Corona Third Wave: कोरोना से जंग के लिए लखनऊ के महिला अस्पताल भी तैयार, झलकारी बाई में एचडीयू की सुविधा जल्द

कोरोना के खिलाफ जंग में लखनऊ के महिला अस्पतालों की तैयारी भी पूरी है। हालांकि ये नान कोविड अस्पताल हैं फिर भी प्रसव की जटिलताओं के बेहतर प्रबंधन के लिए कई नई सुविधाएं शुरू की गई हैं। तीसरी लहर में प्रसूताओं को भटकना न पड़े इसलिए यह सुविधाएं राहत देंगी।

Vikas MishraThu, 05 Aug 2021 08:29 AM (IST)
केजीएमयू के क्वीन मेरी में नई सुविधा के तौर पर पैथोलॉजी यूनिट व ब्लड बैंक की शुरुआत हो चुकी है।

लखनऊ, जागरण संवाददाता। कोरोना के खिलाफ जंग में महिला अस्पतालों की तैयारी भी पूरी है। हालांकि, ये नान कोविड अस्पताल हैं, फिर भी प्रसव की जटिलताओं के बेहतर प्रबंधन के लिए कई नई सुविधाएं शुरू की गई हैं। कोरोना की संभावित तीसरी लहर में प्रसूताओं को इधर-उधर ना भागना पड़े, इसलिए भी यह सुविधाएं राहत देंगी। केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी) में नई सुविधा के तौर पर पैथोलॉजी यूनिट व ब्लड बैंक इकाई की शुरुआत हो चुकी है। यह प्रदेश का सबसे बड़ा रेफरल केंद्र है। यहां हर माह करीब 900 से 1000 प्रसव हो रहे हैं। ओपीडी में हर महीने करीब दस हजार महिलाओं को इलाज मिल रहा।

भर्ती होने वाली अधिकांश महिलाएं गंभीर होती हैं, उन्हें तत्काल गहन प्रसूति देखभाल की जरूरत होती है। बेहतर इलाज के लिए 24 घंटे पैथोलॉजी सेवाएं प्रसूताओं को राहत देगी। वहीं, ब्लड बैंक शुरू होने से रक्त की शीघ्र व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी। वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय (डफरिन) में अभी तक गंभीर मरीजों को भी सामान्य वार्ड में ही रखा जाता था। हालत ज्यादा खराब होने पर प्रसूता को केजीएमयू रेफर किया जाता था, लेकिन अब रेफर रेट कम होगा। चिकित्सालय में वार्ड-2 सेंट्रल आक्सीजन युक्त (24 बेड), हाई डिपेंडेंसी यूनिट (आठ बेड), पैथोलॉजी विभाग, स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में दो सीपैप मशीन, आठ ट्रायज बेड, महिला इमरजेंसी सेंट्रल आक्सीजन सहित शुरू हो चुका है। 

प्रमुख चिकित्सा अधीक्षिका डा सीमा श्रीवास्तव ने बताया कि 10050 लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाला आक्सीजन प्लांट भी प्रस्तावित है। एचडीयू में हाई रिस्क प्रेगनेंसी के मामलों में प्रसूताओं को इलाज मिलना भी शुरू हो गया है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए हम ट्राएज एरिया में सबसे पहले प्रसूता को उपचार देंगे। उसके बाद होल्डिंग एरिया और फिर जरूरत के हिसाब से वार्ड में शिफ्ट करेंगे। वहीं, कान्टीन्यूअस पाजीटिव एयर-वे प्रेशर मशीन (सीपैप) के लगने से भी जिन बच्चों में के फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं, उनके इलाज में बहुत सहायता मिलेगी।

सीपैप से बिना किसी ट्यूब को अंदर डाले नाक की सहायता से ही हल्के प्रेशर से आक्सीजन या हवा दी जाती है। हल्के प्रेशर से लगातार दबाव बनाने से फेफड़े एक बार फूलने के बाद वापस चिपकते नहीं हैं, जिससे सांस लेने में आसानी हो जाती है। झलकारी बाई महिला अस्पताल में भी जल्द एचडीयू की सुविधा उपलब्ध होगी। पुराने लेबर रूम के नवीनीकरण का काम हो रहा, इसी में आठ बेड के एचडीयू को संचालित किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डा रंजना खरे ने बताया कि एचडीयू में प्रशिक्षित स्टाफ के साथ ही विशेषज्ञ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ 24 घंटे मौजूद रहेंगे।

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