KGMU में कर्मियों की भर्ती धांधली मामले में कार्रवाई डंप, प्रशासनिक फेरबदल के बाद फंसी फाइल

केजीएमयू में कर्मियों की भर्ती मामले में धांधली का भंडाफोड़। मंडलायुक्त की रिपोर्ट में हो चुका खुलासा।
Publish Date:Thu, 22 Oct 2020 07:09 PM (IST) Author: Divyansh Rastogi

लखनऊ, जेएनएन। केजीएमयू में कर्मियों की भर्ती मामले में धांधली का भंडाफोड़ हो चुका है। कमिश्नर की रिपोर्ट में गड़बड़ी उजागर हो चुकी है। बावजूद, मामला दबाया जा रहा है। कारण, मामले में घिरे कुछ डॉक्टर प्रशासनिक पदों पर पहुंच चुके हैं। ऐसे में बार-बार कमेटी बनाकर मामला लटकाया जा रहा है।

केजीएमयू में वर्ष 2004-05 में समूह-ग के 94 पदों पर भर्ती हुई। इसमें वाहन चालक, कनिष्ठ लिपिक, रिकॉर्ड कीपर, इलेक्ट्रीशियन, टेलीफोन ऑपरेटर, ड्राइवर समेत आदि पद रहे। इस दौरान नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को नौकरियां बांट दी गई। मामले को लेकर शासन से शिकायत की गई। इसमें तत्कालीन मंडालायुक्त, लखनऊ ने जांच की। ऐसे में भर्ती में गड़बड़ी उजागर हुई। शासन ने कुलपति केजीएमयू को दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद तत्कालीन कुलपति ने कुल सचिव से दोबारा जांच कराई। कुल सचिव ने भी मंडलायुक्त की रिपोर्ट को सही पाया। मगर, इस बीच भर्ती धांधली में शामिल डॉक्टर प्रशासनिक पदों पर पहुंच गए। ऐसे में शासन की रिपोर्ट नजरंदाज कर संस्थान प्रशासन कार्रवाई के नाम पर कमेटी गठित करता रहा। मगर, अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। मामले की शिकायत, सीएम-पीएम तक की गई है।

दूसरी भर्ती में भी भाई-भतीजवाद के आरोप

केजीएमयू में एक भर्ती धांधली का मामला ठंडा नहीं हुआ। वहीं वर्ष 2010 की भर्ती की भी शिकायत सीएम से की गई है। आरोप हैं कि स्वागती पद पर तैनात एक अभ्यर्थी की उम्र तय सीमा से अधिक थी। वहीं,  तिथि निकलने के बाद उसका आवेदन कराकर भर्ती की गई। संबंधित अभ्यर्थी का आवेदन शुल्क भी नहीं जमा है। इसके अलावा सोशल वर्कर, पीआरओ पद पर भी भाई-भतीजवाद के आरोप हैं। साथ ही एक कर्मचारी पर बैकडोर से एजेंसी चलाकर पैसे लेकर आउट सोर्सिंग कर्मी की भर्ती करने की शिकायत की गई है। इस मामले में जांच कमेटी सप्ताह भर पहले बनी। मगर, अभी कार्रवाई डंप है।

क्या कहते हैं केजीएमयू प्रवक्ता ?

केजीएमयू प्रवक्ता के डॉ. सुधीर सिंह के मुताबिक,  कर्मचारियों की भर्ती मामले में कमेटी गठित की गई थी। इसकी रिपोर्ट कुल सचिव को सौंपी दी गई है। जिसे कार्रवाई के लिए कार्यपरिषद में रखा जाना था। अभी आगे का निर्णय होना शेष है।

 

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