हत्या व लूट समेत अन्य संगीन अपराधों का UP में गिरा ग्राफ, जानें- क्या कहती है NCRB की रिपोर्ट

NCRB Report 2020 डीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार एनसीआरबी की रिपोर्ट के हवाले से हत्या लूट व डकैती जैसी घटनाओं में पिछले वर्षों के मुकाबले कमी आने का दावा करते हैं। वर्ष 2020 में देश में हत्या की कुल 29193 घटनाएं हुईं जिनमें उत्तर प्रदेश में 3779 हत्याएं हुईं।

Umesh TiwariFri, 17 Sep 2021 06:30 AM (IST)
एनसीआरबी की वर्ष 2020 की रिपोर्ट यूपी पुलिस को राहत देने वाली है।

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश के लिए कानून-व्यवस्था का मुद्दा हमेशा बड़ा रहा है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही इस मुद्दे को राजनीतिक दलों ने उठाना भी शुरू कर दिया है। हाथरस कांड से लेकर महिला अपराध से जुड़ी कई घटनाएं बीते दिनों सुर्खियां रही हैं और ऐसी घटनाओं को लेकर माहौल बिगाड़ने की साजिश तक भी सामने आई है। ऐसे में एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो) की वर्ष 2020 की रिपोर्ट यूपी पुलिस को राहत देने वाली है। खासकर महिला अपराध के मामलों में दोषियों को सजा दिलाने में उत्तर प्रदेश वर्ष 2019 की तरह फिर शीर्ष स्थान पर रहा। साइबर अपराधों में भी दोषियों को सजा दिलाने में उसका स्थान पहला है।

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में देश में कुल 42,54,356 अपराध पंजीकृत हुए, जिनमें उत्तर प्रदेश में 3,55,110 अपराध हुए। देश में हुए कुल अपराधों की तुलना में उत्तर प्रदेश में 8.34 फीसद अपराध हुए। एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार एनसीआरबी की रिपोर्ट के हवाले से हत्या, लूट व डकैती जैसी घटनाओं में पिछले वर्षों के मुकाबले कमी आने का दावा करते हैं।

प्रशांत कुमार का कहना है कि वर्ष 2020 में देश में हत्या की कुल 29,193 घटनाएं हुईं, जिनमें उत्तर प्रदेश में 3779 हत्याएं हुईं। एनसीआरबी की रिपोर्ट में प्रति एक लाख जनसंख्या के सापेक्ष अपराधों की संख्या को अपराध दर (क्राइम रेट) के रूप में परिभाषित किया गया है। हत्या में देश का क्राइम रेट 2.2 और उत्तर प्रदेश का 1.7 रहा। प्रदेश में वर्ष 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में हत्या की घटनाओं में 0.7 फीसद की कमी आई है। ऐसे ही लूट की घटनाओं में देश के क्राइम रेट 1.8 के मुकाबले प्रदेश का क्राइम रेट 0.7 है और यूपी देश में 23वें स्थान पर है।

एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार का दावा है कि वर्ष 2019 के मुकाबले पिछले वर्ष लूट की घटनाओं में 27.1 फीसद कमी आई। ऐसे ही डकैती के मामले में देश के मुकाबले प्रदेश का क्राइम रेट आधा है और प्रदेश में वर्ष 2019 के मुकबले पिछले वर्ष डकैती की घटनाओं में 3.2 फीसद कमी आई। इस मामले में उत्तर प्रदेश का देश में 25वां स्थान है। फिरौती के लिए अपहरण की घटनाओं में भी वर्ष 2019 के मुकाबले 16.2 फीसद की कमी दर्ज की गई है। देश में दुष्कर्म के कुल 28,046 मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें उत्तर प्रदेश में 2769 घटनाएं हुईं।

दुष्कर्म के मामलों में राष्ट्रीय अपराध दर 4.3 के मुकाबले प्रदेश का क्राइम रेट 2.5 है और उत्तर प्रदेश का देश में 25वां स्थान है। वर्ष 2019 में देश में आइपीसी की धाराओं में 32,25,701 मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनमें उत्तर प्रदेश में 3,53,131अपराध दर्ज हुए थे। वर्ष 2019 के मुकाबले कुल अपराधों में उत्तर प्रदेश की स्थिति में और सुधार हुआ है। एडीजी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में आबादी अधिक होने की वजह से अपराधों की संख्या भी अधिक है, लेकिन अपराध की स्थिति को समझने के लिए क्राइम रेट एक बेहतर व विश्वसनीय माध्यम है।

यहां भी स्थिति में सुधार

बच्चों के विरुद्ध अपराधों में राष्ट्रीय अपराध दर 28.9 के मुकाबले प्रदेश की अपराध दर 17.9 है। देश में उत्तर प्रदेश 29वें स्थान पर है। पाक्सो (प्रिवेंशन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस) एक्ट के मामलों में राष्ट्रीय अपराध दर 10.6 के मुकाबले उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 8.1 है। देश में उत्तर प्रदेश का 24वां स्थान है। हत्या के प्रयास के मामलों में राष्ट्रीय अपराध दर 4.3 के मुकाबले उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 1.8 है। महिला संबंधी कुल अपराधों में राष्ट्रीय अपराध दर 56.5 के मुकाबले उत्तर प्रदेश की अपराध दर 45.1 है। उत्तर प्रदेश का 16वां स्थान है।

दोषियों को सजा दिलाने में आगे

महिला संबंधी अपराधों में 8386 मुकदमों में दोषियों को दिलाई सजा। आइपीसी के अपराधों में गिरफ्तार 1,30,454 आरोपितों को दिलाई सजा। अव्वल रहा प्रदेश। साइबर अपराधों में 642 आरोपितों को सजा दिलाकर हासिल किया पहला स्थान। 37,616 शस्त्रों का किया जब्त।

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