संगीत व मंगल गीतों संग परिणय सूत्र में बंधे आम-इमली, सीतापुर में हुआ अद्भुत कार्यक्रम

अनंत चतुर्दशी के शुभ मुहूर्त पर चिरंजीव रसाल (आम) व आयुष्मती इमली के विवाह समारोह में लोगों की भीड़ एकत्र थी। सीतापुर में कार्यक्रम देखने आस पास गांवों के लोग जुटे थे। कार्यक्रम के लिए कार्ड भी वितरित किए गए थे।

Anurag GuptaSun, 19 Sep 2021 07:00 PM (IST)
पिसावां के बाबा मुल्लाभीरी मनरेगा स्मृति वाटिका में हुआ अद्भुत कार्यक्रम।

सीतापुर, [अखिलेश सिंह]। मुस्तफाबाद में रविवार को बाबा मुल्लाभीरी मनरेगा स्मृति वाटिका का नजारा बिल्कुल अलग था। अनंत चतुर्दशी के शुभ मुहूर्त पर चिरंजीव रसाल (आम) व आयुष्मती इमली के विवाह समारोह में लोगों की भीड़ एकत्र थी। कार्यक्रम देखने आस पास गांवों के लोग जुटे थे। कार्यक्रम के लिए कार्ड भी वितरित किए गए थे। दर्शनाभिलाषी सरकारी विभागों के प्रतिनिधि, स्वागत कर्ता कठिना संरक्षण समिति के लोग थे। समारोह में लोक संस्कृति, सभ्यता और विज्ञान का अद्भुत नजारा था। कठिना नदी को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू हुआ यह अभियान कठिना संरक्षण समिति व लोक भारती की मुहिम से परवान चढ़ता नजर आया। स्मृति वाटिका में आम और इमली के विवाह संग 51 बाग स्थापित हुए। अधिकारियों ने भी हरिशंकरी के पौधे रोपे। कार्यक्रम की खूब भी चर्चा रही।

यह थे बाराती, गाए गए मंगलगीत : बारात में आम, बरगद, पीपल, अमरूद, शीशम, नीम, पाकर, नींबू आदि बाराती के रूप में शामिल थे। विवाह में सभी रस्में निभाई गई। बारात आने पर स्वागत प्रधान मुन्नी देवी ने महिलाओं के साथ किया, कलश पूजन कर चुनरी दान की गई। महिलाओं ने पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए मंगल गीत गाए।

दहेज में दिया गया खुरपा, कुदाल : आचार्य हरिप्रकाश शुक्ला, नवनीत मिश्रा, विनोद शुक्ला, श्याम बाबू शुक्ला, स्वप्न दीप अवस्थी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आम व इमली का विवाह कराया। बागवानों को खुरपा, कुदाल, खाद, स्प्रे मशीन आदि दहेज में दिया गया।

बैलों की दौड़ प्रतियोगिता हुई : कार्यक्रम में बैलों की दौड़ प्रतियोगिता हुई। इसमें सुनील सिंह के बैलों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। दूसरे नंबर पर भानु प्रताप व तीसरे नंबर पर राम सिंह के बैल रहे। विजेताओं को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

बैलगाड़ी से आई बारात : रमुआपुर, भिठौरा, मुल्लाभीरी आदि गांवों से बारात बैलगाड़ी व डनलप से आई। बैलगाड़ी पर महिलाएं व बच्चे भी सवार थे, सभी उत्साहित नजर आए। ग्रामीण परिवेश व शैली में कार्यक्रम चार चांद लगा रहा था।

मयूर बाजा व हुड़ुक नृत्य ने पुरानी यादें ताजा की : शादी समारोह में द्वाराचार के समय मयूर बाजा, डंहकी बाजा ने पुरानी यादें ताजा कर दीं। हुड़ुक नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। चालीस वर्ष पहले यह संगीत व नृत्य ग्रामीण परिवेश में अधिक प्रचलित थे। इनको देखकर वृद्ध जन पुराने यादें ताजा करते नजर आए।

खाने में यह परोसा गया : नाश्ते में बारातियों को दोना में बूंदी दी गई। खाने में पत्तल पर उरद का बड़ा, चावल, आलू-परवल की सब्जी, काड़ा की दाल के साथ चूल्हे पर बनी मोटी रोटी खाने में दी गई। पीने के लिए पानी कुल्हड़ में दिया गया।

इनकी रही मौजूदगी : सीडीओ अक्षत वर्मा, उप कृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र, डीसी मनरेगा सुशील कुमार श्रीवास्तव, बीडीओ अशोक कुमार चौरसिया, जेई धीरेंद्र सिंह, एडीओ पंचायत प्रेम प्रकाश चौधरी, डा. अवनीश कुमार, मुख्य संयोजक कमलेश सिंह, लोक भारती के संगठन मंत्री बृजेंद्र, गोपाल, नीरज सिंह, वेद रत्न आदि मौजूद रहे।

ड्रोन से रखी गई नजर : कार्यक्रम की निगरानी के लिए दो ड्रोन काम कर रहे थे। इनके माध्यम से कार्यक्रम की बराबर निगरानी की जाती रही। कार्यक्रम में लगभग 400 से अधिक लोग शामिल थे।

पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए यह कार्यक्रम माडल साबित होगा। आज इसकी बेहतर शुरू हुई है। लोगों का सहयोग भी मिला है। इसी तर्ज पर अन्य गांवों में काम कराया जाएगा।  -अक्षत वर्मा, सीडीओ

पर्यावरण के हित में कठिना संरक्षण समिति व लोक भारती के प्रयास सराहनीय हैं। इस मुहिम में लोगों की सहभागिता सकारात्मक संकेत है। भविष्य में इसके अच्छे परिणाम मिलेंगे।  - अरविंद मोहन मिश्र, उप कृषि निदेश

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