विधायक शैलेंद्र कुमार सिंह को नोटिस, कोर्ट ने पूछा-क्यों न जमानत खारिज कर जेल में रखा जाए

विशेष जज ने अपने आदेश में कहा है कि जमानत के समय अभियुक्त ने इस बात की अंडरटेकिंग दी थी कि वह साक्ष्य के दौरान अदालत में उपस्थित रहेगा। सोमवार को इस मामले में गवाह होरीलाल पाल अदालत में उपस्थित हुआ और अपनी गवाही दर्ज कराई।

Anurag GuptaMon, 20 Sep 2021 08:24 PM (IST)
अक्टूबर 2009 को धोखाधड़ी के इस मामले की एफआईआर गोरखपुर निवासी केडी अग्रवाल ने थाना गोमतीनगर में दर्ज कराई थी।

लखनऊ, [विधि संवाददाता]। जमीन से जुड़े धोखाधड़ी व गैंगेस्टर के एक मामले में गवाह से जिरह के दौरान अभियुक्त के गैरहाजिर रहने पर एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने सख्त रुख अख्तियार किया है। विशेष जज पवन कुमार राय ने अभियुक्त व भाजपा विधायक शैलेंद्र कुमार सिंह उर्फ शैलू को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। पूछा है कि क्यों न जमानत खारिज कर और जेल में रखकर गवाही पूरी कराई जाए। मामले की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी।

विशेष जज ने अपने आदेश में कहा है कि जमानत के समय अभियुक्त ने इस बात की अंडरटेकिंग दी थी कि वह साक्ष्य के दौरान अदालत में उपस्थित रहेगा। सोमवार को इस मामले में गवाह होरीलाल पाल अदालत में उपस्थित हुआ और अपनी गवाही दर्ज कराई। इसके बाद अभियुक्त की ओर से जिरह होना था। गवाह पूरे दिन अदालत में रहा, लेकिन अभियुक्त की ओर से जिरह नहीं किया गया और न उनके वकील की ओर से कोई अर्जी दी गई। जबकि मामला 12 साल पुराना है।

13 अक्टूबर, 2009 को धोखाधड़ी के इस मामले की एफआईआर गोरखपुर निवासी केडी अग्रवाल ने थाना गोमतीनगर में दर्ज कराई थी। जिसके मुताबिक उन्होंने एक जमीन खरीदी थी। जिस पर कुटरचित दस्तावेजों के सहारे अभियुक्त शिवनंदन ने व्यवधान पैदा किया। इसके बाद शैलेंद्र कुमार सिंह उर्फ शैलू से इस जमीन का अवैध रूप से विक्रय अनुबध कर लिया। विवेचना के बाद इस मामले में इन दोनों अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ।

दुष्कर्मी को 10 साल की सजा : शादी के लिए अपहरण कर युवती से दुष्कर्म करने के मामले में पॉक्सो की विशेष अदालत ने अभियुक्त योगेश उर्फ तरुण को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष जज अरविन्द मिश्र ने इस पर 30 हजार का जुर्माना भी ठोंका है। विशेष लोक अभियोजक अभिषेक उपाध्याय के मुताबिक अभियुक्त ने पीड़िता को बहला-फुसलाकर दिल्ली बुलाया। वहां से हरियाणा ले गया। जहां पीड़िता की मर्जी के खिलाफ उससे शादी की और दुष्कर्म किया। 22 जनवरी, 2016 को इस मामले की एफआइआर पीड़िता के पिता ने थाना ठाकुरगंज में दर्ज कराई थी।

लाखों की धोखाघड़ी में अभियुक्त की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज : लाखों की धोखाधड़ी के एक मामले में वांछित अभियुक्त बलराम पाठक की अग्रिम जमानत अर्जी सीबीआई की विशेष अदालत ने खारिज कर दी है। विशेष जज अजय विक्रम सिंह ने प्रथम दृष्टया इसके अपराध को गंभीर करार दिया है। सीबीआई के मुताबिक अभियुक्त बलराम पाठक के भाई अशोक पाठक ने मेसर्स लैंड मार्क प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक की हैसियत से एक वकील के मार्फत फर्जी दस्तखत से हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल किया था। इस बात की जानकारी जब खुर्शीद आगा को हुई, तो उसने बताया कि यह याचिका उसने दाखिल नहीं किया है। हाईकोर्ट ने तब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। विवेचना में यह भी सामने आया कि अभियुक्तों ने मेसर्स आधुनिक सहकारी गृह निर्माण समिति के कथित सचिव कपिल प्रताप राना के साथ मिलकर एक जमीन की खरीद-बिक्री में करीब तीन करोड़ का वारा-न्यारा किया है। इसमें 22 लाख की रकम अभियुक्त बलराम पाठक के खाते में अंतरित किया गया था।

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