केन्द्र सरकार की मंजूरी के बाद अब अमेठी में होगा एके 203 राइफल का उत्पादन, होगा पांच लाख राइफल का निर्माण

AK-203 Rifles नरेन्द्र मोदी सरकार के भारत में रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता को एक बड़ा बढ़ावा देने के प्रयास में है। सरकार ने इसी के तहत अमेठी के कोरवा में पांच लाख से अधिक एके-203 असॉल्ट राइफलों के उत्पादन की योजना को मंजूरी दी है।

Dharmendra PandeySat, 04 Dec 2021 12:07 PM (IST)
अमेठी में जिन एके-203 राइफल का निर्माण होगा

लखनऊ, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की योजना को बड़ी उड़ान मिली है। केन्द्र सरकार की मंजूरी के बाद अब उत्तर प्रदेश के अमेठी में एके-203 राइफल का निर्माण होगा। भारत तथा रूस के इस साझा प्रोजेक्ट का अमेठी को बड़ा लाभ मिलेगा और यहां पांच लाख राइफल का निर्माण होगा।

रक्षा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने एक बड़ा कदम बढ़ाया है। अमेठी के कोरवा में भारत और रूस एक संयुक्‍त उपक्रम के तहत 5 लाख से अधिक एके-203 राइफल का निर्माण करने जा रहे हैं। यह भारत और रूस का साझा कदम है, जिसे भारत सरकार ने स्वीकृति दे दी है। यह प्रस्तावित परियोजना प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया मंत्र की तरफ बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे भारत की विश्व से हथियार खरीदने की निर्भरता भी कम होगी।अमेठी में जिन एके-203 राइफल का निर्माण होगा, वो पीएसी तथा पुलिस बल में करीब तीन दशक पहले शामिल इंसास राइफल का स्थान लेंगी। रूस के साथ साझा प्रोजेक्ट को केन्द्र की सरकार ने दी मंजूरी दी है।अमेठी के इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (आइआरआरपीएल) के संयुक्त उद्यम का अहम प्रोजेक्ट है। इसको भारत के तत्कालीन ओएफबी अब एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एडब्ल्यूईआईएल) और मुनिशन इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) और रूस के रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (आरओई) और चिंता कलाश्निकोव के साथ गति दी जा रही है।

उत्तर प्रदेश में डिफेंस कारिडोर के छह नोड की शुरुआत होने के साथ ही यह प्रदेश भारत का रक्षा विनिर्माण केन्द्र बनने की ओर अग्रसर हो गया है। नरेन्द्र मोदी सरकार के भारत में रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता को एक बड़ा बढ़ावा देने के प्रयास में है। सरकार ने इसी के तहत अमेठी के कोरवा में पांच लाख से अधिक एके-203 असॉल्ट राइफलों के उत्पादन की योजना को मंजूरी दी है। यह रक्षा अधिग्रहण में खरीद (वैश्विक) से मेक इन इंडिया में लगातार बढ़ते प्रतिमान को दर्शाता है। यह प्रयास रूस के साथ साझेदारी में किया जाएगा और रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरी होती साझेदारी को दर्शाता है। यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में भारत और रूस के मजबूत और विश्वसनीय सम्बन्धों का भी प्रतीक है। इस परियोजना में एमएसएमई और रक्षा क्षेत्र के उद्योगों को कच्चे माल और पार्ट्स सप्लाई करने का अवसर भी मिलेगा। यह परियोजना रक्षा क्षेत्र उत्पादन में उत्तर प्रदेश को प्रमुख स्थान दिलाएगी। उतर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना डिफेंस कॉरिडोर की दिशा में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी।

इस परियोजना को इंडो-रसियन जॉइंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाएगा। यह राइफल एडवांस वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, मियूनीशेंन्स इंडिया लिमिटेड और रूस की रोसोबोरोन एक्सपोर्ट और कॉनकॉर्न कालाशनिकोव मिलकर बना रही है। अमेठी की यह परियोजना विभिन्न एमएसएमई और अन्य रक्षा उद्योगों को कच्चे माल और घटकों की आपूर्ति के लिए व्यावसायिक अवसर प्रदान करेगी, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को भारत के बढ़ते रक्षा निर्माण कौशल में एक प्रमुख योगदानकर्ता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 7.62 गुणे 39 एमएम कैलिबर एके -203 राइफल्स तीन दशक पहले सैनिक तथा अर्धसैनिक पुलिस बल में शामिल इन-सर्विस इंसास राइफल की जगह लेगी। एके-203 असॉल्ट राइफल्स, 300 मीटर की प्रभावी रेंज के साथ, हल्के वजन, मजबूत और सिद्ध तकनीक के साथ आधुनिक असॉल्ट राइफल्स का उपयोग करने में आसान हैं। इसी कारण यह राइफल वर्तमान और परिकल्पित परिचालन चुनौतियों का पर्याप्त रूप से सामना करने के लिए सैनिकों की युद्ध क्षमता को बढ़ाएगी। यह राइफल किसी भी प्रकार की काउंटर इंसर्जेंसी या काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन में भारतीय सेना की परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाएंगे। 

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