमि पर भी भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा। हनुमान जी की जन्मभूमि कर्नाटक प्रांत के कप्पड़ जिलांतर्गत प्राचीन किष्किंधा पर्वत पर है। फिलहाल, हनुमान की जन्मभूमि किष्किंधा के शिखर पर 20 गुणे 20 फीट के एक कक्ष के रूप में है। अब जबकि रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है, तब हनुमत जन्मभूमि पर भी भव्य मंदिर के निर्माण की ललक जगी है। इस मुहिम के सूत्रधार हनुमत जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी गोविंदानंद सरस्वती हैं। अपनी योजना को मूर्त रूप देने से पूर्व वे बजरंगबली के आराध्य श्रीराम का आशीर्वाद लेने मंगलवार को रामनगरी में थे। उन्होंने रामलला के प्रमुख अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास से श्रीराम की पादुका के रूप में तीन खड़ाऊं का पूजन-अर्चन कराया। इस मौके पर रामलला के सहायक अर्चक प्रदीपदास एवं रामादल के अध्यक्ष पं. कल्किराम ने भी खड़ाऊं पूजन किया। 

स्वामी गोविंदानंद के संयोजन में आगामी महाशिवरात्रि यानी 11 मार्च से रथयात्रा निकलेगी। किष्किंधा से निकलने वाली यह यात्रा राष्ट्रव्यापी होगी और नेपाल स्थित मां सीता की जन्मभूमि से होती हुई वापस 12 साल की अवधि पूर्ण होते-होते किष्किंधा पहुंचेगी। यात्रा के दौरान हनुमत जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए घर-घर से निधि एकत्रित की जाएगी। गोविंदानंद की योजना किष्किंधा की तलहटी के 10 एकड़ क्षेत्र में हनुमान जी का भव्यतम मंदिर एवं इतने ही विस्तृत भूक्षेत्र पर रामायण ग्राम विकसित करने की है। इसी के साथ ही उनकी योजना हनुमान जी की 215 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की है।

राम मंदिर के लिए स्वीकार किया जाय हर प्रकार का दान- रामनगरी पहुंचे हनुमत जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सुझाव भी दिया। रामघाट स्थित रामलला के प्रमुख अर्चक के आवास पर मीडिया से मुखातिब गोविंदानंद ने कहा, राम मंदिर के लिए मिलने वाली धातुओं को बगैर किसी अड़चन के स्वीकार किया जाना चाहिए, क्योंकि श्रद्धालु बहुत भाव से दान देने आ रहे हैं। ट्रस्ट के पास दान में मिली वस्तुओं को रखने के लिए जगह की कमी है, तो वह अतिरिक्त जगह का प्रबंध करे।

रामलला के दर्शनार्थियों को पादुका उतारने की सुविधा मिले- गोविंदानंद ने रामलला के दर्शनार्थियों को पादुका उतार कर दर्शन करने की सुविधा मुहैया कराने की मांग की। उन्होंने कहा, पादुका पहन कर आराध्य का दर्शन उचित नहीं है और इससे श्रद्धालुओं को भी असुविधा महसूस होती होगी।

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