यूपी में कस्तूरबा विद्यालयों की निगरानी के लिए तैनात होंगे नोडल अधिकारी, सीएम योगी ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की निगरानी के लिए जल्द ही नोडल अधिकारी तैनात करने का निर्देश दिया है। उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों से कहा कि बालिका विद्यालय और छात्रावासों में सुविधाएं बढ़ाकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जाए।

Vikas MishraMon, 06 Dec 2021 09:58 PM (IST)
प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की दशा और दिशा बदलने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है।

लखनऊ, राज्य ब्यूरो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की निगरानी के लिए जल्द ही नोडल अधिकारी तैनात करने का निर्देश दिया है। उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों से कहा कि बालिका विद्यालय और छात्रावासों में सुविधाएं बढ़ाकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जाए। नोडल अधिकारी विद्यालयों व छात्रावासों की सुविधाओं की समीक्षा करें और लापरवाह लोगों की जवाबदेही भी तय करें। प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की दशा और दिशा बदलने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है।

बेटियों को आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाने के लिए कोरोना काल के दौरान एक दिन भी बालिकाओं की शिक्षा रुकने नहीं दी। तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करते हुए बालिकाओं को ई-पाठशाला, दूरदर्शन व वाट््सएप के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। बालिकाओं का कोर्स पूरा कराने के साथ उनके लिए यू-ट््यूब पर कार्यक्रम हो रहे हैं। सूबे के 746 विकासखंडों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय चलाए जा रहे हैं। इनमें से 300 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक की बालिकाएं शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। इसके अलावा 446 विद्यालयों में कक्षा छह से 12वीं तक की बालिकाओं को पढ़ाया जा रहा है। इन विद्यालयों को उच्चीकृत कराने के साथ पाठ्यक्रमों में बदलाव किया गया है। बालिका विद्यालयों में अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग व बीपीएल परिवारों की बालिकाओं को आवासीय सुविधा के साथ शिक्षा देने की भी व्यवस्था की है। 

प्राथमिक स्कूलों की शिक्षिकाओं को जिम्मा देने की तैयारीः कस्तूरबा विद्यालयों में उसी विकासखंड में कार्यरत प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका को जिम्मा देने की तैयारी है। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव कई माह पहले भेजा था, जो निदेशक बेसिक शिक्षा के यहां लंबित है, क्योंकि विद्यालयों के वार्डेन आदि इसका विरोध कर रहे थे। अब जल्द ही आदेश जारी हो सकता है।

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