लखनऊ के पद्मेंद्र से मिलिए, जोखिम में थी जान फिर भी कोरोना संक्रमित 675 शवों को पहुंचाया श्मशान

कोरोना संक्रमण काल में 675 संक्रमित शवों का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें 150 लावारिस थे।

लखनऊ के पोस्टमॉर्टम हाउस में पद्मेंद्र सिंह पंवार अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना संक्रमित शवों को श्मशान पहुंचाकर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण काल में 675 संक्रमित शवों का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया गया जिसमें 150 लावारिस थे।

Publish Date:Tue, 26 Jan 2021 06:00 AM (IST) Author: Divyansh Rastogi

लखनऊ [जितेंद्र उपाध्याय]। कोरोना संक्रमण काल ने खून के रिश्‍तों को भी पानी कर दिया। अपने इस कदर पराए हो गए कि इलाज के दौरान सिर्फ फोन पर सांत्वना मिली। अस्पताल जाकर देखना तो दूर की बात मौत के बाद अपनों के संक्रमित शवों को कोई लेने तक नहीं आया। ऐसे में लखनऊ के पोस्टमॉर्टम हाउस में बीच बॉडी डिस्पोजल प्रभारी पद्मेंद्र सिंह पंवार अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना संक्रमित शवों का पोस्‍टमॉर्टम कर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। अब तक 675 शवों का पोस्‍टमॉर्टम उन्‍होंने अंतिम संस्कार किया है, जिसमें से 150 लावारिस थे। 

कोरोना के खिलाफ यूं तो तमाम डॉक्टर व स्टाफ ने मिलकर जंग लड़ी। लेकिन कोरोना संक्रमित मरीजों की मृत्यु के बाद उनके शव को श्मशान पहुंचाने के लिए कोई तैयार नहीं था, तब एसएस पंवार से साथियों के साथ मिलकर पदमेंद्र सिंह ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। दिन हो या रात, अधिकारियों के एक फोन पर वह काम पर आ जाते। सीधे कोरोना संक्रमित शवों के संपर्क में रहने के कारण पूरी टीम को महीनों तक अपने घर से भी दूर रहना पड़ा। घर वाले उन्हें देखने के लिए तरस गए।

 

बेटे ने संक्रमित पिता का शव लेने किया इन्‍कार: बेटे ने संक्रमित पिता का शव लेने किया इन्‍कार:  घर से दूर खुद की जान जोखिम में डालकर अपना फर्ज निभाने वाले पदमेंद्र सिंह पंवार कहते हैं कि एसजीपीजीआइ में कोरोना संक्रमण से एक व्यक्ति की मौत हो गई। बेटे को फोन करके सूचना दी गई, लेकिन उसने आने से ही इन्‍कार कर दिया। हमारे पास सूचना आई और फिर उन शवों को श्‍मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। यह अकेला एक मामला नहीं था, विकासनगर, आशियाना, गोमतीनगर समेत कई क्षेत्रों के ऐसे करीब 150 कोरोना संक्रमित लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ा। 

कई परिवारीजन तो पहचानने के लिए भी नहीं आते थे। एसडीएम ज्योत्सना के साथ पूरी टीम 24 सेवा में जुटी रहती थी। कोरोना काल के चलते हर साल के मुकाबले इस बार बाहर के जिलों से दुर्घटना वाले शव कम आए। दिसंबर तक 4 हजार शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया। सामान्य दिनों में यह संख्या करीब छह हजार को पार कर जाती थी। 

 

टीम भावना रही सर्वोपरि: शहीद पथ पर रहने वाले पद्मेंद्र सिंह पंवार ने बताया कि इस विषम परिस्थिति में टीम भावना सर्वोपरि रही। मुख्य फार्मासिस्ट अजय कृष्ण के साथ ही राजेश, मनोज, रोहित, आशू, सुखदर्शन, रामकुमार, आशीष, दीपक व हफीजुर्रहमान ने मिलकर संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार किया।

 

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