लखनऊ के बलरामपुर-सिविल अस्पताल में जनऔषधि कंद्रों पर दवा का अवैध धंधा, अफसर के गोल-मोल जवाब

लखनऊ के बलरामपुर-सिविल अस्पताल का मामला। सरकार से करार व फार्मेसी लाइसेंस निरस्त, फिर भी मरीजों को बेंची दवा।

लखनऊ के बलरामपुर-सिविल अस्पताल का मामला। सरकार से करार व फार्मेसी लाइसेंस निरस्त फिर भी मरीजों को बेंची दवा। राजधानी में कुल 72 जनऔषधि केंद्र हैं। इनमें 12 सरकारी अस्पतालों में खुले हैं। सरकारी अस्पतालों में जनऔषधि केंद्र संचालन के लिए सरकार ने निजी वेंडर के साथ करार किया था।

Publish Date:Wed, 02 Dec 2020 06:48 PM (IST) Author: Divyansh Rastogi

लखनऊ, जेएनएन। सरकारी अस्पतालों में निजी वेंडर से जनऔषधि केंद्र का करार समाप्त हो गया है। वहीं, खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने लाइसेंस भी निरस्त कर दिया है। बावजूद, राजधानी के दो अस्पतालों में अवैध तरीके से बुधवार को मरीजों को दवा बेची गईं। उधर, अफसर गोलमोल जवाब दे रहे हैं। राजधानी में कुल 72 जनऔषधि केंद्र हैं। इनमें 12 सरकारी अस्पतालों में खुले हैं। सरकारी अस्पतालों में जनऔषधि केंद्र संचालन के लिए सरकार ने निजी वेंडर के साथ करार किया था। 

ऐसे में केंद्र सरकार के उपक्रम बीपीपीआइ व राज्य सरकार की हेल्थ एजेंसी साची ने निजी वेंडर के साथ करार समाप्त कर दिया। साथ ही दवा बिक्री पर रोक लगा दी। लिहाजा, खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने तत्काल सभी सरकारी जनऔषधि केंद्रों का लाइसेंस निरस्त कर दिया। ऐसे में केजीएमयू, लोहिया, बीआरडी, लोकबंधु, आरएसएम अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों के जनऔषधि केंद्रों पर ताला पड़ गया। वहीं, बलरामपुर अस्पताल व सिविल अस्पताल में नियमों को ताक पर रखकर बुधवार को फार्मेसी खुलीं। ऐसे में निजी वेंडर द्वारा संचालित फार्मेसी में अवैध तरीके से बिक रही दवा पर अफसर भी मूक दर्शक रहे। 

मरीजों के नुकसान पर कौन होगा जवाबदेह 

जनऔषधि केंद्रों पर हजार से अधिक दवाएं होने का दावा किया जा रहा है। अब वेंडर से करार निरस्त होने के बावजूद कौन सी दवा बेच रहा है। किसी मरीज को गलत दवा से नुकसान होने पर जवाबदेही किसकी होगी। बिना लाइसेंस के दवाएं कैसे बिक रही हैं। इस पर जिम्मेदार खामोश हैं।

क्या कहते हैं अफसर ? 

बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव लोचन के मुताबिक, मरीजों को दिक्कत न हो इसलिए जनऔषधि केंद्र खुलवाया था। इसको लेकर मैं शासन से बात करूंगा। इसके बाद बंद करने का निर्देश वेंडर को दूंगा।  सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके नंदा ने बताया कि जनऔषधि केंद्र के वेंडर का टेंडर निरस्त होने की जानकारी नहीं है। बड़े बाबू अवकाश पर थे। ऐसे में आदेश की जानकारी न होने से बुधवार को फार्मेसी खोली गई। ड्रग इंस्पेक्टर बृजेश कुमार का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में खुले जनऔषधि केंद्रों की लाइसेंस निरस्त की जा चुकी हैं। वेंडर अब उन पर दवा बिक्री नहीं कर सकता है। इन दुकानों को बंद कराया जाएगा। बिना लाइसेंस दवा बेचना अवैध है। 

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