डाक टिकट में दिखेगी लखनऊ के चिड़ि‍याघर की परछाई, शताब्दी वर्ष पर प्राणी उद्यान में होंगे कई कार्यक्रम

नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के निदेशक डा.आरके सिंह ने बताया कि डाक टिकट जारी होने से देख-विदेश में लखनऊ चिडिय़ाघर की पहचान बनेगी। यह टिकट शताब्दी वर्ष में प्रकाशित हो रहा है इसलिए इसकी बाद में कोई छपाई नहीं होगी।

Anurag GuptaSun, 28 Nov 2021 12:24 PM (IST)
सोमवार को अपना शताब्दी वर्ष मनाने जा रहे नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान (चिडिय़ाघर) में कई आयोजन भी होंगे।

लखनऊ, [अजय श्रीवास्तव]। लखनऊ चिडिय़ाघर भी अब डाक टिकट पर दिखेगा। पांच रुपये कीमत का यह टिकट शताब्दी वर्ष 29 नवंबर को जारी होगा। टिकट पर चिडिय़ाघर के गेट के साथ ही कुछ वन्यजीव भी दिखाई देंगे। सोमवार को अपना शताब्दी वर्ष मनाने जा रहे नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान (चिडिय़ाघर) में कई आयोजन भी होंगे। डाक टिकट ने चिडिय़ाघर की छपाई के लिए बारह लाख खर्च किए हैं। अब डाक विभाग चिडिय़ाघर को साठ हजार टिकट भी देगा, जिसे चिडिय़ाघर प्रशासन अपने काउंटर से बेचेगा। डाक टिकट का संग्रह करने वालों के लिए यह टिकट खास होगा, क्योंकि इसकी छपाई दोबारा नहीं होगी। इसकी कीमत पचास रुपये तक हो सकती है। 

नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के निदेशक डा.आरके सिंह ने बताया कि डाक टिकट जारी होने से देख-विदेश में लखनऊ चिडिय़ाघर की पहचान बनेगी। यह टिकट शताब्दी वर्ष में प्रकाशित हो रहा है, इसलिए इसकी बाद में कोई छपाई नहीं होगी। चिडिय़ाघर प्रशासन को भी साठ हजार डाक टिकट मिलेंगे, जिसे काउंटर से पचास रुपये तक में बेचा जाएगा, क्योंकि आने वाले समय में दुर्लभ हो जाएगा और डाक टिकट का संग्रह करने वालों के लिए पसंदीदा होगा।

चौदह फीट का होगा शताब्दी स्तंभ : नरही गेट से चिडिय़ाघर में प्रवेश करते ही सामने की तरफ अब शताब्दी स्तंभ नजर आएगा। पत्थर से तैयार हो रहे इस स्तंभ पर बबर शेर से लेकर पक्षियों व अन्य वन्यजीवों की आकृति बनाई जा रही है। चौदह फीट ऊंचा, नौ फीट चौड़ा और ढ़ाई फीट मोटाई वाले इस स्तंभ पर चिडिय़ाघर का अतीत भी दिखाई देगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 नवंबर को शाम चार बजे शताब्दी स्तंभ का अनावरण करेंगे।

चिडिय़ाघर एक नजर में : अवध के दूसरे नवाब नसीरूद्दीन हैदर ने बनारसी बाग को परिवर्तित कर लखनऊ प्राणि उद्यान की स्थापना 29 नवंबर 1921 को की थी। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन गवर्नर सर हरकोर्ट बटलर ने तत्कालीन प्रिंस आफ वेल्स के लखनऊ आगमन को यादगार बनाने के लिए उद्यान का नाम प्रिंस आफ वेल्स जूलोजिकल गार्डेन रखा गया था। बाद में अवध के नवाब वाजिद अली शाह का नाम इस उद्यान को मिला।

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