नई शिक्षा नीति के अनुसार होंगे भाषा विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम, बैठक में लिया गया निर्णय

ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में कुलपति ने शिक्षकों के साथ बैठक की।

ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अनिल कुमार शुक्ला ने मंगलवार को शिक्षकों के साथ बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप बनाने और भाषा संबंधित पाठ्यक्रमों को स्पेशलाइजेशन के रूप में तैयार करने पर चर्चा हुई।

Rafiya NazWed, 14 Apr 2021 11:26 AM (IST)

लखनऊ, जेएनएन। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अनिल कुमार शुक्ला ने मंगलवार को शिक्षकों के साथ बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप बनाने और भाषा संबंधित पाठ्यक्रमों को स्पेशलाइजेशन के रूप में तैयार करने पर चर्चा हुई। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय अभी नया है और इसलिए इसमें बदलाव की अपार संभावनाएं है। विवि के भाषा संबंधित विभाग इस ऐतिहासिक धरोहर को पाठ्यक्रम के माध्यम से दुनिया के सामने रखेंगे तो देश विदेश से विद्यार्थी यहां उसे पढ़ने आएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक डिजिटल युग के अनुरूप, छोटे रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार कर उसे मूक के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाने का प्रयास करें।

विद्यार्थियों के पास ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई करने के कई स्त्रोत हैं और इस डिजिटल युग में अपनी पहचान बनाने की ज़िम्मेदारी स्वयं शिक्षक की है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक पाठ्यक्रम कवर करने के स्थान पर उसे डिस्कवर करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित तो वह अधिक बेहतर होगा। 21वीं सदी के शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वह सीखने के अनुकूल वातावरण तैयार करें और शिक्षा को सामाजिक व्यावहारिकता एवं सामाजिक ज्ञान से जोड़ने का प्रयास करें। उन्होंने बैठक में सभी अधिष्ठाताओं से अपने संकायों के पाठ्यक्रमों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया ताकि विद्यार्थियों को मल्टीपल एंट्री एवं मल्टीपल एग्जिट की सुविधा मुहैया हो सके। उन्होंने सभी शिक्षकों को विश्वविद्यालय के यूट्यूब चैनल के माध्यम से अपने लेक्चर विद्यार्थियों तक अधिक से अधिक संख्या में पहुंचाने को कहा। बैठक में मुख्य रूप से विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी, संजय कुमार सिंह, प्रो एसएस ए अशर्फी, प्रो चंदना डे, प्रो मसूद आलम, प्रो सैयद हैदर अली, प्रो एहतेशाम अहमद मौजूद रहे।

 

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