नौकरी का झांसा देकर बेरोजगारों के एकाउंट से उड़ा रहे थे रुपये, लखनऊ में नौ युवतियों समेत 11 गिरफ्तार

एसीपी क्राइम ब्रांच प्रवीण मलिक के मुताबिक गिरोह में शामिल नौ युवतियों समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह लगभग हर सेक्टर में युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देता था। खासकर टेलीकॉम बैंक और साफ्टवेयर कंपनियों में नौकरी का ऑफर दिया जाता था।

Anurag GuptaTue, 03 Aug 2021 10:56 PM (IST)
लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, नौकरी का झांसा दे करते थे फोन, बैंक का डाटा चोरी कर ठगी।

लखनऊ, जागरण संवाददाता। क्राइम ब्रांच और अलीगंज कोतवाली की संयुक्त टीम ने फर्जी कॉल सेंटर की आड़ में लोगों से ठगी करने के गिरोह का भंडाफोड़ किया है। आरोपित नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं को फोन करते थे और फिर उनके बैंक खातों की जानकारी हासिल कर रुपये पार कर देते थे। एसीपी क्राइम ब्रांच प्रवीण मलिक के मुताबिक गिरोह में शामिल नौ युवतियों समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह लगभग हर सेक्टर में युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देता था। खासकर टेलीकॉम, बैंक और साफ्टवेयर कंपनियों में नौकरी का ऑफर दिया जाता था। मूलरूप से लखीमपुर निवासी विशाल और अनुज पाल ने अलीगंज में किराए के कमरे में कॉल सेंटर खोला था। विशाल अपने अन्य साथियों के साथ फरार है।

पुलिस ने अनुज के अलावा विकासनगर सेक्टर चार निवासी अजय कश्यप, मडिय़ांव निवासी रमा सिंह, कोमल सिंह, जय निगम, रुचि तिवारी, प्रीती देवी, महानगर निवासी सदफ, बीकेटी निवासी पूजा चौरसिया, अलीगंज निवासी पल्लवी और डाली को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों के पास से 17 मोबाइल फोन और 12 कंप्यूटर समेत बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया गया है। गिरोह का मुख्य सरगना अलीगढ़ निवासी विशाल अपने साथी बिहार निवासी अजय, अभिषेक, हिमांशी वर्मा और खुशबू के साथ फरार है। गिरफ्तार युवतियों ने बताया कि उन्हें आठ हजार रुपये प्रति माह वेतन दिया जाता था।

ऐसे फर्जीवाड़ा करता था गिरोह

गिरोह संचालक विशाल और अनुज इंटरनेट के जरिये ऐसे युवकों का ब्यौरा निकालते थे, जिन्होंने नौकरी के लिए किसी वेबसाइट पर अपना बायोडाटा डाला हो। इसके बाद उनके फोन नंबर युवतियों को देकर युवकों को फोन कराते थे। युवतियां फोन कर युवकों को नौकरी के लिए चयन होने का झांसा देती थीं। रजिस्टे्रशन के नाम पर सौ रुपये लिए जाते थे। इसके बाद एक लिंक भेजकर युवकों के बैंक खाते की जानकारी हासिल कर लेते थे। यही नहीं आनलाइन साक्षात्कार का झांसा देकर युवकों को बातों में उलझाए रहते थे और उनसे अचानक ओटीपी पूछकर खातों से रुपये पार कर देते थे। आरोपितों ने बताया कि वह अधिकतम 15 हजार रुपये ही निकालते थे ताकि कोई पीडि़त पुलिस में शिकायत न करे। पुलिस का कहना है कि आरोपितों को छह सौ रुपये में प्री एक्टिवेटेड सिम उपलब्ध कराने वाले दुकानदार का पता चला है, जिसकी तलाश की जा रही है।

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